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मौनी अमावस्या पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
सीतापुर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 08 Feb 2016 11:25 PM IST
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बाद में श्रद्धालुओं ने मठ और मंदिरों में जाकर देवी-देवताओं के दर्शन किए और मन्नतें मांगीं। यूं तो मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान का बड़ा महत्व है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन मौन व्रत रखकर गंगा स्नान कर दानपुण्य करने से मनुष्य के सभी पाप समाप्त होते हैं।
यहां नैमिषारण्य को तीर्थों का प्रधान माना जाता है। क्योंकि यहां पर आदि गंगा गोमती व चक्रतीर्थ दोनों ही विद्यमान है। रविवार देर रात तक बस, टैक्सी के सहारे श्रद्धालु नैमिषारण्य पहुंचते रहे।
12 बजे के बाद ही मंदिरों के घंटे व घड़ियाल बजने लगे। श्रद्धालुओं ने मौन धारण कर गोमती व चक्रतीर्थ में डुबकी लगाई। स्नान करने के बाद पहला नाम प्रभु का लिया और जयकारे करते हुए, मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए आगे बढे़। इस दिन तकरीबन चार लाख से अधिक संख्या में श्रद्धालु नैमिषारण्य में डुबकी लगाई।
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श्राद्धालुओं ने स्नान ध्यान करने के बाद मां ललिता देवी, हनुमान गढ़ी, व्यास गद्दी, काली पीठ, देव देवेश्वर आदि मंदिरों में माथा टेका और पूजा अर्चना की। रविवार को शुरू हुआ श्रद्धालुओं का रेला सोमवार देर शाम तक जारी रहा।
रविवार को पहुंचे श्रद्धालुओं ने साधु संतों के आश्रम, धर्मशालाओं में डेरा जमाया था। जो रात्रि के 12 बजे के बाद से ही पूजा अर्चना में तल्लीन हो गए। इसके अलावा हरगांव, लहरपुर, एवं खैराबाद के भईया ताली तीर्थ पर भी श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई।
ट्रेन सेवा न मिलने से दिक्कत
नैमिषारण्य में ट्रेन सेवा लंबे समय से चली आ रही है। हालांकि यह सेवा दिन में दो बार ही श्रद्धालुओं को मिल पाती थी, लेकिन इस बार वह सेवा भी श्रद्धालुओं को नहीं मिल सकी। यही वजह रही कि सड़कों पर श्रद्धालुओं का रेला चलता रहा। ट्रेन सेवा न मिलने से श्रद्धालुओं को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
मौनी अमावस्या का महत्व
इस बार एक साथ मौनी और सोमवती अमावस्या का विशेष संयोग बन रहा है। शास्त्रों के अनुसार इस महासंयोग में दान, पुण्य का कई गुना अधिक फल मिलता। शास्त्रों के मुताबिक मौनी अमावस्या के दिन पवित्र संगम में देवताओं का निवास होता है। इस दिन त्रिवेणी स्थल पर स्नान से तन की शुद्धि, मौन रहने से मन की शुद्धि और दान देने से धन की शुद्धि और वृद्धि होती है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन गंगा में स्नान करने से शारीरिक , भौतिक, दैविक, ग्रहों गोचरों का दुर्योग तीनों प्रकार के मनुष्य के पाप दूर हो जाते हैं।
कुछ खास है
माघ मास की अमावस्या जिसे मौनी अमावस्या कहते हैं। यह योग पर आधारित महाव्रत है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र संगम में देवताओं का निवास होता है इसलिए इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस मास को भी कार्तिक के समान पुण्य मास कहा गया है। गंगा तट पर इस करण भक्त जन एक मास तक कुटी बनाकर गंगा का उपयोग करते हैं। हालांकि नैमिषारण्य में श्रद्धालु एक दिन पहले ही पहुंचते हैं।
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यहां नैमिषारण्य को तीर्थों का प्रधान माना जाता है। क्योंकि यहां पर आदि गंगा गोमती व चक्रतीर्थ दोनों ही विद्यमान है। रविवार देर रात तक बस, टैक्सी के सहारे श्रद्धालु नैमिषारण्य पहुंचते रहे।
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12 बजे के बाद ही मंदिरों के घंटे व घड़ियाल बजने लगे। श्रद्धालुओं ने मौन धारण कर गोमती व चक्रतीर्थ में डुबकी लगाई। स्नान करने के बाद पहला नाम प्रभु का लिया और जयकारे करते हुए, मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए आगे बढे़। इस दिन तकरीबन चार लाख से अधिक संख्या में श्रद्धालु नैमिषारण्य में डुबकी लगाई।
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श्राद्धालुओं ने स्नान ध्यान करने के बाद मां ललिता देवी, हनुमान गढ़ी, व्यास गद्दी, काली पीठ, देव देवेश्वर आदि मंदिरों में माथा टेका और पूजा अर्चना की। रविवार को शुरू हुआ श्रद्धालुओं का रेला सोमवार देर शाम तक जारी रहा।
रविवार को पहुंचे श्रद्धालुओं ने साधु संतों के आश्रम, धर्मशालाओं में डेरा जमाया था। जो रात्रि के 12 बजे के बाद से ही पूजा अर्चना में तल्लीन हो गए। इसके अलावा हरगांव, लहरपुर, एवं खैराबाद के भईया ताली तीर्थ पर भी श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई।
ट्रेन सेवा न मिलने से दिक्कत
नैमिषारण्य में ट्रेन सेवा लंबे समय से चली आ रही है। हालांकि यह सेवा दिन में दो बार ही श्रद्धालुओं को मिल पाती थी, लेकिन इस बार वह सेवा भी श्रद्धालुओं को नहीं मिल सकी। यही वजह रही कि सड़कों पर श्रद्धालुओं का रेला चलता रहा। ट्रेन सेवा न मिलने से श्रद्धालुओं को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
मौनी अमावस्या का महत्व
इस बार एक साथ मौनी और सोमवती अमावस्या का विशेष संयोग बन रहा है। शास्त्रों के अनुसार इस महासंयोग में दान, पुण्य का कई गुना अधिक फल मिलता। शास्त्रों के मुताबिक मौनी अमावस्या के दिन पवित्र संगम में देवताओं का निवास होता है। इस दिन त्रिवेणी स्थल पर स्नान से तन की शुद्धि, मौन रहने से मन की शुद्धि और दान देने से धन की शुद्धि और वृद्धि होती है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन गंगा में स्नान करने से शारीरिक , भौतिक, दैविक, ग्रहों गोचरों का दुर्योग तीनों प्रकार के मनुष्य के पाप दूर हो जाते हैं।
कुछ खास है
माघ मास की अमावस्या जिसे मौनी अमावस्या कहते हैं। यह योग पर आधारित महाव्रत है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र संगम में देवताओं का निवास होता है इसलिए इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस मास को भी कार्तिक के समान पुण्य मास कहा गया है। गंगा तट पर इस करण भक्त जन एक मास तक कुटी बनाकर गंगा का उपयोग करते हैं। हालांकि नैमिषारण्य में श्रद्धालु एक दिन पहले ही पहुंचते हैं।