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Sitapur News: बाढ़ ने तबाह की फसल, कर्ज कैसे चुकाएंगे किसान
Sun, 03 Sep 2023 12:15 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 03 Sep 2023 12:15 AM IST
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रामपुर मथुरा/सीतापुर। गांजरी इलाके में फसल हुई तो किसी ने आवास के लिए जमीन खरीदने तो किसी ने कर्ज अदा करने की आस संजो रखी थी लेकिन बाढ़ किसानों के अरमान अपने साथ बहा ले गई। अब उम्मीदों को पूरा करना तो दूर बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र के किसानों को कर्ज अदा करने की चिंता सताने लगी है। उनके सामने गुजर बसर का संकट भी खड़ा हो गया है।
हर साल बाढ़ सरयू के तटवर्ती इलाके में तबाही की नई इबारत लिख देती है। सरकार और प्रशासन बाढ़-कटान से बचाव के दावे तो बहुत करता है लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहता है। बाढ़ पीड़ितों से बात करने पर उनका दर्द छलक पड़ा। सबसे बड़ी समस्या उन लोगों के सामने है, जिन्होंने उधार पैसे लेकर बड़े अरमानों से फसल बोई थी। सपने देखे थे, कि फसल अच्छी होगी तो अपनी जीवन शैली में सुधार करेंगे। सारे सपने बाढ़ में बह गए।
बंटाई पर फसल बोई, सब बर्बाद हो गई
मेरे पास तीन एकड़ जमीन थी। पिछले 2 वर्षो में घर के साथ सारी जमीन सरयू नदी में कट गई। इस बार हमने 2 बीघा खेत बंटाई पर लेकर धान बोआ था। सोचा था फसल बेचकर एक टीन शेड घर में डलवाएंगे। बाढ़ का पानी हटने पर देखा तो का एक पौधा भी नही दिख रहा है। सारी फसल बर्बाद हो गई।
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-सोहन, बाढ़ पीड़ित
उधार लेकर फसल लगाई, सब हुआ चौपट
मेरे पास कुल 2 बीघा खेत था, जो नदी में कट चुका है। बंटाई लेकर 3 बीघे में मक्का व धान लगाया था। बाढ़ से बड़ी मात्रा में सिल्ट लगभग पूरे खेत व फसल पर जमी हुई है। पूरी फसल तबाह हो गई। पैसा उधार लेकर खेती में लगाया था।
- कन्हई, बाढ़ पीड़ित
फसल बर्बाद हुई तो टूट गए सपने
4 बीघा जमीन सरयू की धारा में कटने के बाद 3 बीघा खेत बंटाई लेकर धान की रोपाई की थी। सोचा था, कि नाव चलाकर परिवार का पालन पोषण कर लेंगे और फसल से जो पैसे मिलेंगे उससे बंधे के बाहर रहने के लिए थोड़ी जमीन ले लेंगे। मगर फसल नष्ट होने के साथ सारे सपने भी बिखर गए हैं।
- तुर्रम, बाढ़ पीड़ित
सर्वे रिपोर्ट के आधार पर मिलेगा मुआवजा
फसल व खेतों के कटान का मुआवजा सर्वे रिपोर्ट भेजे जाने के बाद ही शासन से मिलता है। नुकसान का सर्वे कराया जाएगा। उसीआधार पर मुआवजा दिया जाएगा।
- सूरज प्रताप सिंह, तहसीलदार महमूदाबाद
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हर साल बाढ़ सरयू के तटवर्ती इलाके में तबाही की नई इबारत लिख देती है। सरकार और प्रशासन बाढ़-कटान से बचाव के दावे तो बहुत करता है लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहता है। बाढ़ पीड़ितों से बात करने पर उनका दर्द छलक पड़ा। सबसे बड़ी समस्या उन लोगों के सामने है, जिन्होंने उधार पैसे लेकर बड़े अरमानों से फसल बोई थी। सपने देखे थे, कि फसल अच्छी होगी तो अपनी जीवन शैली में सुधार करेंगे। सारे सपने बाढ़ में बह गए।
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बंटाई पर फसल बोई, सब बर्बाद हो गई
मेरे पास तीन एकड़ जमीन थी। पिछले 2 वर्षो में घर के साथ सारी जमीन सरयू नदी में कट गई। इस बार हमने 2 बीघा खेत बंटाई पर लेकर धान बोआ था। सोचा था फसल बेचकर एक टीन शेड घर में डलवाएंगे। बाढ़ का पानी हटने पर देखा तो का एक पौधा भी नही दिख रहा है। सारी फसल बर्बाद हो गई।
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-सोहन, बाढ़ पीड़ित
उधार लेकर फसल लगाई, सब हुआ चौपट
मेरे पास कुल 2 बीघा खेत था, जो नदी में कट चुका है। बंटाई लेकर 3 बीघे में मक्का व धान लगाया था। बाढ़ से बड़ी मात्रा में सिल्ट लगभग पूरे खेत व फसल पर जमी हुई है। पूरी फसल तबाह हो गई। पैसा उधार लेकर खेती में लगाया था।
- कन्हई, बाढ़ पीड़ित
फसल बर्बाद हुई तो टूट गए सपने
4 बीघा जमीन सरयू की धारा में कटने के बाद 3 बीघा खेत बंटाई लेकर धान की रोपाई की थी। सोचा था, कि नाव चलाकर परिवार का पालन पोषण कर लेंगे और फसल से जो पैसे मिलेंगे उससे बंधे के बाहर रहने के लिए थोड़ी जमीन ले लेंगे। मगर फसल नष्ट होने के साथ सारे सपने भी बिखर गए हैं।
- तुर्रम, बाढ़ पीड़ित
सर्वे रिपोर्ट के आधार पर मिलेगा मुआवजा
फसल व खेतों के कटान का मुआवजा सर्वे रिपोर्ट भेजे जाने के बाद ही शासन से मिलता है। नुकसान का सर्वे कराया जाएगा। उसीआधार पर मुआवजा दिया जाएगा।
- सूरज प्रताप सिंह, तहसीलदार महमूदाबाद