फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   Distributing soybean oil instead of native ghee

देशी घी की जगह बांट रहे सोयाबीन का तेल

Sun, 12 Sep 2021 11:53 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 12 Sep 2021 11:53 PM IST
विज्ञापन
Distributing soybean oil instead of native ghee
आंगनबाड़ी केंद्र पर वितरित किया जाता पोषाहार। (फाइल फोटो) -संवाद - फोटो : SITAPUR
सीतापुर। जिले के बच्चों की सेहत सुधारने के लिए सोयाबीन का तेल बांटा जा रहा है। कुपोषित, अति कुपोषित समेत जिले की आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों को देशी घी देने के आदेश है। पर यह आदेश बच्चों को बांटे जा रहे सोयाबीन के तेल में तैर रहा है। आदेश के बाद सिर्फ एक बार ही बच्चों को जिले में देशी घी बांटा गया। इसके बाद व्यवस्था ठप हो गई। अब बड़ा सवाल है कि क्या सोयाबीन के तेल से बच्चे तंदुरुस्त होंगे।
विज्ञापन

प्रदेश सरकार ने जिले के बच्चों की सेहत सुधारने के लिए अच्छी पहल की थी। पिछले साल दिवाली के पहले सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों को घी, दूध, दाल, चावल और गेहूं बांटने के आदेश दिए थे, लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी कि जिले में बाल पोषाहार विभाग ने पिछले साल महज अक्तूबर में ही एक बार बच्चों को घी बांटा था।
विज्ञापन

इसके बाद दोबारा सुध नहीं ली गई। इसके बाद देशी घी बांटने की व्यवस्था ठंडे बस्ते में चली गई और बच्चों की सेहत सुधारने के नाम पर विभाग ने सोयाबीन का तेल बांटना शुरू कर दिया। मौजूदा समय में बच्चों को सोयाबीन का ही तेल बांटा जा रहा है। अब ऐसे में सवाल उठने लाजिमी है कि देशी घी देने के नाम पर विभाग बच्चों को सोयाबीन का तेल क्यों बांट रहा है। क्या इससे बच्चों की सेहत सुधारी जा सकती है। आदेश के बाद भी घी देने की व्यवस्था क्यों धड़ाम हो गई। ऐसे कई सवाल हैं, जो उठ रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

घी में गड़बड़ी की आई थी शिकायत
जानकारों की माने तो शासन ने सात माह से लेकर तीन साल तक के बच्चों को पोषाहार के साथ देशी घी देने के निर्देश दिए थे। पिछले अक्टूबर में पराग से देशी घी की सप्लाई लेकर बच्चों को दिया गया था, लेकिन सूत्रों की माने तो इस घी में गड़बड़ी की भी शिकायतें आई थी। जानकारों के अनुसार, इसके बाद देशी घी बच्चों को नसीब नहीं हो सका।
अभी ये मिल रहा पोषाहार
पोषाहार वितरण की मौजूदा व्यवस्था के तहत ग्रामीण स्तर पर सात माह से तीन साल तक बच्चों को एक किलो गेहूूं, एक किला चावल, आधा किलो चने की दाल के साथ सोयाबीन तेल को पैकेट दिया जा रहा है। जबकि तीन से छह साल तक के बच्चों को मात्र आधा किलो चने की दाल दी जा रही है। जून माह को पोषाहार वितरण किया जा रहा है।
जानकारों की माने तो घी बांटने की व्यवस्था ठप होने के बाद एक बार सरसों का तेल भी बच्चों को दिया गया था। मौजूदा समय में दिए जा रहे पोषाहार में करीब आधा किलो सोयाबीन तेल का पैकेट है। देशी घी एक बार बंटने के बाद अब बंद होने से लोग पूछ रहे हैं कि एक बार ही क्यों बांटा गया।
शहर में दी जा रही दलिया
बाल विकास परियोजना शहर की प्रभारी सीडीपीओ रीता मिश्रा ने बताया कि सात माह से तीन साल के बच्चों को आधा किलो चने की दाल, एक किलो चावल, एक किला दलिया एवं 455 ग्राम रिफाइंड का पैकेट दिया जा रहा है।
गर्भवती और धात्री महिलाओं को एक किलो चने की दाल, एक किलो दलिया एवं एक पैकेट रिफाइंड तेल उपलब्ध कराया जा रहा है। तीन से छह साल तक के बच्चों को आधा किलो दलिया और आधा किलो चने की दाल दी जा रही है। मई माह तक वितरण हो गया है।
खराब घी के सैंपल की अब तक नहीं आई जांच
एक बार बांटे गए पराग के देशी घी में गड़बड़ी को लेकर आई शिकायत के बाद सैंपल लेकर जांच के लिए निदेशालय भेजा गया था। डीपीओ राजकपूर ने बताया कि देशी घी एक बार बांटा गया। पराग के घी में गड़बड़ी को लेकर शिकायत मिलने के बाद सैंपल जांच के लिए भेजा गया था, लेकिन अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं आई है। ऐसे में व्यवस्था बंद तो नहीं की जा सकती। इसलिए तेल बांटा जा रहा है।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों को पोषाहार दिए जाने के लिए समूह की महिलाओं को जो सामग्री उपलब्ध कराई जाती है, उसे वितरण के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिया जाता है। वर्तमान में सोयाबीन को तेल उपलब्ध कराया जा रहा है।
- अमरजीत सिंह, जिला मिशन प्रबंधक (एनआरएलएम)
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed