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Sitapur News: मार्गशीर्ष अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने किया स्नान-दान
Sun, 01 Dec 2024 12:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 01 Dec 2024 12:01 AM IST
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नैमिषारण्य (सीतापुर)। मार्गशीर्ष अमावस्या पर शनिवार को धार्मिक नगरी में आस्था का सैलाब उमड़ा। चक्रतीर्थ व गोमती नदी के घाट पर श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। स्नान के बाद पुरोहितों को दान देकर पुण्य कमाया। इसके बाद मंदिरों में पहुंचकर देवी-देवताओं का दर्शन-पूजन किया। मार्गशीर्ष अमावस्या को अगहन अमावस्या या पितृ अमावस्या भी कहा जाता है। शनिवार को मार्गशीर्ष अमावस्या पड़ने पर इसका महत्व और बढ़ गया। श्रद्धालुओं ने शनिदेव का भी पूजन कर आशीर्वाद लिया। इस दिन पितृ के निमित्त दान करने का भी विशेष महत्व माना जाता है।
नैमिषारण्य धाम में पावन मार्गशीर्ष शनि अमावस्या के पुनीत अवसर पर चक्रतीर्थ व आदि गंगा गोमती के राजघाट, देवदेवेश्वर घाट, रुद्रावर्त धाम में भोर 4 बजे से ही स्नान व पूजन के लिए विभिन्न प्रदेशों से बड़ी संख्या श्रद्धालु पहुंचने लगे। श्रद्धालुओं ने गोमती नदी व चक्रतीर्थ में स्नान-पूजन के बाद परंपरा के अनुसार तीर्थ पुरोहितों को दान दिया। इसी क्रम में गाय व तुलसी का विधि विधान सहित पूजन किया।
श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की तृप्ती के लिए पिंडदान और शनि अमावस्या की वजह से शनि का दान भी किया। इस दौरान मां ललिता देवी के पावन चरणों में शीश नवाने के साथ व्यास गद्दी, हनुमान गढ़ी, कालीपीठ, सूत गद्दी, शौनक गद्दी, देवदेवेश्वर धाम, भूतेश्वर नाथ, बालाजी मंदिर आदि देव स्थानों में दर्शन पूजन का क्रम दिन भर चलता रहा। हांलाकि, दो दिन की अमावस्या होने की वजह से श्रद्धालुओं की भीड़ कम रही। रविवार को भी स्नान-दान व पूजन के लिए श्रद्धालु नैमिष पहुंचेंगे।
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नैमिषारण्य धाम में पावन मार्गशीर्ष शनि अमावस्या के पुनीत अवसर पर चक्रतीर्थ व आदि गंगा गोमती के राजघाट, देवदेवेश्वर घाट, रुद्रावर्त धाम में भोर 4 बजे से ही स्नान व पूजन के लिए विभिन्न प्रदेशों से बड़ी संख्या श्रद्धालु पहुंचने लगे। श्रद्धालुओं ने गोमती नदी व चक्रतीर्थ में स्नान-पूजन के बाद परंपरा के अनुसार तीर्थ पुरोहितों को दान दिया। इसी क्रम में गाय व तुलसी का विधि विधान सहित पूजन किया।
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श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की तृप्ती के लिए पिंडदान और शनि अमावस्या की वजह से शनि का दान भी किया। इस दौरान मां ललिता देवी के पावन चरणों में शीश नवाने के साथ व्यास गद्दी, हनुमान गढ़ी, कालीपीठ, सूत गद्दी, शौनक गद्दी, देवदेवेश्वर धाम, भूतेश्वर नाथ, बालाजी मंदिर आदि देव स्थानों में दर्शन पूजन का क्रम दिन भर चलता रहा। हांलाकि, दो दिन की अमावस्या होने की वजह से श्रद्धालुओं की भीड़ कम रही। रविवार को भी स्नान-दान व पूजन के लिए श्रद्धालु नैमिष पहुंचेंगे।
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