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एमएलसी के टिकट के लिए तेज हुई दावेदारों की दौड़

Mon, 14 Mar 2022 12:05 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 14 Mar 2022 12:05 AM IST
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Contenders race intensified for MLC ticket
सीतापुर। विधानसभा चुनाव की थकान अभी उतरी भी नहीं कि एमएलसी चुनाव का शंखनाद हो गया है। जिले में 15 मार्च से विधान परिषद सदस्य के लिए नामांकन पत्र डीएम कोर्ट में दाखिल किए जाएंगे। जिसके चलते भाजपा से चुनाव लड़ने की मंशा रखने वाले नेताओं में फिर से टिकट पाने की होड़ मच गई है। जिले के नेता एक बार फिर से राजधानी से लेकर दिल्ली के चक्कर लगाने लगे हैं।
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पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक अपनी बात पहुंचाने के लिए बड़े पदाधिकारियों की परिक्रमा भी शुरू कर दी है। इस बार पार्टी किस पर अपना दांव लगाती है, यह तो समय ही बताएगा। 15 मार्च से एमएलसी चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो रही है। यह प्रक्रिया 19 मार्च तक चलेगी। अभी तक किसी भी नेता ने इस चुनाव को लड़ने का खुलकर दावा नहीं किया है।
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विधानसभा चुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन कर भाजपा सत्ता संभालने की तैयारी कर रही है। ऐसे में वाजिब है कि विधानपरिषद चुनाव का परिणाम भी भाजपा के पक्ष में जा सकता है। जिसके चलते इस चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी नेताओं की पहली पसंद बन गई है। जिले के कुछ नेता खुद को इस दौड़ में सबसे आगे बताते हुए अपना टिकट पक्का बताने में जुटे हैं। कुछ नेता टिकट के लिए जुगाड़ लगाने के जुटे हैं।
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टिकट के लिए फिर लगेगी लंबी लाइन
विधानसभा चुनाव में भाजपा से टिकट की मांग करने वालों की संख्या सबसे अधिक थी, लेकिन बाद में भाजपा नेतृत्व ने उन्हें चुनाव लड़ने का मौका नहीं दिया था। एमएलसी चुनाव में अभी तक कितने लोगों ने आवेदन किया है, यह आंकड़ा साफ नहीं हो सका, लेकिन राजनीति के जानकारों की माने तो विधानसभा चुनाव लड़ने से वंचित रह गए सभी नेता इस बार एमएलसी चुनाव का टिकट मांगने वालों की लिस्ट में हो सकते हैं।
क्षत्रिय समाज के खाते में जा सकता टिकट
जानकारों की माने तो भाजपा ने जिले की नौ विधानसभा सीटों पर जातिगत समीकरण साधते हुए प्रत्याशी उतारे थे। विधानसभा चुनाव में कई क्षत्रिय नेताओं ने भी टिकट की मांग की थी। किन्हीं कारणों से पार्टी इन नेताओं को टिकट नहीं दिया था। एमएलसी चुनाव में क्षत्रिय मतदाताओं को खुश करने के लिए भाजपा यह टिकट उनके खाते में दे सकती है।
आनंद पहले ही जाहिर कर चुके थे मंशा
सीतापुुर से सपा के टिकट पर एमएलसी का चुनाव जीतने वाले आनंद भदौरिया ने चुनाव न लड़ने की घोषणा कर दी थी। उन्होंने यह घोषणा विधानसभा चुनाव के पहले की थी। विधानसभा चुनाव में दूसरे नंबर की पार्टी बनकर उभरी समाजवादी पार्टी विधान परिषद के चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारती है या नहीं यह तो भविष्य की बात है। राजनीतिक जानकारों की माने तो यह चुनाव सत्ता पक्ष का ही होता है। इसलिए अक्सर दूसरे दल उन्हीं सीटों पर अपना उम्मीदवार उतारते हैं, जहां उनकी जीत सुनिश्चित होती है।

कई क्षत्रिय नेता टिकट की दावेदारी में
इस चुनाव को लड़ने की इच्छा रखने वाले क्षत्रिय नेता पहले से ही इसकी तैयारी कर रहे थे। इसमें कई नेता ऐसे हैं जो विधानसभा चुनाव में भी पार्टी से टिकट की दावेदारी कर रहे थे। एक नेता दूसरी पार्टी को छोड़ कर काफी पहले ही भाजपा में शामिल हो गए थे। कई और क्षत्रिय समाज से इस टिकट के लिए मजबूत दावेदार हैं। इनकी नेताओं की दावेदारी कितना कामयाब होती है यह तो समय आने पर ही पता चल सकेगा।
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