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Sitapur News: रोजाना रेफर हो रहे आठ से 10 मरीज, ट्रामा सेंटर बना दिखावा

Fri, 23 Dec 2022 11:52 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 23 Dec 2022 11:52 PM IST
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Even after five years there is no treatment facility at trauma center
सीतापुर। पांच साल बाद भी ट्रॉमा सेंटर में इलाज सुविधा न मिल पाने का खामियाजा गंभीर मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। ऐसे मरीजों की हालत बिगड़ने पर लखनऊ तक की दौड़ लगाना पड़ती है। ट्रॉमा सेंटर का संचालन न हो पाने के कारण ही जिला अस्पताल से हर दिन दस मरीजों को बेहतर इलाज के लिए रेफर करना पड़ रहा है। जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण ही पांच साल से ट्रॉमा सेंटर के लिए बना भवन संसाधनों व स्टाफ के अभाव में सिर्फ शोपीस बना खड़ा है।
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पांच साल पहले खैराबाद इलाके जमैय्यतपुर में करीब दो करोड़ की लागत से गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज सुविधा मुहैया कराने के लिए इस ट्रॉमा सेंटर का भवन बनकर तैयार हुआ था। इसके बाद से ट्रॉमा सेंटर को क्रियाशील बनाने के कई प्रयासों के बाद भी यह सेंटर अभी तक चालू नहीं हो पाया है।
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इस मसले पर कुछ जनप्रतिनिधियों के साथ क्षेत्रीय लोगों द्वारा नाराजगी जताने पर खानापूर्ति के लिए केवल एक चिकित्सक के सहारे ओपीडी व्यवस्था शुरू करा जिम्मेदारों ने चुप्पी साध ली। भवन बनने के बावजूद ट्रॉमा सेंटर का संचालन पूरी तरह शुरू न हो पाने का खामियाजा सड़क हादसों में घायल, हार्ट अटैक व पक्षाघात से पीड़ित मरीजों भुगतना पड़ता है। समय पर इलाज सुविधा न मिल पाने से उन्हें लखनऊ ट्रॉमा सेंटर अथवा अन्य अस्पताल में रेफर करना पड़ता है।
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ट्रॉमा सेंटर को शुरू कराने में सबसे बड़ी बाधा चिकित्सकों व स्टॉफ की तैनाती न हो पाना बना है। ट्रॉमा सेंटर परिसर में इनके लिए आवासीय सुविधा मुहैया न हो पाने के कारण ही यहां पर पदों के सृजन के साथ ही उन पर तैनाती का प्रस्ताव बीते पांच साल से अटका पड़ा है।
इस संबंध में सीएमओ का भी यहीं कहना है कि भवन तो बना दिया गया है लेकिन चिकित्सकों व स्टाफ के ठहरने के लिए परिसर में आवास नहीं बनाए गए हैं। इसके साथ ही इसके भवन का निर्माण सीतापुर लखनऊ हाईवे से काफी अंदर बना है। यहां तक पहुंचने के लिए शहर से करीब पांच किलोमीटर की दूरी तय करना पड़ती है। इन्हीं सब परेशानी के कारण इसका संचालन बीच में अटका पड़ा है।

अभी तक सिर्फ दो चिकित्सक व दो स्टॉफ नर्स ही ट्रामा सेंटर में तैनात हैं। संसाधनों की कमी से चिकित्सकीय जांच व परीक्षण इत्यादि की भी कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में तैनात स्टॉफ जिला अस्पताल की इमरजेंसी में अपनी सेवाएं दे रहा है। ट्रामा सेंटर को जल्द ही क्रियाशील बनाने के लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है।
डॉ. मधु गैरोला, सीएमओ
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