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15 साल बाद अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हुई भाजपा

Sat, 03 Jul 2021 11:15 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 03 Jul 2021 11:15 PM IST
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BJP occupied the chair of the president after 15 years
सीतापुर। जिले की सर्वोच्च सदन की कुर्सी से लंबे समय से दूर रहने वाली भाजपा का वनवास अब 15 साल बाद खत्म पूरा हुआ है। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के इतिहास में ऐसा दूसरी बार हुआ है, जब इस कुर्सी पर दोबारा कमल खिला है। इससे पहले 2000 में भाजपा समर्थित प्रत्याशी इस कुर्सी पर काबिज हुआ था, लेकिन तब से और उससे पहले इस कुर्सी पर पिछली सरकारों गैर भाजपाई दलों का ही कब्जा रहा है।
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जिले की सियासत को करीब से देेखने और समझने वाले बताते हैं कि 2000 में जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव सपा के पूर्व विधायक और कद्दावर नेता रहे ओमप्रकाश गुप्ता ने लड़ा था, जबकि भाजपा ने महमूदाबाद निवासी महेंद्र सिंह वर्मा (मौजूदा समय में महमूदाबाद सपा विधायक नरेंद्र सिंह वर्मा) के भाई को जिला पंचायत अध्यक्ष प्रत्याशी घोषित किया था। जानकारों की माने तो जिस तरह से भाजपा मौजूदा समय में मजबूत है, तब भी जिले में बड़ी ही मजबूती के साथ सपा प्रत्याशी के बीच कांटे की टक्कर का चुनाव हुआ था।
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नतीजे सामने आने के बाद भाजपा समर्थित प्रत्याशी महेंद्र सिंह वर्मा जिले की सर्वोच्चन सदन की कुर्सी पर काबिज हुए। अगस्त 2000 से अक्तूबर 2005 तक उन्होंने इस कुर्सी पर अपना कार्यकाल पूरा किया। कार्यकाल खत्म होने के बाद अक्तूबर 2005 से जनवरी 2006 तक तत्कालीन डीएम रहे आमोद कुमार बतौर प्रशासक रहे।
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जनवरी 2006 में हुए चुनाव में मौजूदा समय में मिश्रिख विधायक रामकृष्ण भार्गव के बेटे अजय भार्गव जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हुए। जनवरी 2006 से जनवरी 2011 तक इनका कार्यकाल रहा। फिर ऊषा भारती, मधू गुप्ता, जितेंद्र यादव इस कुर्सी पर विराजमान रहे।
जानकार बताते हैं कि पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके इन सभी लोगों ने अलग-अलग पार्टियों से चुनाव लड़ा था। ऊषा भारती बसपा, मधू गुप्ता सपा से, अजय भार्गव और जितेंद्र यादव सपा से बगावत कर कुर्सी को हथियाया था। अब जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में दूसरी बार ऐसा हुआ है, जब भाजपा के खाते में ये सीट सीतापुर को मिली है।
पहले पिता, अब पुत्र के कार्यकाल में मिली अध्यक्षी
इस संयोग कहें या फिर सत्ता के समय का फेर। कुछ भी हो, लेकिन कहानी रोचक जरूर है। सियासी जानकार बताते हैं कि 2000 में जब जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव हुआ था, उस वक्त भाजपा के जिला अध्यक्ष प्रकाश नाथ मेहरोत्रा यानी की मौजूदा जिलाध्यक्ष के पिता थे। उस वक्त उनके जिलाध्यक्ष के कार्यकाल में जिला पंचायत अध्यक्ष के हुए चुनाव में भाजपा को जीत मिली थी। अब 2021 में जब भाजपा जिलाध्यक्ष अचिन मेहरोत्रा हैं तो उनके कार्यकाल में भी जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट भाजपा के खाते में गई है।

पहली बार इतने वोटों से मिली जीत
जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में पहली बार इतने वोटों से जीत मिलने की बात कही जा रही है। जिलाध्यक्ष अचिन मेहरोत्रा बताते हैं कि जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनावी इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब 34 वोटों से भाजपा प्रत्याशी को जीत मिली है। इतनी बड़ी संख्या से इससे पहले किसी को जीत नसीब नहीं हुई है।
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