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अप्लीकेशन डाउनलोड कर फर्जी सिम से कमाते थे लाखों
Amarujala Bureau
Updated Thu, 20 Apr 2017 11:48 PM IST
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शहर में अवैध तरीके से टेलीफोन एक्सचेंज चलने का मामला अभी थमा नहीं था कि अब फर्जी तरीके से मोबाइल सिम बेचे जाने का मामला चर्चा में आया है। लखनऊ एटीएस व क्राइम ब्रांच ने बुधवार रात यहां छापा मारकर पांच युवकों को पकड़ा है। इनके पास से करीब 15,444 एक्टिवेटेड सिम बरामद होने से पुलिस टीम के होश उड़ गए हैं।
एटीएस ने हरदोई व सीतापुर जिले के कई लोगों के ठिकानों पर बुधवार रात छापेमारी की थी। इसी सिलसिले में सीतापुर से विकास जायसवाल व उसके चार अन्य साथियों को दबोचा गया। इनके कब्जे से 15,444 चालू हालत में सिम कार्ड बरामद हुए।
बताते हैं कि ये लोग हजारों सिम कार्ड अपने 30 से 40 मोबाइलों में बदल-बदल कर उपयोग करते थे। इन सिमों को मोबाइल में डालकर इंटरनेट के जरिए पैसा कमाने वाले अप्लीकेशन डाउनलोड करते थे। पुलिस सूत्र बताते हैं कि सिम की कीमत महज 10 रुपये होती थी। एक सिम से ये लोग अप्लीकेशन डाउन लोडकर 40 रुपये तक कमा लेते थे।
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इस लिहाज से ये लोग यदि 10 हजार सिमों का इस्तेमाल कर एक माह में अप्लीकेशन डाउनलोड कर दो लाख रुपये तक कमा लेते थे। इतना ही नहीं ये लोग सॉफ्टवेयर के जरिये अपने पुराने मोबाइलों का आईईएमआई नंबर बदल देते थे, ताकि पुराने मोबाइलों पर ही नए सिम डालकर ये लोग दोबारा रुपये कमा सकें।
इस काम में मुख्य आरोपी विकास जायसवाल ने अपने कई दोस्तों को भी लगा रखा था। यह अप्लीकेशन डाउनलोड कर उससे कमाए रुपये अपने निजी मोबाइल पर ले आते थे और इसके बाद मोबाइल कंपनियों के अफसरों की साठगांठ कर कैश में रुपये प्राप्त कर लेते थे। एटीएस व क्राइम ब्रांच अभी जांच में जुटी है। पुलिस इस गिरोह के अन्य लोगों का भी पता लगाने का प्रयास कर रही है।
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एटीएस ने हरदोई व सीतापुर जिले के कई लोगों के ठिकानों पर बुधवार रात छापेमारी की थी। इसी सिलसिले में सीतापुर से विकास जायसवाल व उसके चार अन्य साथियों को दबोचा गया। इनके कब्जे से 15,444 चालू हालत में सिम कार्ड बरामद हुए।
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बताते हैं कि ये लोग हजारों सिम कार्ड अपने 30 से 40 मोबाइलों में बदल-बदल कर उपयोग करते थे। इन सिमों को मोबाइल में डालकर इंटरनेट के जरिए पैसा कमाने वाले अप्लीकेशन डाउनलोड करते थे। पुलिस सूत्र बताते हैं कि सिम की कीमत महज 10 रुपये होती थी। एक सिम से ये लोग अप्लीकेशन डाउन लोडकर 40 रुपये तक कमा लेते थे।
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इस लिहाज से ये लोग यदि 10 हजार सिमों का इस्तेमाल कर एक माह में अप्लीकेशन डाउनलोड कर दो लाख रुपये तक कमा लेते थे। इतना ही नहीं ये लोग सॉफ्टवेयर के जरिये अपने पुराने मोबाइलों का आईईएमआई नंबर बदल देते थे, ताकि पुराने मोबाइलों पर ही नए सिम डालकर ये लोग दोबारा रुपये कमा सकें।
इस काम में मुख्य आरोपी विकास जायसवाल ने अपने कई दोस्तों को भी लगा रखा था। यह अप्लीकेशन डाउनलोड कर उससे कमाए रुपये अपने निजी मोबाइल पर ले आते थे और इसके बाद मोबाइल कंपनियों के अफसरों की साठगांठ कर कैश में रुपये प्राप्त कर लेते थे। एटीएस व क्राइम ब्रांच अभी जांच में जुटी है। पुलिस इस गिरोह के अन्य लोगों का भी पता लगाने का प्रयास कर रही है।