{"_id":"61abad9ddbaa9a1797288033","slug":"duggar-buses-running-on-the-roads-passengers-in-danger-sitapur-news-lko6074338163","type":"story","status":"publish","title_hn":"सड़कों पर दौड़ रही डग्गामार बसें, खतरे में मुसाफिर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सड़कों पर दौड़ रही डग्गामार बसें, खतरे में मुसाफिर
विज्ञापन
रोडवेज चौराहे के पास डग्गामार बस पर चढ़ते यात्री। - संवाद
- फोटो : SITAPUR
सीतापुर। यात्रीगण कृपया ध्यान दें... कहीं आप बस स्टॉप से नकली रोडवेज बस में सवार होकर सफर तो नहीं कर रहे हैं। यह सुनकर आपका चौंकना लाजिमी है। पर बस में सवार होने से पहले आप इसकी पड़ताल जरूर कर लें कि बस निगम की है या फिर उसकी शक्ल में दिख रही डग्गामार है ।
सीतापुर बस स्टॉप से लखीमपुर और लखनऊ के लिए रोडवेज की शक्ल में नजर आ रहीं कई डग्गामार बसें जिम्मेदारों की सरपरस्ती में फर्राटा भर रही हैं, लेकिन सब कुछ जानकर भी निगम, एआरटीओ और पुलिस खामोश है। हां, इतना जरूर है कि डग्गामार बसों के सस्ते सफर में आपकी जिंदगी खतरे में जरूर पड़ सकती है।
शनिवार दोपहर 1 बजकर 20 मिनट का वक्त था। अमर उजाला की टीम रोडवेज बस स्टॉप पर पहुंची। एक बस लखनऊ की ओर से आती है। यह बस हू-ब-हू निगम की बस की तरह दिख रही थी। बस चौराहा घूमकर लखीमपुर जाने के लिए कॉर्नर पर जाकर खड़ी हुई। बस के रुकते ही यात्री सवार हो लिए। इसके बाद बस मुसाफिरों को लेकर गंतव्य की ओर रवाना हो गई। आसपास के लोगों से जानकारी की गई तो बताया कि यह बस दिखने में तो रोडवेज जैसी है, लेकिन प्राइवेट डग्गामार बस है।
विज्ञापन
लोगों ने बताया कि रोजाना इस तरह की एक नहीं 15 से 20 बसें आती हैं। अवैध रूप से चल रहीं डग्गामार बसों की जानकारी निगम के जिम्मेदारों को है, लेकिन इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। ऐसे में परिवहन निगम, एआरटीओ की सरपरस्ती में दौड़ रहीं डग्गामार बसें यात्रियों के लिए परेशानी का सबब भी बन सकती है।
निगम की बसों की अपेक्षा सस्ता किराया होने की वजह से यात्री भी इस बस में बैठ जाते हैं, लेकिन सस्ते का सफर उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। अगर कहीं कोई दुर्घटना या हादसा हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। किसकी जवाबदेही होगी, यह बड़ा सवाल है। इस मामले में एआरटीओ प्रवर्तन डॉ. उदित नारायण पांडेय और एआरएम राकेश कुमार एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं।
इस रूट पर दौड़ती हैं डग्गामार बसें
सूत्रों की माने तो रोडवेज की शक्ल में नजर आने वाली डग्गामार बसें लखीमपुर से आती हैं। खीरी से चलने के बाद ओयल होते हुए हरगांव पहुंचती है। इसके बाद जिला मुख्यालय आती हैं। यहां पर यात्रियों को बिठाती हैं, फिर खैराबाद, कमलापुर, सिधौली, अटरिया होते हुए लखनऊ की सीमा में पहुंच जाती है। जानकारों की माने तो कैसरबाग बस स्टॉप के पहले ही बसें यात्रियों को उतार देती हैं। इसके बाद वहां से फिर से मुसाफिरों को लेकर उसी रूट से सीतापुर होते हुए लखीमपुर चली जाती हैं।
राजस्व को भी लग रहा चूना
रोडवेज के रंग में फर्राटा भर रहीं डग्गामार बसें परिवहन निगम को भी रोजाना लाखों का चूना लगा रही हैं। सूत्रों की माने तो इसकी जानकारी भी निगम के अफसरों को है, पर वह कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं। सब कुछ जानकर भी अंजान बनने पर कई तरह के सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
नकली-असली को पहचानना मुश्किल
लखीमपुर से सीतापुर और लखनऊ रूट पर दौड़ रही डग्गामार बसों का रंग और लुक बिल्कुल रोडवेज, डीलक्स बसों जैसा ही है। पहली बारगी देखने पर आसानी से इस बात को अंदाजा लगा पाना मुश्किल होगा कि यह निगम की बस नहीं है। जानकार ही समझ पाएंगे कि यह रोडवेज की बस नहीं हैं।
ऐसे पहचानें निगम की बस को
जानकारों की माने तो निगम की बसों में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम लिखा होता है। इसके अलावा परिवहन निगम का लोगो भी बना होता है, जबकि रोडवेज के कलर में चलने वाली बसें दिखती तो हू-ब-हू है, लेकिन परिवहन निगम और लोगो नहीं होता है।
रोडवेज पुलिस चौकी भी अंजान
बस स्टॉप से चंद कदम की दूरी पर रोडवेज पुलिस चौकी है। डग्गामार बसें दिन में कई बार यहां आती और जाती हैं, लेकिन इसके बाद भी चौकी पुलिस भी कोई कार्रवाई करने की जरूरत नहीं समझती। जबकि आदेश है कि परिवहन निगम के एक किमी. के दायरे में कोई भी अवैध रूप से बस में सवारी नहीं बिठाएगा।
