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टाटपट्टी पर बैठकर बच्चे पढ़ाई करने को मजबूर

Mon, 06 Sep 2021 10:56 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 06 Sep 2021 10:56 PM IST
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Children forced to study by sitting on tatpatti
ऐलिया के प्राथमिक विद्यालय इमलिया सुल्तानपुर में जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते बच्चे। (संवाद) - फोटो : SITAPUR
सीतापुर। बेसिक शिक्षा विभाग की सुस्ती के चलते नौनिहालों को डेस्क व बेंच नहीं मिल पा रही है। इसकी वजह से वह जमीन पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। 14 करोड़ रुपये का बजट जारी हुए करीब छह माह हो गए है। लेकिन अभी तक फर्नीचर की खरीद नहीं हो सकी है। 964 विद्यालयों के लिए बेंच की जैम पोर्टल से खरीद होनी थी। अब विद्यालय खुल गए हैं और नौनिहाल टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
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परिषदीय विद्यालय के नौनिहाल को स्कूलों में बेहतर सुविधाएं देने के लिए कवायद शुरू की गई थी। कायाकल्प योजना के तहत इस समय स्कूलों की सूरत बदली जा रही है। इसी के तहत नौनिहाल को बैठने के लिए सुविधाएं देने के लिए जिले के 968 विद्यालयों में डेस्क बेंच खरीदने का निर्णय लिया गया था। यह खरीद जैम पोर्टल से होनी थी।
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इससे नौनिहाल स्कूली बैग बेंच पर ही रखकर आसानी से बैठकर पढ़ाई कर सकेंगे, लेकिन यह पूरी प्रक्रिया जिले में ठप सी हो गई है। छह माह से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन अभी तक इसकी खरीद नहीं हो पाई है। अभी तक स्कूल बंद चल रहे थे तो इसकी कमी नहीं खल रही थी। अब सितंबर से विद्यालय खुल गए है।
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विद्यालय में डेस्क बेंच नहीं है। नौनिहाल टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करते है। बरसात के समय अधिक दिक्कत होती है। कई बार छतों से पानी टपकने से कक्षा में पानी भर जाता है। इससे नौनिहालों को शिक्षा ग्रहण करने में दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है।
कोरोना भी कम नहीं है जिम्मेदार
बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि नए शैक्षिक सत्र अप्रैल माह की शुरुआत में फर्नीचर विद्यालयों में पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन उस समय कोरोना की दूसरी लहर आ गई। पंचायत चुनाव शुरू हो गए। यह लहर इतनी खतरनाक थी कि लोग जिन्दगी बचाने के लिए जद्दोजहद करते रहे। जून के बाद हालातों में कुछ सुधार हुआ। उसके बाद फिर से प्रक्रिया शुरू की गई। इसी वजह से खरीद में विलंब हुआ।

खरीद की प्रक्रिया चल रही है। पोर्टल से खरीद में कुछ दिक्कतें आ रही थी। वह अब दूर हो गई है। इससे उम्मीद है कि जल्द ही फर्नीचर विद्यालयों में पहुंच जाएगा।
- अजीत कुमार, बीएसए
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