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आज मां शैलपुत्री की आराधना कर आशीर्वाद मांगेंगे श्रद्धालु

Sat, 02 Apr 2022 12:06 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 02 Apr 2022 12:06 AM IST
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Devotees will seek blessings by worshiping Maa Shailputri today
सीतापुर। चैत्र नवरात्र शनिवार से प्रारंभ हो रहा है। पहले दिन श्रद्धालु मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद मांगेंगे। मंदिरों में शुक्रवार को साफ-सफाई सहित सजावट का काम जोरों से चलता रहा। चैत्र नवरात्र को लेकर बाजारों में कई दिनों से रौनक छाई हुई है। शुक्रवार को पूजन सामग्री की दुकानों पर श्रद्धालुओं की काफी अधिक भीड़ नजर आई। कोई माता की चुनर खरीद रहा था तो कोई कलश व अन्य पूजा सामग्री ले रहा था।
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वहीं मंदिरों में साफ-सफाई व सजावट का काम जोरों से चलता रहा। लोग घर में कलश स्थापित करने के लिए भी सामान खरीदने में जुटे रहे। इससे बाजार में काफी अधिक चहल-पहल रही। पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाएगी। श्रद्धालु माता रानी की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद मांगेंगे। मान्यता है माता शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। इसी कारण उनका नाम शैलपुत्री पड़ा। इस दिन उपवास करने के बाद माता के चरणों में गाय का घी अर्पित करने से आरोग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। उपवास करने वाला निरोगी रहता है।
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मछरेहटा कस्बे के माता भारासैनी मंदिर में नवरात्र की तैयारी करीब पूरी कर ली गई है। नवरात्र में यहां काफी दूर-दूर से लोग दर्शन-पूजन करने के लिए आते हैं। यह मछरेहटा क्षेत्र का सबसे प्राचीन मंदिर है। मंदिर के पुजारी राम किशोर शर्मा बताते हैं कि यह मंदिर मुगल शासनकाल का है। यहां भारत ही नहीं बल्कि पड़ोसी देश नेपाल से भी भक्त जन आते हैं।
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लहरपुर क्षेत्र के प्रसिद्ध सूर्यकुंड मंदिर पर चैत्र अमावस्या के पावन अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर स्थित पवित्र सरोवर में स्नान कर बाबा कामेश्वर नाथ का दर्शन कर पूजा-अर्चना की। हर माह अमावस्या के पावन अवसर पर यहां भारी संख्या में श्रद्धालु डुबकी लगाकर बाबा कामेश्वर नाथ के दर्शन पूजन करते हैं। शुक्रवार को यहां काफी अधिक भीड़ जमा रही।
नैमिषारण्य के प्रमुख मंदिर कालीपीठ में प्रतिष्ठित मां धूमावती के दर्शन का संयोग इस बार नवरात्र में दो बार मिलेगा। ललिता देवी मंदिर के प्रधान पुजारी व कालीपीठ संस्थापक जगदंबा प्रसाद ने बताया कि इस बार नवरात्र का पहला दिन ही शनिवार को पड़ रहा है जिससे पहले नवरात्र को ही माता के दर्शन का लाभ प्राप्त हो सकेगा। 9 अप्रैल को दूसरा शनिवार पड़ेगा। मां धूमावती के दर्शन का संयोग केवल नवरात्र के शनिवार के दिन ही पड़ता है।

कालीपीठाधीश गोपाल शास्त्री ने बताया कि उग्र देवी मां धूमावती का स्वरूप 10 महाविद्याओं में विधवा स्वरूप जैसा है। इनका वाहन कौआ है। मां श्वेत वस्त्र धारण किए हुए हैं। वहीं खुले केश मां का रूप और विकराल बनाते हैं। शास्त्रीजी ने बताया कि मां का स्वरूप भले ही कितना भयावह हो लेकिन वह उनके भक्तों के लिए हमेशा कल्याणकारी ही होता है।
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