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Sitapur News: जेल में दी गईं यातनाएं फिर भी नहीं डिगी आस्था
Thu, 18 Jan 2024 09:03 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Thu, 18 Jan 2024 09:03 PM IST
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महोली/सीतापुर। अयोध्या में 1990 के दौरान श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन चरम पर था। कारसेवकों को पकड़ा जा रहा था। जेल में उन्हें तरह-तरह की यातनाएं दी जा रही थीं। राम काज के लिए कारसेवक इन यातनाओं को खुशी-खुशी झेल रहे थे। कोई एक बार जेल गया तो किसी को चार बार सलाखों के पीछे भेजा गया। इसके बाद भी हौसला डिगा नहीं। आंदोलन में मुस्लिम कारसेवक भी बढ़-चढ़कर शामिल हुए। जेल गए। यातनाओं को सहन किया। समाज के लोगों ने ताने दिए लेकिन आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। अब अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह से कारसेवक गदगद हैं।
देशभर में राम भक्त कारसेवा के लिए उत्साहित थे। उस दौरान नगर क्षेत्र के कई युवाओं ने कारसेवा तो अन्य तमाम लोगों ने उनकी मदद का बीड़ा उठाया था। सरकार की ओर से फरमान जारी होने के बाद कारसेवकों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाने लगा। क्षेत्र के सैकड़ों कारसेवक तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र गुप्ता व विधायक दौलत राम के नेतृत्व में अयोध्या जाने की तैयारी कर रहे थे।
भनक लगते ही पुलिस ने कारसेवकों को गिरफ्तार कर लिया। सभी को लखीमपुर की अस्थायी जेल में भेज दिया गया। लंबे समय तक चले आंदोलन में कई कारसेवक चार बार जेल में डाले गए। इनमें काफी संख्या में मुस्लिम भी थे। जात-पात के बंधन को तोड़ राम काज के लिए मुस्लिम समाज के कई युवा सड़कों पर उतरे। आंदोलन में बढ़-चढ़कर अहम योगदान दिया। अब कारसेवकों का सपना साकार हो रहा है। कई कारसेवक प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर गदगद हैं। 22 जनवरी को मोहल्ले में धूमधाम से दिवाली मनाने की तैयारी है।
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आजादी के आंदोलन से कम नहीं था राम मंदिर आंदोलन
बड़ागांव निवासी फकीर मोहम्मद उन दिनों भाजपा युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष थे। फकीर बताते हैं, कि कारसेवा के लिए तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र गुप्ता व विधायक दौलत राम के अयोध्या के लिए कूच कर दिया। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया। लखीमपुर की अस्थायी जेल भेज दिया गया। उन्होंने बताया कि 25 दिन बाद जेल में रहा। काफी यातनाएं दी गईं। वहां से छूटा। इसके बाद साथियों के साथ दिल्ली चला गया। वहां मुलायम सरकार गिरने की सूचना से मन को काफी सुकून मिला था। उनका कहना है कि राममंदिर निर्माण का आंदोलन उनके लिए आजादी के आंदोलन से कम नहीं था।
चार बार गए जेल, अब संघर्ष हो रहा फलीभूत
महोली के दीक्षित टोला में रहने वाले आदित्य दीक्षित रामकाज के लिए पूरी तरह से समर्पित थे। कारसेवा करने के दौरान उन्हें चार बार जेल भेजा गया। वह बताते हैं, कि बजरंग दल के जिलाध्यक्ष होने के नाते पुलिस लगातार उनकी तलाश में रहती थी। लोगों में कारसेवा की भावना जागृत करने के लिए पुलिस से बचकर अलख जगाता रहता था। पहली बार 29 नवंबर 1990 को 200 कारसेवकों के साथ अयोध्या जा रहा था। पुलिस ने गिरफ्तार कर नैमिष की अस्थायी जेल में डाल दिया। वहां से 16 दिनों बाद रिहाई हुई। इसके एक सप्ताह बाद पुलिस ने फिर गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। वहां से जमानत मिलने के कुछ दिन बाद 10 साथियों के साथ भेष बदलकर अयोध्या जा रहे था। पुलिस ने फिर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। तत्कालीन भाजपा जिलाध्यक्ष प्रकाश मेहरोत्रा व राजेंद्र गुप्ता के साथ अयोध्या जाने के दौरान चौथी बार जेल भेजा गया। मंदिर बनने का सपना देखा था। संघर्ष अब फलीभूत हो रहा है।
22 जनवरी को दीपोत्सव मनाएंगे
महोली के हरिकरन नाथ दीक्षित ने बताया कि प्रभु श्रीराम के लिए कारसेवा करना जीवन का उद्देश्य था। उनके लिए प्राण भी न्योछावर करने पड़ते तब भी पीछे नहीं हटता। कारसेवा के लिए अयोध्या न पहुंच पाने का आज भी मलाल है। सीतापुर से प्रदेश अध्यक्ष व विधायक के साथ जाते समय पुलिस ने गिरफ्तार कर लखीमपुर जेल भेज दिया था। जहां पर 25 दिनों तक सलाखों के पीछे रहना पड़ा था। प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को हो रही है। काफी खुशी का अनुभव हो रहा है। मुझे यह पर्व दीपावली की तरह मनाना है।
प्राण प्रतिष्ठा सपनों के साकार होने जैसा
