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Sitapur News: भटक रहे बुजुर्ग, नहीं मिल रही पेंशन
Sun, 02 Aug 2026 12:42 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 02 Aug 2026 12:42 AM IST
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सीतापुर। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत पंजीकृत तमाम बुजुर्ग पेंशन का लाभ पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। चार साल पहले आवेदन करने वाले भी पात्र होने के बावजूद पेंशन नहीं पा रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के बुजुर्गों ने बताया कि उन्होंने पात्रता के सभी दस्तावेज जमा कर दिए हैं। बैंक खाता, आधार और आय प्रमाणपत्र सब सही होने के बाद भी पोर्टल पर उनका आवेदन या तो लंबित दिख रहा है या बार-बार रिजेक्ट हो जा रहा है।
कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। शहर के सिविल लाइन निवासी निशा सक्सेना ने नौ मई 2022 को आवेदन किया था। उन्हें अभी तक पेंशन नहीं मिल सकी है। लोनियनपुरवा पश्चिमी वार्ड निवासी नीलम शुक्ला ने एक साल पहले आवेदन किया था। पात्र होने के बाद भी पेंशन नहीं मिल रही है।
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बीते साल पहली फरवरी को दया राम शुक्ला ने आवेदन किया था। इन्हें भी पेंशन नहीं मिल रही है। इसी तरह तमाम पात्र पेंशन के लिए भटक रहे हैं। बुजुर्गों का कहना है कि पेंशन की राशि से ही दवा और रोजमर्रा का खर्च चलता है। देरी के कारण उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।
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शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के बुजुर्गों ने बताया कि उन्होंने पात्रता के सभी दस्तावेज जमा कर दिए हैं। बैंक खाता, आधार और आय प्रमाणपत्र सब सही होने के बाद भी पोर्टल पर उनका आवेदन या तो लंबित दिख रहा है या बार-बार रिजेक्ट हो जा रहा है।
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कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। शहर के सिविल लाइन निवासी निशा सक्सेना ने नौ मई 2022 को आवेदन किया था। उन्हें अभी तक पेंशन नहीं मिल सकी है। लोनियनपुरवा पश्चिमी वार्ड निवासी नीलम शुक्ला ने एक साल पहले आवेदन किया था। पात्र होने के बाद भी पेंशन नहीं मिल रही है।
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बीते साल पहली फरवरी को दया राम शुक्ला ने आवेदन किया था। इन्हें भी पेंशन नहीं मिल रही है। इसी तरह तमाम पात्र पेंशन के लिए भटक रहे हैं। बुजुर्गों का कहना है कि पेंशन की राशि से ही दवा और रोजमर्रा का खर्च चलता है। देरी के कारण उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।