{"_id":"57151a934f1c1b5a788b47ef","slug":"stf-constable-sent-to-prison","type":"story","status":"publish","title_hn":"एसटीएफ सिपाही को भेजा जेल","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
एसटीएफ सिपाही को भेजा जेल
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
Updated Mon, 18 Apr 2016 11:04 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुंगेर से असलहों की तस्करी के मामले में रविवार को पकड़े गए एसटीएफ के सिपाही व गन हाउस संचालक समेत तीनों आरोपियों को सोमवार को पुलिस ने केस दर्ज करके कोर्ट में पेश किया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया।
मालूम हो कि, लहरपुर क्षेत्र में रविवार को पुलिस, एसटीएफ व एटीएस की संयुक्त टीम ने कार सवार तीन लोगों को मुंगेर की आठ पिस्टल व 16 मैगजीन के साथ गिरफ्तार किया था। ये लोग मुंगेर से असलहे लाकर लखीमपुर में बेचते थे।
पकड़े गए लोगों में वीर विक्रम सिंह एसटीएफ की लखनऊ यूनिट में सिपाही है जबकि लखीमपुर खीरी के ओयल थाना क्षेत्र के शिवलाक निवासी मनीष रस्तोगी लखीमपुर बाजार में महावीर गन हाउस संचालित करता है। ये गन हाउस मनीष की चाची का है।
विज्ञापन
तीसरा आरोपी तिकुनिया थाना क्षेत्र के जस नगर निवासी इम्तियाज खेती-किसानी करता है। असलहों की तस्करी में एसटीएफ के सिपाही की गिरफ्तारी से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा है। लहरपुर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक रघुवीर सिंह ने बताया कि, मामले में वीर विक्रम सिंह, मनीष रस्तोगी व इम्तियाज के खिलाफ आर्म्स एक्ट व अन्य धाराओं में केस दर्ज करके सोमवार को कोर्ट में पेश किया गया। वहां से तीनों को जेल भेजा गया है।
पुलिस के हत्थे चढ़े गन हाउस संचालक मनीष रस्तोगी को पहले भी असलहों की तस्करी में गिरफ्तार किया जा चुका है। सूत्रों के मुताबिक पूर्व में एसटीएफ की जिस टीम ने मनीष रस्तोगी को गिरफ्तार किया था, सिपाही वीर विक्रम सिंह भी टीम में था।
उसी के बाद से सिपाही की मनीष से दोस्ती हो गई और जेल से छूटने के बाद मनीष उसके साथ असलहों का गोरखधंधा करने लगा। प्रभारी निरीक्षक रघुवीर सिंह का कहना है कि मनीष रस्तोगी जिस गन हाउस का संचालन करता है। वह गन हाउस भी अब जांच के दायरे में आ गया है। हो सकता है कि उस गन हाउस से कारतूसों की काला बाजारी का खेल भी चल रहा हो।
विज्ञापन
मालूम हो कि, लहरपुर क्षेत्र में रविवार को पुलिस, एसटीएफ व एटीएस की संयुक्त टीम ने कार सवार तीन लोगों को मुंगेर की आठ पिस्टल व 16 मैगजीन के साथ गिरफ्तार किया था। ये लोग मुंगेर से असलहे लाकर लखीमपुर में बेचते थे।
विज्ञापन
पकड़े गए लोगों में वीर विक्रम सिंह एसटीएफ की लखनऊ यूनिट में सिपाही है जबकि लखीमपुर खीरी के ओयल थाना क्षेत्र के शिवलाक निवासी मनीष रस्तोगी लखीमपुर बाजार में महावीर गन हाउस संचालित करता है। ये गन हाउस मनीष की चाची का है।
विज्ञापन
तीसरा आरोपी तिकुनिया थाना क्षेत्र के जस नगर निवासी इम्तियाज खेती-किसानी करता है। असलहों की तस्करी में एसटीएफ के सिपाही की गिरफ्तारी से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा है। लहरपुर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक रघुवीर सिंह ने बताया कि, मामले में वीर विक्रम सिंह, मनीष रस्तोगी व इम्तियाज के खिलाफ आर्म्स एक्ट व अन्य धाराओं में केस दर्ज करके सोमवार को कोर्ट में पेश किया गया। वहां से तीनों को जेल भेजा गया है।
पुलिस के हत्थे चढ़े गन हाउस संचालक मनीष रस्तोगी को पहले भी असलहों की तस्करी में गिरफ्तार किया जा चुका है। सूत्रों के मुताबिक पूर्व में एसटीएफ की जिस टीम ने मनीष रस्तोगी को गिरफ्तार किया था, सिपाही वीर विक्रम सिंह भी टीम में था।
उसी के बाद से सिपाही की मनीष से दोस्ती हो गई और जेल से छूटने के बाद मनीष उसके साथ असलहों का गोरखधंधा करने लगा। प्रभारी निरीक्षक रघुवीर सिंह का कहना है कि मनीष रस्तोगी जिस गन हाउस का संचालन करता है। वह गन हाउस भी अब जांच के दायरे में आ गया है। हो सकता है कि उस गन हाउस से कारतूसों की काला बाजारी का खेल भी चल रहा हो।