{"_id":"58c435564f1c1b8322dc80f9","slug":"bjp-shines-after-21-years-in-sitapur","type":"story","status":"publish","title_hn":"21 साल बाद भाजपा की हुई धमाकेदार वापसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
21 साल बाद भाजपा की हुई धमाकेदार वापसी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 11 Mar 2017 11:05 PM IST
विज्ञापन
सीतापुर विधानसभा सीट का इतिहास
- फोटो : SELF
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विधान सभा चुनाव में यहां भाजपा का 21 साल लंबा वनवास खत्म हो गया। जिले में भाजपा ने धमाकेदार वापसी करते हुए सात सीटों पर कब्जा कर लिया है। सपा और बसपा को एक-एक सीट से ही संतोष करना पड़ा है।
विज्ञापन
आजादी के बाद पहली बार भाजपा यहां सबसे बड़ा दल बनकर उभरी है। भाजपा की अप्रत्याशित जीत को समर्थक महाविजय करार दे रहे हैं। मोदी लहर का जबरदस्त असर यहां भी देखने को मिला है।
विज्ञापन
जनसंघ के बाद वर्ष 1980 में भारतीय जनता पार्टी का उदय हुआ। पार्टी स्थापना काल यानी वर्ष 1980 में हुए विधान सभा चुनाव में भाजपा ने जिले में दो सीटों पर भगवा ध्वज फहराया था। यहां पर सीतापुर विधान सभा से भाजपा के राजेंद्र गुप्ता व सिधौली से भाजपा के रामलाल चुनाव जीते थे।
विज्ञापन
पंच वर्षीय कार्यकाल के बाद वर्ष 1985 में हुए चुनाव में भाजपा के राजेंद्र गुप्ता अपनी सीट बचा पाए थे। जबकि सिधौली के रामलाल चुनाव हार गए थे, फिर वर्ष 1989 में हुए मध्यावधि चुनाव में भाजपा ने जिले में अपनी ताकत में इजाफा करते हुए तीन सीटें हथियाई थीं।
लहरपुर विधान सभा से भाजपा की चंद्रकली वर्मा, सीतापुर से राजेंद्र गुप्ता व हरगांव से भाजपा के दौलतराम जीते थे। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद वर्ष 1991 में हुए चुनाव में भाजपा ने दो और सीटों में वृद्धि कर पांच सीटों पर परचम लहराया था।
जिले में बेहटा विधान सभा से भाजपा के किशोरी लाल, महमूदाबाद से नरेंद्र सिंह वर्मा, लहरपुर से अनिल वर्मा, हरगांव से मास्टर दौलतराम व सीतापुर से राजेंद्र गुप्ता जीते थे। तीन साल बाद यानी वर्ष 1993 में हुए मध्यावधि चुनाव में दो सीटें भाजपा से छिन गई थी। केवल तीन सीटें ही बचा पाई थीं, इनमें सीतापुर से राजेंद्र गुप्ता, हरगांव से दौलत राम व महमूदाबाद से नरेंद्र सिंह शामिल रहे।
वर्ष 1996 में हुए मध्यावधि चुनाव में भाजपा के पास सिर्फ एक सीट रह गई थी। बिसवां से भाजपा के अजीत मेहरोत्रा विधायक बने थे। दो दशक पहले उदय हुई सपा-बसपा ने पहले एक-एक संसदीय सीटें बांट ली।
बाद में इन दोनों दलों ने असेंबली सीटों का बंटवारा कर लिया। पिछले दो दशक से यहां की सीटों का सपा-बसपा में ही बंटवारा होता रहा है। वर्ष 2012 के असेंबली चुनाव में सपा की झोली में सीतापुर, महोली, महमूदाबाद, सेवता, सिधौली, मिश्रिख व बिसवां मिलाकर सात, जबकि बसपा के खाते में दो सीटें लहरपुर व हरगांव आई थीं।
भाजपा की बात करें तो 1996 में बिसवां से अजीत मेहरोत्रा विधायक निर्वाचित हुए थे। उसके बाद से असेंबली चुनाव में पार्टी खाता खोलने को तरस गई। इस बार 21 साल लंबा वनवास खत्म करते हुए भाजपा ने जिले की सियासत में धमाकेदार वापसी की है।
नौ में से सात सीटें झटककर भाजपा ने एक बार फिर जिले में भगवा परचम फहरा दिया है। आजादी के बाद पहली बार जिले की नौ विधानसभा सीटों में से सात सीटें भाजपा ने जीती हैं। उत्साहित भाजपाई इसे महाविजय करार दे रहे हैं।