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एक पंचायत सचिव के जिम्मे 10 पंचायतों का विकास
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सीतापुर। जिले में ग्राम पंचायत सचिवों का अकाल है। 1599 ग्राम पंचायतें महज 289 सचिवों के सहारे हैं। गांवों में विकास की अहम धुरी कहे जाने वाले ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारियों की कमी से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों को भी जरूरी काम के लिए भटकना पड़ रहा है। किसी सचिव के पास चार तो किसी के जिम्मे 10 ग्राम पंचायतें हैं।
जिले में 1599 ग्राम पंचायतें हैं। यहां ग्राम पंचायत अधिकारी के 219 पदों के सापेक्ष 147 की तैनाती है। 195 ग्राम विकास अधिकारी के सृजित पदों के सापेक्ष 142 की तैनाती है। एक तो ग्राम पंचायतों के सापेक्ष काफी कम पद सृजित हैं, इनमें से भी 125 पद रिक्त पड़े हैं। इससे सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि ग्राम पंचायतों में सरकारी कामकाज किस तरह से निपटाए जा रहे होंगे। ग्रामीणों की माने तो सचिव के दस्तखत और मुहर लगवाने के लिए भी कई दिनों तक भाग दौड़ करनी पड़ती है।
ब्लॉकों का बुरा हाल, ग्रामीण बेहाल
ब्लॉक बेहटा में 94 ग्राम पंचायतों की कमान 13 सचिवों के पास है। मौजूदा समय में किसी के पास सात तो किसी के पास 10 ग्राम पंचायतों का प्रभार है। ब्लॉक लहरपुर में 13 सचिवों के जिम्मे 72 ग्राम पंचायतों का चार्ज है। सबसे अधिक 10 ग्राम पंचायतों का भार राजेश कुमार के पास है। ब्लॉक मछरेहटा में 73 ग्राम पंचायतों का संचालन 10 सचिवों के सहारे हो रहा है।
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यहां सबसे अधिक दस पंचायतें प्रमोद कुमार के पास हैं। ब्लॉक महोली में 12 सचिवों के सहारे 75 ग्राम पंचायतें, ब्लॉक सकरन में 14 सचिवों के जिम्मे 85 ग्राम पंचायतें, ब्लॉक गोंदलामऊ में 14 सचिवों के सहारे 89 ग्राम पंचायतें और ब्लॉक पिसावां में 12 सचिव 98 ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भटक रहे परिजन
ब्लॉक सिधौली के बाड़ी निवासी मुन्ना ने बताया कि उनके भाई चुन्ना की मृत्यु लगभग दो माह पहले हो गई थी। मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना है। बाड़ी में सचिव की तैनाती नहीं है। एक माह से पद रिक्त पड़ा है। मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है। इसी गांव के हयात ने बताया कि मां जन्नतुन की मृत्यु के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र की आवश्यकता है, लेकिन प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है। इस ब्लॉक की 11 ग्राम पंचायतों में सचिव की नियुक्ति नहीं है। जरूरी कामकाज बाधित है। ग्रामीणों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
ब्लॉक के चक्कर लगाने को ग्रामीण विवश
ब्लॉक कसमंडा में 78 ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी 14 सचिवों पर है। किसी के पास चार तो किसी के पास आठ ग्राम पंचायतें हैं। ऐसे में आठ पंचायतों की जिम्मेदारी संभाल रहा सचिव सप्ताह में एक दिन भी एक ग्राम पंचायत को नहीं दे पा रहा है। इससे विकास कार्य प्रभावित हैं, मनरेगा मजदूरी का भुगतान समय से नहीं हो पा रहा है। नसीरपुर के उमा शंकर यादव बताते हैं कि परिवार रजिस्टर की नकल, विधवा, विकलांग व वृद्धा पेंशन के सत्यापन व अन्य कार्यों के लिए ग्रामीण ब्लॉक के चक्कर लगाने को विवश हैं।
शासन को भेजा गया पत्र
