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दुर्गा पुरवा व कोनी का मुख्यालय से संपर्क टूटा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 13 Aug 2016 11:47 PM IST
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गांजर क्षेत्र में हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं। हालात ये है कि बड़े अरमानों से बनाए गए तमाम आशियाने बह गए हैं। जो बचे हैं वे पानी से घिरे हुए हैं। दुर्गापुरवा गांव के निकट प्रमुख सड़क का 400 मीटर हिस्सा कटकर बह गया है। इससे दुर्गापुरवा व कोनी गांव का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है।
घाघरा के बीच में मौजूद टापू का आधा हिस्सा कटकर बह गया है। ऐसे में बचे हिस्से के समाप्त होने का खतरा मड़रा रहा है। टापू पर करीब तीन सौ परिवार व दुर्गापुरवा तथा कोनी गांवों में पांच सौ के करीब परिवार फंसे हुए हैं। सैलाब का स्तर दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। इससे करीब 800 परिवारों की जान का खतरा बना हुआ है। कटान व बाढ़ पीड़ित प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं।
एक माह का समय बीत चुका है, बावजूद इसके बाढ़ की समस्या कम होती नजर नही आ रही है। शनिवार को भी शारदा व घाघरा बैराजों से करीब ढाई लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रेउसा क्षेत्र के दुर्गा पुरवा गांव के निकट चार दिन पूर्व घाघरा नदी ने प्रमुख सड़क को काटना शुरू कर दिया था। लगातार कटान के कारण अब तक करीब 400 मीटर सड़क का हिस्सा कटकर घाघरा नदी की धार में बह गया है।
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दुर्गा पुरवा गांव में घुटनों-घुटनों तक पानी भरा हुआ है। रास्ते जलमग्र हैं और घर के अंदर बाढ़ का पानी हिलोरें मार रहा है। यह ऐसा गांव है, जहां पर निर्मल पुरवा गांव के करीब 100 परिवार अपने अशियाने गंवाने के बाद डेरा डाले पड़े थे। इस गांव से कुछ दूरी पर कोनी गांव पड़ता है। यह गांव भी बाढ़ की चपेट में है।
प्रमुख सड़क कटकर बहने से दुर्गा पुरवा व कोनी गांव का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। इस क्षेत्र में 500 से अधिक परिवार बाढ़ की मुसीबत में फंसे हुए हैं। यहां पर बाढ़ के साथ कटान भी हो रहा है। पीड़ित परिवारों को भय है कि कहीं बाढ़ व कटान उन्हें बहाकर न ले जाए। यहां पर परिवारों के पास राशन खत्म हो चुका है, लोग भूखे हैं।
वहीं गांव के अधिकांश लोग बीमार भी पड़े हैं। फंसे हुए परिवारों के मुखियाओं का कहना है कि वे इस तेज धार से कैसे निकलें। कुछ ऐसे ही हालात घाघरा के बीच टापू पर बसे पचीसा गांव का है। एक सप्ताह के अंदर घाघरा नदी टापू का आधा हिस्सा निगल चुकी है। जो हिस्सा बचा है, उस पर भी नदी तेजी से कटान कर रही है।
शुक्रवार रात नदी ने राधे भार्गव, धर्मेंद्र, लेखपाल, कमला देवी आदि के घरों को निगल लिया। इस टापू पर करीब 300 परिवार फंसे हुए हैं। तेजी से हो रहे कटान के कारण टापू पर मौजूद सभी परिवारों पर जान का खतरा मंडराने लगा है। पूरे टापू पर दहशत का माहौल हैै। पूरे गांजर क्षेत्र में इन दिनों करीब 62 गांव बाढ़ की चपेट में हैं।
बाढ़ के पानी का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। 30 गांवों में लोग बुरी तरह से फंसे हुए हैैं। वे प्रशासन से मदद की बाट जोह रहे हैं। उधर, शारदा व घाघरा बैराजों से शनिवार को 248624 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
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घाघरा के बीच में मौजूद टापू का आधा हिस्सा कटकर बह गया है। ऐसे में बचे हिस्से के समाप्त होने का खतरा मड़रा रहा है। टापू पर करीब तीन सौ परिवार व दुर्गापुरवा तथा कोनी गांवों में पांच सौ के करीब परिवार फंसे हुए हैं। सैलाब का स्तर दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। इससे करीब 800 परिवारों की जान का खतरा बना हुआ है। कटान व बाढ़ पीड़ित प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं।
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एक माह का समय बीत चुका है, बावजूद इसके बाढ़ की समस्या कम होती नजर नही आ रही है। शनिवार को भी शारदा व घाघरा बैराजों से करीब ढाई लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रेउसा क्षेत्र के दुर्गा पुरवा गांव के निकट चार दिन पूर्व घाघरा नदी ने प्रमुख सड़क को काटना शुरू कर दिया था। लगातार कटान के कारण अब तक करीब 400 मीटर सड़क का हिस्सा कटकर घाघरा नदी की धार में बह गया है।
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दुर्गा पुरवा गांव में घुटनों-घुटनों तक पानी भरा हुआ है। रास्ते जलमग्र हैं और घर के अंदर बाढ़ का पानी हिलोरें मार रहा है। यह ऐसा गांव है, जहां पर निर्मल पुरवा गांव के करीब 100 परिवार अपने अशियाने गंवाने के बाद डेरा डाले पड़े थे। इस गांव से कुछ दूरी पर कोनी गांव पड़ता है। यह गांव भी बाढ़ की चपेट में है।
प्रमुख सड़क कटकर बहने से दुर्गा पुरवा व कोनी गांव का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। इस क्षेत्र में 500 से अधिक परिवार बाढ़ की मुसीबत में फंसे हुए हैं। यहां पर बाढ़ के साथ कटान भी हो रहा है। पीड़ित परिवारों को भय है कि कहीं बाढ़ व कटान उन्हें बहाकर न ले जाए। यहां पर परिवारों के पास राशन खत्म हो चुका है, लोग भूखे हैं।
वहीं गांव के अधिकांश लोग बीमार भी पड़े हैं। फंसे हुए परिवारों के मुखियाओं का कहना है कि वे इस तेज धार से कैसे निकलें। कुछ ऐसे ही हालात घाघरा के बीच टापू पर बसे पचीसा गांव का है। एक सप्ताह के अंदर घाघरा नदी टापू का आधा हिस्सा निगल चुकी है। जो हिस्सा बचा है, उस पर भी नदी तेजी से कटान कर रही है।
शुक्रवार रात नदी ने राधे भार्गव, धर्मेंद्र, लेखपाल, कमला देवी आदि के घरों को निगल लिया। इस टापू पर करीब 300 परिवार फंसे हुए हैं। तेजी से हो रहे कटान के कारण टापू पर मौजूद सभी परिवारों पर जान का खतरा मंडराने लगा है। पूरे टापू पर दहशत का माहौल हैै। पूरे गांजर क्षेत्र में इन दिनों करीब 62 गांव बाढ़ की चपेट में हैं।
बाढ़ के पानी का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। 30 गांवों में लोग बुरी तरह से फंसे हुए हैैं। वे प्रशासन से मदद की बाट जोह रहे हैं। उधर, शारदा व घाघरा बैराजों से शनिवार को 248624 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।