{"_id":"613e45ae8ebc3eb77923023f","slug":"distributing-soybean-oil-instead-of-native-ghee-sitapur-news-lko5952693195","type":"story","status":"publish","title_hn":"देशी घी की जगह बांट रहे सोयाबीन का तेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देशी घी की जगह बांट रहे सोयाबीन का तेल
विज्ञापन
आंगनबाड़ी केंद्र पर वितरित किया जाता पोषाहार। (फाइल फोटो) -संवाद
- फोटो : SITAPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीतापुर। जिले के बच्चों की सेहत सुधारने के लिए सोयाबीन का तेल बांटा जा रहा है। कुपोषित, अति कुपोषित समेत जिले की आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों को देशी घी देने के आदेश है। पर यह आदेश बच्चों को बांटे जा रहे सोयाबीन के तेल में तैर रहा है। आदेश के बाद सिर्फ एक बार ही बच्चों को जिले में देशी घी बांटा गया। इसके बाद व्यवस्था ठप हो गई। अब बड़ा सवाल है कि क्या सोयाबीन के तेल से बच्चे तंदुरुस्त होंगे।
प्रदेश सरकार ने जिले के बच्चों की सेहत सुधारने के लिए अच्छी पहल की थी। पिछले साल दिवाली के पहले सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों को घी, दूध, दाल, चावल और गेहूं बांटने के आदेश दिए थे, लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी कि जिले में बाल पोषाहार विभाग ने पिछले साल महज अक्तूबर में ही एक बार बच्चों को घी बांटा था।
इसके बाद दोबारा सुध नहीं ली गई। इसके बाद देशी घी बांटने की व्यवस्था ठंडे बस्ते में चली गई और बच्चों की सेहत सुधारने के नाम पर विभाग ने सोयाबीन का तेल बांटना शुरू कर दिया। मौजूदा समय में बच्चों को सोयाबीन का ही तेल बांटा जा रहा है। अब ऐसे में सवाल उठने लाजिमी है कि देशी घी देने के नाम पर विभाग बच्चों को सोयाबीन का तेल क्यों बांट रहा है। क्या इससे बच्चों की सेहत सुधारी जा सकती है। आदेश के बाद भी घी देने की व्यवस्था क्यों धड़ाम हो गई। ऐसे कई सवाल हैं, जो उठ रहे हैं।
विज्ञापन
घी में गड़बड़ी की आई थी शिकायत
जानकारों की माने तो शासन ने सात माह से लेकर तीन साल तक के बच्चों को पोषाहार के साथ देशी घी देने के निर्देश दिए थे। पिछले अक्टूबर में पराग से देशी घी की सप्लाई लेकर बच्चों को दिया गया था, लेकिन सूत्रों की माने तो इस घी में गड़बड़ी की भी शिकायतें आई थी। जानकारों के अनुसार, इसके बाद देशी घी बच्चों को नसीब नहीं हो सका।
अभी ये मिल रहा पोषाहार
पोषाहार वितरण की मौजूदा व्यवस्था के तहत ग्रामीण स्तर पर सात माह से तीन साल तक बच्चों को एक किलो गेहूूं, एक किला चावल, आधा किलो चने की दाल के साथ सोयाबीन तेल को पैकेट दिया जा रहा है। जबकि तीन से छह साल तक के बच्चों को मात्र आधा किलो चने की दाल दी जा रही है। जून माह को पोषाहार वितरण किया जा रहा है।
जानकारों की माने तो घी बांटने की व्यवस्था ठप होने के बाद एक बार सरसों का तेल भी बच्चों को दिया गया था। मौजूदा समय में दिए जा रहे पोषाहार में करीब आधा किलो सोयाबीन तेल का पैकेट है। देशी घी एक बार बंटने के बाद अब बंद होने से लोग पूछ रहे हैं कि एक बार ही क्यों बांटा गया।
शहर में दी जा रही दलिया
बाल विकास परियोजना शहर की प्रभारी सीडीपीओ रीता मिश्रा ने बताया कि सात माह से तीन साल के बच्चों को आधा किलो चने की दाल, एक किलो चावल, एक किला दलिया एवं 455 ग्राम रिफाइंड का पैकेट दिया जा रहा है।
गर्भवती और धात्री महिलाओं को एक किलो चने की दाल, एक किलो दलिया एवं एक पैकेट रिफाइंड तेल उपलब्ध कराया जा रहा है। तीन से छह साल तक के बच्चों को आधा किलो दलिया और आधा किलो चने की दाल दी जा रही है। मई माह तक वितरण हो गया है।
खराब घी के सैंपल की अब तक नहीं आई जांच