सचिवों के रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। अभी कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। शासन से जैसे निर्देश मिलेंगे उनके अनुरूप कार्य किया जाएगा।
- मनोज कुमार, डीपीआरओ
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जिले में 1599 ग्राम पंचायतें हैं। यहां ग्राम पंचायत अधिकारी के 219 पदों के सापेक्ष 147 की तैनाती है। 195 ग्राम विकास अधिकारी के सृजित पदों के सापेक्ष 142 की तैनाती है। एक तो ग्राम पंचायतों के सापेक्ष काफी कम पद सृजित हैं, इनमें से भी 125 पद रिक्त पड़े हैं। इससे सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि ग्राम पंचायतों में सरकारी कामकाज किस तरह से निपटाए जा रहे होंगे। ग्रामीणों की माने तो सचिव के दस्तखत और मुहर लगवाने के लिए भी कई दिनों तक भाग दौड़ करनी पड़ती है।
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ब्लॉकों का बुरा हाल, ग्रामीण बेहाल
ब्लॉक बेहटा में 94 ग्राम पंचायतों की कमान 13 सचिवों के पास है। मौजूदा समय में किसी के पास सात तो किसी के पास 10 ग्राम पंचायतों का प्रभार है। ब्लॉक लहरपुर में 13 सचिवों के जिम्मे 72 ग्राम पंचायतों का चार्ज है। सबसे अधिक 10 ग्राम पंचायतों का भार राजेश कुमार के पास है। ब्लॉक मछरेहटा में 73 ग्राम पंचायतों का संचालन 10 सचिवों के सहारे हो रहा है।
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यहां सबसे अधिक दस पंचायतें प्रमोद कुमार के पास हैं। ब्लॉक महोली में 12 सचिवों के सहारे 75 ग्राम पंचायतें, ब्लॉक सकरन में 14 सचिवों के जिम्मे 85 ग्राम पंचायतें, ब्लॉक गोंदलामऊ में 14 सचिवों के सहारे 89 ग्राम पंचायतें और ब्लॉक पिसावां में 12 सचिव 98 ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भटक रहे परिजन
ब्लॉक सिधौली के बाड़ी निवासी मुन्ना ने बताया कि उनके भाई चुन्ना की मृत्यु लगभग दो माह पहले हो गई थी। मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना है। बाड़ी में सचिव की तैनाती नहीं है। एक माह से पद रिक्त पड़ा है। मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है। इसी गांव के हयात ने बताया कि मां जन्नतुन की मृत्यु के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र की आवश्यकता है, लेकिन प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है। इस ब्लॉक की 11 ग्राम पंचायतों में सचिव की नियुक्ति नहीं है। जरूरी कामकाज बाधित है। ग्रामीणों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
ब्लॉक के चक्कर लगाने को ग्रामीण विवश
ब्लॉक कसमंडा में 78 ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी 14 सचिवों पर है। किसी के पास चार तो किसी के पास आठ ग्राम पंचायतें हैं। ऐसे में आठ पंचायतों की जिम्मेदारी संभाल रहा सचिव सप्ताह में एक दिन भी एक ग्राम पंचायत को नहीं दे पा रहा है। इससे विकास कार्य प्रभावित हैं, मनरेगा मजदूरी का भुगतान समय से नहीं हो पा रहा है। नसीरपुर के उमा शंकर यादव बताते हैं कि परिवार रजिस्टर की नकल, विधवा, विकलांग व वृद्धा पेंशन के सत्यापन व अन्य कार्यों के लिए ग्रामीण ब्लॉक के चक्कर लगाने को विवश हैं।
शासन को भेजा गया पत्र
सचिवों के रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। अभी कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। शासन से जैसे निर्देश मिलेंगे उनके अनुरूप कार्य किया जाएगा।
- मनोज कुमार, डीपीआरओ