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होली पर संभलकर खरीदें सामान, हो सकती मिलावट
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सीतापुर। रंगों का पर्व होली नजदीक है। इस समय खाद्य पदार्थों की जमकर बिक्री हो रही है। ऐसे में बहुत सावधानी से खरीदारी करने की जरूरत है। मिलावटखोर अधिक कमाई के चक्कर में मिलावट कर देते हैं। यह मिलावट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। अभिहित अधिकारी अरविंद कुमार यादव का कहना है कि खरीदारी करते समय ब्रांडेड आइटम ही खरीदें। रंगीन मिठाई के बजाए सफेद रंग की मिठाई खरीदें। खानपान का जो भी सामान खरीदें, उस पर अंकित उत्पादन व एक्सपायरी तिथि जरूर देख लें। अगर कहीं पर मिलावट की आशंका दिखाई दे तो तत्काल खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को जानकारी दें।
लिवर व किडनी पर होता असर
जिला चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. जेएन सिंह का कहना है कि होली पर मिठाई व चिप्स पापड़ का क्रेज रहता है। ऐसे में हम सभी को बहुत ही संभलकर खरीदारी करने की जरूरत है। बाहरी खाद्य पदार्थों को खाने से बचे। अधिक से अधिक घर के बने हुए खाद्य पदार्थ ही उपयोग करें। मिलावटी मावे से बनी मिठाइयों के सेवन से शरीर का पाचन तंत्र प्रभावित होता है। इससे उल्टी दस्त पेट दर्द एवं गैस की समस्या पैदा होती है। लंबे समय तक ऐसे मिलावटी पदार्थ का उपयोग करने से लिवर और किडनी पर दुष्प्रभाव पड़ता है। इन बातों को ध्यान में रखकर होली पर्व मनाएं।
दूध में हो सकती है मिलावट
एफएसओ संजय त्रिपाठी का कहना है कि इस समय खोवा की डिमांड अधिक है। ऐसे में लोग दूध में मिलावट कर देते हैं। इसलिए दूध संभलकर खरीदें। अगर इसकी गुणवत्ता जांचना चाहते है तो एक बर्तन या परखनली में थोड़ा दूध लें और उसमें एक चम्मच सोयाबीन या अरहर का पाउडर मिलाएं। पांच मिनट तक इसे हिलाएं और इसके बाद लाल लिटमस पेपर पर घोल की कुछ बूंदें डालें। लिटमस पेपर का रंग लाल से नीला हो जाए तो दूध में मिलावट है।
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ऐसे कर सकते हैं जांच
एफएसओ पीके वर्मा का कहना है कि अधिकतर मिठाइयों को बनाने में खोवा का इस्तेमाल होता है। खोव में कुछ लोग विभिन्न तरह की मिलावट कर देते है। मिलावटी मावे की जांच करने के लिए मावे में पानी मिलाएं और इसे फेटें। फेटने से निकला मावा यदि ऐंठा हुआ और सख्त है तो साफ है कि इसमें वनस्पति घी इस्तेमाल किया गया है। यदि मावा ढीला पड़ जाता है तो इसमें रिफाइंड ऑयल की मिलावट होगी। अगर मावा फेटने के बाद भी चिकना और मक्खन जैसा मुलायम है तो यह शुद्ध होने का प्रतीक माना जाता है।
विभाग को दें जानकारी
होली पर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता परखने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। कहीं पर मिलावट की आशंका लगे तो तत्काल विभाग को जानकारी दे।
- संतोष कुमार श्रीवास्तव, मुख्य खाद्य सुरक्षाधिकारी
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लिवर व किडनी पर होता असर
जिला चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. जेएन सिंह का कहना है कि होली पर मिठाई व चिप्स पापड़ का क्रेज रहता है। ऐसे में हम सभी को बहुत ही संभलकर खरीदारी करने की जरूरत है। बाहरी खाद्य पदार्थों को खाने से बचे। अधिक से अधिक घर के बने हुए खाद्य पदार्थ ही उपयोग करें। मिलावटी मावे से बनी मिठाइयों के सेवन से शरीर का पाचन तंत्र प्रभावित होता है। इससे उल्टी दस्त पेट दर्द एवं गैस की समस्या पैदा होती है। लंबे समय तक ऐसे मिलावटी पदार्थ का उपयोग करने से लिवर और किडनी पर दुष्प्रभाव पड़ता है। इन बातों को ध्यान में रखकर होली पर्व मनाएं।
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दूध में हो सकती है मिलावट
एफएसओ संजय त्रिपाठी का कहना है कि इस समय खोवा की डिमांड अधिक है। ऐसे में लोग दूध में मिलावट कर देते हैं। इसलिए दूध संभलकर खरीदें। अगर इसकी गुणवत्ता जांचना चाहते है तो एक बर्तन या परखनली में थोड़ा दूध लें और उसमें एक चम्मच सोयाबीन या अरहर का पाउडर मिलाएं। पांच मिनट तक इसे हिलाएं और इसके बाद लाल लिटमस पेपर पर घोल की कुछ बूंदें डालें। लिटमस पेपर का रंग लाल से नीला हो जाए तो दूध में मिलावट है।
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ऐसे कर सकते हैं जांच
एफएसओ पीके वर्मा का कहना है कि अधिकतर मिठाइयों को बनाने में खोवा का इस्तेमाल होता है। खोव में कुछ लोग विभिन्न तरह की मिलावट कर देते है। मिलावटी मावे की जांच करने के लिए मावे में पानी मिलाएं और इसे फेटें। फेटने से निकला मावा यदि ऐंठा हुआ और सख्त है तो साफ है कि इसमें वनस्पति घी इस्तेमाल किया गया है। यदि मावा ढीला पड़ जाता है तो इसमें रिफाइंड ऑयल की मिलावट होगी। अगर मावा फेटने के बाद भी चिकना और मक्खन जैसा मुलायम है तो यह शुद्ध होने का प्रतीक माना जाता है।
विभाग को दें जानकारी
होली पर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता परखने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। कहीं पर मिलावट की आशंका लगे तो तत्काल विभाग को जानकारी दे।
- संतोष कुमार श्रीवास्तव, मुख्य खाद्य सुरक्षाधिकारी