बड़ागांव निवासी उत्तम मिश्रा बताते हैं, कि 20 वर्ष की उम्र में 10 कारसेवकों के साथ अयोध्या जा रहे थे। सीतापुर में लालबाग चौराहे से सभी को गिरफ्तार कर लखीमपुर की अस्थायी जेल भेज दिया गया। जहां पर खाने-पीने की सुचारू व्यवस्था न होने के कारण कारसेवकों को आंदोलन करना पड़ा था। इसके बाद व्यापार मंडल ने कारसेवकों के भोजन की व्यवस्था की थी। जेल में 25 दिन तक रहे। कारसेवकों ने जेल का माहौल भी राममय कर दिया था। 22 जनवरी को भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा हम लोगों के सपनों का साकार रूप है। जिसे दीपावली के पर्व की तरह मनाने की योजना बनाई है।
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देशभर में राम भक्त कारसेवा के लिए उत्साहित थे। उस दौरान नगर क्षेत्र के कई युवाओं ने कारसेवा तो अन्य तमाम लोगों ने उनकी मदद का बीड़ा उठाया था। सरकार की ओर से फरमान जारी होने के बाद कारसेवकों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाने लगा। क्षेत्र के सैकड़ों कारसेवक तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र गुप्ता व विधायक दौलत राम के नेतृत्व में अयोध्या जाने की तैयारी कर रहे थे।
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भनक लगते ही पुलिस ने कारसेवकों को गिरफ्तार कर लिया। सभी को लखीमपुर की अस्थायी जेल में भेज दिया गया। लंबे समय तक चले आंदोलन में कई कारसेवक चार बार जेल में डाले गए। इनमें काफी संख्या में मुस्लिम भी थे। जात-पात के बंधन को तोड़ राम काज के लिए मुस्लिम समाज के कई युवा सड़कों पर उतरे। आंदोलन में बढ़-चढ़कर अहम योगदान दिया। अब कारसेवकों का सपना साकार हो रहा है। कई कारसेवक प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर गदगद हैं। 22 जनवरी को मोहल्ले में धूमधाम से दिवाली मनाने की तैयारी है।
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आजादी के आंदोलन से कम नहीं था राम मंदिर आंदोलन
बड़ागांव निवासी फकीर मोहम्मद उन दिनों भाजपा युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष थे। फकीर बताते हैं, कि कारसेवा के लिए तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र गुप्ता व विधायक दौलत राम के अयोध्या के लिए कूच कर दिया। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया। लखीमपुर की अस्थायी जेल भेज दिया गया। उन्होंने बताया कि 25 दिन बाद जेल में रहा। काफी यातनाएं दी गईं। वहां से छूटा। इसके बाद साथियों के साथ दिल्ली चला गया। वहां मुलायम सरकार गिरने की सूचना से मन को काफी सुकून मिला था। उनका कहना है कि राममंदिर निर्माण का आंदोलन उनके लिए आजादी के आंदोलन से कम नहीं था।
चार बार गए जेल, अब संघर्ष हो रहा फलीभूत
महोली के दीक्षित टोला में रहने वाले आदित्य दीक्षित रामकाज के लिए पूरी तरह से समर्पित थे। कारसेवा करने के दौरान उन्हें चार बार जेल भेजा गया। वह बताते हैं, कि बजरंग दल के जिलाध्यक्ष होने के नाते पुलिस लगातार उनकी तलाश में रहती थी। लोगों में कारसेवा की भावना जागृत करने के लिए पुलिस से बचकर अलख जगाता रहता था। पहली बार 29 नवंबर 1990 को 200 कारसेवकों के साथ अयोध्या जा रहा था। पुलिस ने गिरफ्तार कर नैमिष की अस्थायी जेल में डाल दिया। वहां से 16 दिनों बाद रिहाई हुई। इसके एक सप्ताह बाद पुलिस ने फिर गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। वहां से जमानत मिलने के कुछ दिन बाद 10 साथियों के साथ भेष बदलकर अयोध्या जा रहे था। पुलिस ने फिर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। तत्कालीन भाजपा जिलाध्यक्ष प्रकाश मेहरोत्रा व राजेंद्र गुप्ता के साथ अयोध्या जाने के दौरान चौथी बार जेल भेजा गया। मंदिर बनने का सपना देखा था। संघर्ष अब फलीभूत हो रहा है।
22 जनवरी को दीपोत्सव मनाएंगे
महोली के हरिकरन नाथ दीक्षित ने बताया कि प्रभु श्रीराम के लिए कारसेवा करना जीवन का उद्देश्य था। उनके लिए प्राण भी न्योछावर करने पड़ते तब भी पीछे नहीं हटता। कारसेवा के लिए अयोध्या न पहुंच पाने का आज भी मलाल है। सीतापुर से प्रदेश अध्यक्ष व विधायक के साथ जाते समय पुलिस ने गिरफ्तार कर लखीमपुर जेल भेज दिया था। जहां पर 25 दिनों तक सलाखों के पीछे रहना पड़ा था। प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को हो रही है। काफी खुशी का अनुभव हो रहा है। मुझे यह पर्व दीपावली की तरह मनाना है।
प्राण प्रतिष्ठा सपनों के साकार होने जैसा
बड़ागांव निवासी उत्तम मिश्रा बताते हैं, कि 20 वर्ष की उम्र में 10 कारसेवकों के साथ अयोध्या जा रहे थे। सीतापुर में लालबाग चौराहे से सभी को गिरफ्तार कर लखीमपुर की अस्थायी जेल भेज दिया गया। जहां पर खाने-पीने की सुचारू व्यवस्था न होने के कारण कारसेवकों को आंदोलन करना पड़ा था। इसके बाद व्यापार मंडल ने कारसेवकों के भोजन की व्यवस्था की थी। जेल में 25 दिन तक रहे। कारसेवकों ने जेल का माहौल भी राममय कर दिया था। 22 जनवरी को भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा हम लोगों के सपनों का साकार रूप है। जिसे दीपावली के पर्व की तरह मनाने की योजना बनाई है।