एक बार बांटे गए पराग के देशी घी में गड़बड़ी को लेकर आई शिकायत के बाद सैंपल लेकर जांच के लिए निदेशालय भेजा गया था। डीपीओ राजकपूर ने बताया कि देशी घी एक बार बांटा गया। पराग के घी में गड़बड़ी को लेकर शिकायत मिलने के बाद सैंपल जांच के लिए भेजा गया था, लेकिन अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं आई है। ऐसे में व्यवस्था बंद तो नहीं की जा सकती। इसलिए तेल बांटा जा रहा है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों को पोषाहार दिए जाने के लिए समूह की महिलाओं को जो सामग्री उपलब्ध कराई जाती है, उसे वितरण के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिया जाता है। वर्तमान में सोयाबीन को तेल उपलब्ध कराया जा रहा है।
- अमरजीत सिंह, जिला मिशन प्रबंधक (एनआरएलएम)
विज्ञापन
प्रदेश सरकार ने जिले के बच्चों की सेहत सुधारने के लिए अच्छी पहल की थी। पिछले साल दिवाली के पहले सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों को घी, दूध, दाल, चावल और गेहूं बांटने के आदेश दिए थे, लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी कि जिले में बाल पोषाहार विभाग ने पिछले साल महज अक्तूबर में ही एक बार बच्चों को घी बांटा था।
विज्ञापन
इसके बाद दोबारा सुध नहीं ली गई। इसके बाद देशी घी बांटने की व्यवस्था ठंडे बस्ते में चली गई और बच्चों की सेहत सुधारने के नाम पर विभाग ने सोयाबीन का तेल बांटना शुरू कर दिया। मौजूदा समय में बच्चों को सोयाबीन का ही तेल बांटा जा रहा है। अब ऐसे में सवाल उठने लाजिमी है कि देशी घी देने के नाम पर विभाग बच्चों को सोयाबीन का तेल क्यों बांट रहा है। क्या इससे बच्चों की सेहत सुधारी जा सकती है। आदेश के बाद भी घी देने की व्यवस्था क्यों धड़ाम हो गई। ऐसे कई सवाल हैं, जो उठ रहे हैं।
विज्ञापन
घी में गड़बड़ी की आई थी शिकायत
जानकारों की माने तो शासन ने सात माह से लेकर तीन साल तक के बच्चों को पोषाहार के साथ देशी घी देने के निर्देश दिए थे। पिछले अक्टूबर में पराग से देशी घी की सप्लाई लेकर बच्चों को दिया गया था, लेकिन सूत्रों की माने तो इस घी में गड़बड़ी की भी शिकायतें आई थी। जानकारों के अनुसार, इसके बाद देशी घी बच्चों को नसीब नहीं हो सका।
अभी ये मिल रहा पोषाहार
पोषाहार वितरण की मौजूदा व्यवस्था के तहत ग्रामीण स्तर पर सात माह से तीन साल तक बच्चों को एक किलो गेहूूं, एक किला चावल, आधा किलो चने की दाल के साथ सोयाबीन तेल को पैकेट दिया जा रहा है। जबकि तीन से छह साल तक के बच्चों को मात्र आधा किलो चने की दाल दी जा रही है। जून माह को पोषाहार वितरण किया जा रहा है।
जानकारों की माने तो घी बांटने की व्यवस्था ठप होने के बाद एक बार सरसों का तेल भी बच्चों को दिया गया था। मौजूदा समय में दिए जा रहे पोषाहार में करीब आधा किलो सोयाबीन तेल का पैकेट है। देशी घी एक बार बंटने के बाद अब बंद होने से लोग पूछ रहे हैं कि एक बार ही क्यों बांटा गया।
शहर में दी जा रही दलिया
बाल विकास परियोजना शहर की प्रभारी सीडीपीओ रीता मिश्रा ने बताया कि सात माह से तीन साल के बच्चों को आधा किलो चने की दाल, एक किलो चावल, एक किला दलिया एवं 455 ग्राम रिफाइंड का पैकेट दिया जा रहा है।
गर्भवती और धात्री महिलाओं को एक किलो चने की दाल, एक किलो दलिया एवं एक पैकेट रिफाइंड तेल उपलब्ध कराया जा रहा है। तीन से छह साल तक के बच्चों को आधा किलो दलिया और आधा किलो चने की दाल दी जा रही है। मई माह तक वितरण हो गया है।
खराब घी के सैंपल की अब तक नहीं आई जांच
एक बार बांटे गए पराग के देशी घी में गड़बड़ी को लेकर आई शिकायत के बाद सैंपल लेकर जांच के लिए निदेशालय भेजा गया था। डीपीओ राजकपूर ने बताया कि देशी घी एक बार बांटा गया। पराग के घी में गड़बड़ी को लेकर शिकायत मिलने के बाद सैंपल जांच के लिए भेजा गया था, लेकिन अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं आई है। ऐसे में व्यवस्था बंद तो नहीं की जा सकती। इसलिए तेल बांटा जा रहा है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों को पोषाहार दिए जाने के लिए समूह की महिलाओं को जो सामग्री उपलब्ध कराई जाती है, उसे वितरण के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिया जाता है। वर्तमान में सोयाबीन को तेल उपलब्ध कराया जा रहा है।
- अमरजीत सिंह, जिला मिशन प्रबंधक (एनआरएलएम)