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जेई के खिलाफ केस न दर्ज कराने पर बीडीओ निलंबित
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सीतापुर। ब्लॉक परसेंडी में तैनात रहे बीडीओ राजकुमार को शासन ने निलंबित कर दिया है। वर्तमान में वह बलिया जनपद में तैनात हैं। आरोप है, इन्होंने बीते साल ब्लॉक में कार्यरत एक निलंबित जेई के विरुद्ध शासन व सीडीओ के आदेश के बाद भी एफआईआर नहीं कराई थी। शासन द्वारा डीएम को भेजे गए गोपनीय पत्रों की प्रतियां जेई का उपलब्ध करा दी। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव ग्राम्य विकास मनोज कुमार सिंह ने आदेश जारी किया है।
विकासखंड परसेंडी में तैनाती के दौरान बीडीओ राजकुमार को सीडीओ ने बीते 31 दिसंबर को शासन के पत्र के तहत जेई आरईएस पुष्पेन्द्र वर्मा के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराकर उसकी सूचना भेजने के निर्देश दिए थे। इसका पालन नहीं किया गया। शासन द्वारा डीएम को भेजे गए गोपनीय पत्रों की प्रतियां जेई को उपलब्ध कराई गईं।
जेई ने हाईकोर्ट में दायर रिट याचिका में उन गोपनीय पत्रों का संदर्भ दिया। इस याचिका के क्रम में सीडीओ ने बीडीओ राजकुमार को प्रभावी पैरवी कराने के लिए इंस्ट्रक्शन दाखिल कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन उनकी ओर से याचिका में समयबद्ध रूप से हाईकोर्ट में इंस्ट्रक्शन दाखिल नहीं किया गया।
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इस प्रकार बीडीओ द्वारा शासकीय धन के दुरुपयोग के दोषी कर्मचारी से मिलकर शासन के गोपनीय दस्तावेजों को देेने का कदाचार एवं पदीय दायित्वों में लापरवाही व उदासीनता बरती गई। शासन एवं उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना की गई।
अपर मुख्य सचिव ग्राम्य विकास मनोज कुमार सिंह द्वारा जारी आदेश में यह उल्लेख करते हुए बीडीओ राजकुमार का तात्कालिक प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन के दौरान वह आयुक्त ग्राम्य विकास के दफ्तर से संबद्ध रहेंगे। इनके प्रकरण में संयुक्त विकास आयुक्त लखनऊ मंडल को जांच अधिकारी नामित किया गया है। उन्हें दो माह में शासन को जांच रिपोर्ट देनी है।
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विकासखंड परसेंडी में तैनाती के दौरान बीडीओ राजकुमार को सीडीओ ने बीते 31 दिसंबर को शासन के पत्र के तहत जेई आरईएस पुष्पेन्द्र वर्मा के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराकर उसकी सूचना भेजने के निर्देश दिए थे। इसका पालन नहीं किया गया। शासन द्वारा डीएम को भेजे गए गोपनीय पत्रों की प्रतियां जेई को उपलब्ध कराई गईं।
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जेई ने हाईकोर्ट में दायर रिट याचिका में उन गोपनीय पत्रों का संदर्भ दिया। इस याचिका के क्रम में सीडीओ ने बीडीओ राजकुमार को प्रभावी पैरवी कराने के लिए इंस्ट्रक्शन दाखिल कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन उनकी ओर से याचिका में समयबद्ध रूप से हाईकोर्ट में इंस्ट्रक्शन दाखिल नहीं किया गया।
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इस प्रकार बीडीओ द्वारा शासकीय धन के दुरुपयोग के दोषी कर्मचारी से मिलकर शासन के गोपनीय दस्तावेजों को देेने का कदाचार एवं पदीय दायित्वों में लापरवाही व उदासीनता बरती गई। शासन एवं उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना की गई।
अपर मुख्य सचिव ग्राम्य विकास मनोज कुमार सिंह द्वारा जारी आदेश में यह उल्लेख करते हुए बीडीओ राजकुमार का तात्कालिक प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन के दौरान वह आयुक्त ग्राम्य विकास के दफ्तर से संबद्ध रहेंगे। इनके प्रकरण में संयुक्त विकास आयुक्त लखनऊ मंडल को जांच अधिकारी नामित किया गया है। उन्हें दो माह में शासन को जांच रिपोर्ट देनी है।