{"_id":"56e856094f1c1b87108b4f8d","slug":"devgwan-reached-ramadal","type":"story","status":"publish","title_hn":"जयघोष के साथ देवगवां पहुंचा रामादल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जयघोष के साथ देवगवां पहुंचा रामादल
अमर उजाला ब्यूरो/ सीतापुर
Updated Wed, 16 Mar 2016 12:05 AM IST
विज्ञापन
यह किसी मेले का दृश्य नहीं बल्कि 84 कोसी परिक्रमा में शामिल परिक्रमार्थियों का जत्था है। सीतापुर के पिसवां क्षेत्र में देवगवां पड़ाव स्थल पर पंडाल बनाकर रहे रामादल लोगों के आकर्षण का बने हैं केंद्र।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऐतिहासिक 84 कोसी परिक्रमा करने निकले श्रद्धालु छठे दिन हरदोई जिले से सीतापुर जिले की सीमा में वापस प्रवेश कर गए। राम नाम का जयघोष कर रहे श्रद्धालुओं ने छठे दिन देवगवां पड़ाव पर डेरा डाला।
विज्ञापन
इस पड़ाव पर मंगलवार की भोर से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था। देवगवां पड़ाव पर करीब चार किलोमीटर की दूरी तक श्रद्धालुओं ने डेरा डाला है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि करीब चार लाख की संख्या में श्रद्धालु परिक्रमा कर रहे हैं।
विज्ञापन
नैमिषारण्य से चली परिक्रमा में शामिल श्रद्धालु देवगवां पहुंचने से पहले कोरौना, हरैया, नगवां कोथावां, गिरधरपुर उमरारी व साखिन गोपालपुर में डेरा डाल चुके हैं। 14 मार्च को परिक्रमा साखिन गोपालपुर पहुंची थी। वहां रात्रि विश्राम करने के बाद मंगलवार की भोर डंके की आवाज पर श्रद्धालुओं की नींद टूटी।
विज्ञापन
श्रद्धालुओं ने स्नान करने के बाद कंठेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की और देवगवां पड़ाव के लिए कूच कर गए। घंटे, घड़ियाल व शंखनाद की ध्वनि के बीच श्रद्धालु प्रभु श्रीराम का जयघोष कर रहे थे। साधु, संत व मंहतों की वेशभूषा परिक्रमा को और भी सुशोभित कर रही थी।
संत व महंत हाथी, घोड़ा व पालकी में सवार होकर पड़ाव स्थल पर पहुंच रहे थे। देवगवां पड़ाव स्थल पर पर्याप्त स्थान नहीं था, जिससे श्रद्धालुओं ने खेत, खलिहान व बागों में डेरा डाला। डेरा इस कदर पड़ते चले गए कि कई किलोमीटर की दूरी तक बस राम नगरी ही नजर आ रही थी।
श्रद्धालुओं ने स्नान करने के बाद देवगवां पर स्थित ब्रह्म स्थान व पौराणिक कूप का पूजन किया। किसी जमाने में यह देवताओं का गांव था। पड़ाव स्थल पर मौजूद साधु व संत लोगों को इस स्थान का महत्व बता रहे थे। देर शाम तक इस पड़ाव स्थल पर श्रद्धालुओं का आना जारी था।