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डिस्पोजल ग्लास फैक्ट्री में लगी आग 

Tue, 30 Aug 2016 11:04 PM IST
Amarujala Bureau
Amarujala Bureau Updated Tue, 30 Aug 2016 11:04 PM IST
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Fire in Disposal glass factory
फैक्ट्री में लगी आग से उठ रहीं लपटें। - फोटो : अमर उजाला

सीतापुर शहर के आदर्श नगर सेक्टर एक स्थित डिस्पोजल ग्लास बनाने वाली बीडीएम इंडस्ट्रीज में मंगलवार भोर आग लग गई। लपटों में फैक्ट्री की मशीनें, पेपर कप, कच्चा माल समेत करीब 70 लाख रुपये का नुकसान हो गया।

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सूचना के करीब एक घंटे बाद पहुंची दमकल की चार गाड़ियों ने पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। बचाव कार्य के दौरान फैक्ट्री के आसपास पानी की व्यवस्था न होने से दमकल टीम को पानी के लिए भटकना पड़ा। उधर, फैक्ट्री मालिक आग लगने का कारण शार्ट सर्किट बता रहा है। 
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आर्यनगर निवासी कैलाश चंद्र महावर की शहर के रिहायशी इलाके आदर्श नगर के सेक्टर एक में बीडीएम इंडस्ट्रीज नाम से डिस्पोजल ग्लास बनाने की फैक्ट्री है। पिछले करीब डेढ़ साल से यह कारखाना एक कमरे नुमा भवन में चल रहा है। सोमवार रात की शिफ्ट में छह मजदूर काम कर रहे थे। इसी बीच भोर करीब 4 बजे फैक्ट्री में आग लग गई।
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आग से बचाव के इंतजाम न होने से पल भर में ही लपटें भड़क गई। आग पर काबू न होते देख मजदूर भी भाग खड़े हुए। प्लास्टिक की वजह से थोड़ी ही देर में पूरी फैक्ट्री लपटों में घिर गई। आग ने फैक्ट्री में लगी छह मशीनों व कच्चे माल को भी चपेट में ले लिया।

सूचना पाते ही जिला मुख्यालय, लहरपुर, सिधौली से दमकल की चार गाड़ियां मौके पर पहुंच गई। इस दौरान वहां बिजली आपूर्ति होने पर दमकल टीम ने पहले बिजली सप्लाई बंद कराई। जिसके बाद आग पर काबू पाने का प्रयास किया। फैक्ट्री व आसपास पानी का इंतजाम न होने से टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

कई बार तालाब व घटनास्थल से तीन किलोमीटर दूर फायर स्टेशन से टीम को पानी लेने जाना पड़ा। करीब पांच घंटे के बाद आग पर काबू पाया जा सका। फैक्ट्री मालिक कैलाश चंद्र महावर के मुताबिक बिजली मीटर के करीब शार्ट सर्किट से आग लग गई थी।

अग्निशमन यंत्र से आग पर काबू पाने का प्रयास किया गया लेकिन लपटें भड़क गईं। कैलाश चंद्र ने बताया कि आग की वजह से 20 लाख की छह मशीनें, तैयार व कच्चा माल समेत लगभग 70 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। भवन भी क्षतिग्रस्त हो गया।

जान बचा कर भागे कर्मचारी
फैक्ट्री में काम करने वाले कुछ मजदूरों ने बताया कि जैसे ही आग लगने की उन्हें जानकारी हुई, वैसे ही वह लोग फैक्ट्री में लगे फायर सिलेंडर को लेकर आग बुझाने पहुंचे, लेकिन वह लोग कुछ कर पाते, इससे पहले ही आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। इस पर कर्मचारी जान बचा कर भाग खड़े हुए। बताया कि उसवक्त विपिन, वीरेंद्र, महेश व सोहनलाल आदि कर्मचारी वहां काम कर रहे थे। यह लोग यदि जरा भी लापरवाही करते तो आग की जद में आ सकते थे। 

फैक्ट्री में नहीं थे आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम
रिहायशी इलाके के एक घर में चल रही डिस्पोजल ग्लास फैक्ट्री में आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। फैक्ट्री में आग से बचाव के नियमों की अनदेखी की गई। यहां पानी का टैंक तक नहीं बना था। वहां सिर्फ चार अग्निशमन यंत्र थे। वह भी जरूरत पड़ने पर बेकार साबित हो गए। आग बुझाने के लिए पानी का बंदोबस्त न होने से दमकल टीमों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

अवैध रूप से चल रही थी फैक्ट्री
फैक्ट्री लगाने से पहले दमकल विभाग के मानकों पर खरा उतरना होता है। विभाग जांच कर रिपोर्ट देता है, जिसके बाद ही फैक्ट्री लग सकती है, लेकिन आबादी के बीच चल रही इस फैक्ट्री के पास अग्निशमन विभाग की एनओसी नहीं थी। जानकारों की मानें तो किसी भी फैक्ट्री को लगाने के लिए कई मानक होते हैं।


अग्निशमन विभाग की ओर से भी बकायदा जांच होती है। जांच में फैक्ट्री परिसर में आग पर काबू पाने के बेहतर संसाधन होने जरूरी हैं। फैक्ट्री लगाने से पहले दमकल विभाग की इजाजत लेनी जरूरी होती है। अग्निशमन विभाग मानकों पर खरा होने के बाद ही फैक्ट्री चलाने की इजाजत देता है लेकिन यहां फैक्ट्री मालिकों ने दमकल विभाग से एनओसी नहीं ली। अलबत्ता फैक्ट्री भी रिहायशी इलाके में चल रही थी। ऐसे में बड़ा हादसा हो सकता था।

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