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बिना साक्षात्कार के लौटे अभ्यर्थी
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सीतापुर। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में जिला व परियोजना दफ्तरों में राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए होने वाले साक्षात्कार में अधिक संख्या में अभ्यर्थियों के पहुंचने से उन्हें समस्याएं झेेलनी पड़ी। साक्षात्कार भी नहीं हो सका और बैरंग लौट गए। वीकेंड लॉकडाउन होने के कारण अभ्यर्थियों को और दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जलपान, भोजन के लिए भी भटकते रहे।
विकास भवन सभागार में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने शनिवार को राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत पूर्व में जिला एवं ब्लाक कोऑर्डिनेटर व प्रोजेक्ट असिस्टेंट पद पर ऑनलाइन किए गए आवेदनों से संबंधित अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया था। सीडीओ अक्षत वर्मा की अध्यक्षता में गठित पांच सदस्यीय समिति ने अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया। 42 पदों के सापेक्ष तीन गुना आवेदन प्राप्त किए गए थे।
सभी संबंधित अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। अभ्यर्थियों की संख्या अधिक होने के कारण ब्लॉक प्रोजेक्ट असिस्टेंट के अभ्यर्थियों का साक्षात्कार नहीं हो सका। इससे वह परेशान दिखे। विकास भवन के पास वह घंटों भटकते रहे। इसके बाद लौट गए। अभ्यर्थियों का कहना था कि पहले सूचना देकर बुला लिया। अब अगली तारीख में आने की बात कह रहे हैं।
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अगर यही करना था तो पहले बता देते। कम से कम इतनी गर्मी में भागदौड़ बच जाती। परेशान नहीं होना पड़ता। वीकेंड लॉकडाउन होने के कारण जलपान और भोजन के लिए भटकते रहे। आवागमन के लिए साधन भी सुलभ न होने से अभ्यर्थी परेशान रहे।
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विकास भवन सभागार में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने शनिवार को राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत पूर्व में जिला एवं ब्लाक कोऑर्डिनेटर व प्रोजेक्ट असिस्टेंट पद पर ऑनलाइन किए गए आवेदनों से संबंधित अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया था। सीडीओ अक्षत वर्मा की अध्यक्षता में गठित पांच सदस्यीय समिति ने अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया। 42 पदों के सापेक्ष तीन गुना आवेदन प्राप्त किए गए थे।
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सभी संबंधित अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। अभ्यर्थियों की संख्या अधिक होने के कारण ब्लॉक प्रोजेक्ट असिस्टेंट के अभ्यर्थियों का साक्षात्कार नहीं हो सका। इससे वह परेशान दिखे। विकास भवन के पास वह घंटों भटकते रहे। इसके बाद लौट गए। अभ्यर्थियों का कहना था कि पहले सूचना देकर बुला लिया। अब अगली तारीख में आने की बात कह रहे हैं।
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अगर यही करना था तो पहले बता देते। कम से कम इतनी गर्मी में भागदौड़ बच जाती। परेशान नहीं होना पड़ता। वीकेंड लॉकडाउन होने के कारण जलपान और भोजन के लिए भटकते रहे। आवागमन के लिए साधन भी सुलभ न होने से अभ्यर्थी परेशान रहे।