पिछले महीने 24 बसों का हुआ था चालान
एआरटीओ प्रवर्तन डॉ. उदित नारायण पांडेय ने बताया कि पिछले माह ही सीतापुर से लखीमपुर रूट पर 15 और दिल्ली रूट की नौ बसों का चालान किया गया था। इन सभी पर जुर्माना किया गया था।
विज्ञापन
सीतापुर बस स्टॉप से लखीमपुर और लखनऊ के लिए रोडवेज की शक्ल में नजर आ रहीं कई डग्गामार बसें जिम्मेदारों की सरपरस्ती में फर्राटा भर रही हैं, लेकिन सब कुछ जानकर भी निगम, एआरटीओ और पुलिस खामोश है। हां, इतना जरूर है कि डग्गामार बसों के सस्ते सफर में आपकी जिंदगी खतरे में जरूर पड़ सकती है।
विज्ञापन
शनिवार दोपहर 1 बजकर 20 मिनट का वक्त था। अमर उजाला की टीम रोडवेज बस स्टॉप पर पहुंची। एक बस लखनऊ की ओर से आती है। यह बस हू-ब-हू निगम की बस की तरह दिख रही थी। बस चौराहा घूमकर लखीमपुर जाने के लिए कॉर्नर पर जाकर खड़ी हुई। बस के रुकते ही यात्री सवार हो लिए। इसके बाद बस मुसाफिरों को लेकर गंतव्य की ओर रवाना हो गई। आसपास के लोगों से जानकारी की गई तो बताया कि यह बस दिखने में तो रोडवेज जैसी है, लेकिन प्राइवेट डग्गामार बस है।
विज्ञापन
लोगों ने बताया कि रोजाना इस तरह की एक नहीं 15 से 20 बसें आती हैं। अवैध रूप से चल रहीं डग्गामार बसों की जानकारी निगम के जिम्मेदारों को है, लेकिन इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। ऐसे में परिवहन निगम, एआरटीओ की सरपरस्ती में दौड़ रहीं डग्गामार बसें यात्रियों के लिए परेशानी का सबब भी बन सकती है।
निगम की बसों की अपेक्षा सस्ता किराया होने की वजह से यात्री भी इस बस में बैठ जाते हैं, लेकिन सस्ते का सफर उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। अगर कहीं कोई दुर्घटना या हादसा हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। किसकी जवाबदेही होगी, यह बड़ा सवाल है। इस मामले में एआरटीओ प्रवर्तन डॉ. उदित नारायण पांडेय और एआरएम राकेश कुमार एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं।
इस रूट पर दौड़ती हैं डग्गामार बसें
सूत्रों की माने तो रोडवेज की शक्ल में नजर आने वाली डग्गामार बसें लखीमपुर से आती हैं। खीरी से चलने के बाद ओयल होते हुए हरगांव पहुंचती है। इसके बाद जिला मुख्यालय आती हैं। यहां पर यात्रियों को बिठाती हैं, फिर खैराबाद, कमलापुर, सिधौली, अटरिया होते हुए लखनऊ की सीमा में पहुंच जाती है। जानकारों की माने तो कैसरबाग बस स्टॉप के पहले ही बसें यात्रियों को उतार देती हैं। इसके बाद वहां से फिर से मुसाफिरों को लेकर उसी रूट से सीतापुर होते हुए लखीमपुर चली जाती हैं।
राजस्व को भी लग रहा चूना
रोडवेज के रंग में फर्राटा भर रहीं डग्गामार बसें परिवहन निगम को भी रोजाना लाखों का चूना लगा रही हैं। सूत्रों की माने तो इसकी जानकारी भी निगम के अफसरों को है, पर वह कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं। सब कुछ जानकर भी अंजान बनने पर कई तरह के सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
नकली-असली को पहचानना मुश्किल
लखीमपुर से सीतापुर और लखनऊ रूट पर दौड़ रही डग्गामार बसों का रंग और लुक बिल्कुल रोडवेज, डीलक्स बसों जैसा ही है। पहली बारगी देखने पर आसानी से इस बात को अंदाजा लगा पाना मुश्किल होगा कि यह निगम की बस नहीं है। जानकार ही समझ पाएंगे कि यह रोडवेज की बस नहीं हैं।
ऐसे पहचानें निगम की बस को
जानकारों की माने तो निगम की बसों में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम लिखा होता है। इसके अलावा परिवहन निगम का लोगो भी बना होता है, जबकि रोडवेज के कलर में चलने वाली बसें दिखती तो हू-ब-हू है, लेकिन परिवहन निगम और लोगो नहीं होता है।
रोडवेज पुलिस चौकी भी अंजान
बस स्टॉप से चंद कदम की दूरी पर रोडवेज पुलिस चौकी है। डग्गामार बसें दिन में कई बार यहां आती और जाती हैं, लेकिन इसके बाद भी चौकी पुलिस भी कोई कार्रवाई करने की जरूरत नहीं समझती। जबकि आदेश है कि परिवहन निगम के एक किमी. के दायरे में कोई भी अवैध रूप से बस में सवारी नहीं बिठाएगा।
पिछले महीने 24 बसों का हुआ था चालान
एआरटीओ प्रवर्तन डॉ. उदित नारायण पांडेय ने बताया कि पिछले माह ही सीतापुर से लखीमपुर रूट पर 15 और दिल्ली रूट की नौ बसों का चालान किया गया था। इन सभी पर जुर्माना किया गया था।