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पांच हजार रुपये देकर चलाया काम
Amarujala Bureau
Updated Wed, 14 Dec 2016 11:18 PM IST
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जिला मुख्यालय की बैंकों में बुधवार को भी कैश किल्लत रही। बैंकों में इस कदर भीड़ उमड़ी कि, अधिकारियों ने कैश निकालने की सीमा मंगलवार की तरह 5 हजार रुपये ही रखी। लोग घंटों लाइन में लगने के बाद 5 हजार रुपये ही निकाल सके।
ग्रामीण क्षेत्रों का हाल ये रहा कि रामपुर मथुरा क्षेत्र की सभी बैंकों में बुधवार को कैश न आने की बात बताई जाती रही। कुछ ऐसा ही हाल लहरपुर, हरगांव, सलारपुर, महोली, मिश्रिख, मछरेहटा, परसदा, सकरन, तंबौर, रेउसा, बिसवां, महमूदाबाद, सिधौली आदि क्षेत्र की बैंकों में बुधवार को भी कैश की किल्लत रही।
ग्रामीण पहुुंचे जरूर, लेकिन उन्हें उनके ही खाते से रुपया नहीं दिया गया। जहां बैंक खाता धारकों को रुलाती रहीं, वही एटीएम भी शोपीस बने दिखे। जिले भर में मौजूद 102 एटीएम में से सिर्फ जिला मुख्यालय पर मौजूद एक्सिस बैंक का एक एटीएम ही चलता देखा गया।
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स्टेट बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक, एचडीएफसी, बैंक ऑफ बड़ौदा आदि बैंकों के एटीएम खामोश रहे। बैंकों में कैश की किल्लत व एटीएम न चलने की वजह आरबीआई से पर्याप्त कैश न आना बताया जा रहा है। बुधवार को बैंकों में करीब 21 करोड़ रुपये जमा हुए और 12 करोड़ रुपयों का भुगतान किया गया।
15 दिनों से नहीं आया कैश
कस्बा सकरन की इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक शाखा से जुड़े खाताधारक 15 दिनों से परेशान हैं। वे हर दिन सुबह होते ही बैंक पहुंच रहे हैं, लेकिन बैंक में कैश न आने की बात कह दी जाती है। बीते 15 दिनों से इस शाखा में रुपये न आने की बात कही जा रही।
अब तो खाता धारकों की उम्मीद टूटने लगी। इस क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए यह बैंक बहुत बड़ा सहारा है, लेकिन नोटबंदी के बाद यह बैंक शो पीस बनकर रहा गया है। खाताधारक सियाराम, नरेंद्र कुमार, पंकज, मोहित, श्याम बिहारी, जदुराई, अर्चना देवी, मोहिनी, चंपा आदि ने बताया कि हम लोग हर दिन बैंक आते हैं। 15 दिनों से मैनेजर कैश न होने का रोना रोकर लौटा देते हैं।
मांग 50 करोड़ की, मिल रहे चार करोड़
नोटबंदी के बाद जिले में कैश की जबरदस्त किल्लत है। बैंकों में नई करेंसी की जबरदस्त मांग है, लेकिन आरबीआई से मांग के अनुरूप कैश नहीं आ रहा है। अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बुधवार को आरबीआई से नई करेंसी आई है, लेकिन वह करेंसी बेहद कम है। इलाहाबाद बैंक की मांग 50 करोड़ रुपयों की है, जबकि बुधवार को महज 4 करोड़ रुपये ही आरबीआई से सीतापुर के करेंसी चेस्ट में पहुंच सके हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि मांग के अनुरूप करेंसी मिल जाए, तो सिस्टम को पटरी पर आते देर नहीं लगेगी।
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ग्रामीण क्षेत्रों का हाल ये रहा कि रामपुर मथुरा क्षेत्र की सभी बैंकों में बुधवार को कैश न आने की बात बताई जाती रही। कुछ ऐसा ही हाल लहरपुर, हरगांव, सलारपुर, महोली, मिश्रिख, मछरेहटा, परसदा, सकरन, तंबौर, रेउसा, बिसवां, महमूदाबाद, सिधौली आदि क्षेत्र की बैंकों में बुधवार को भी कैश की किल्लत रही।
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ग्रामीण पहुुंचे जरूर, लेकिन उन्हें उनके ही खाते से रुपया नहीं दिया गया। जहां बैंक खाता धारकों को रुलाती रहीं, वही एटीएम भी शोपीस बने दिखे। जिले भर में मौजूद 102 एटीएम में से सिर्फ जिला मुख्यालय पर मौजूद एक्सिस बैंक का एक एटीएम ही चलता देखा गया।
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स्टेट बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक, एचडीएफसी, बैंक ऑफ बड़ौदा आदि बैंकों के एटीएम खामोश रहे। बैंकों में कैश की किल्लत व एटीएम न चलने की वजह आरबीआई से पर्याप्त कैश न आना बताया जा रहा है। बुधवार को बैंकों में करीब 21 करोड़ रुपये जमा हुए और 12 करोड़ रुपयों का भुगतान किया गया।
15 दिनों से नहीं आया कैश
कस्बा सकरन की इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक शाखा से जुड़े खाताधारक 15 दिनों से परेशान हैं। वे हर दिन सुबह होते ही बैंक पहुंच रहे हैं, लेकिन बैंक में कैश न आने की बात कह दी जाती है। बीते 15 दिनों से इस शाखा में रुपये न आने की बात कही जा रही।
अब तो खाता धारकों की उम्मीद टूटने लगी। इस क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए यह बैंक बहुत बड़ा सहारा है, लेकिन नोटबंदी के बाद यह बैंक शो पीस बनकर रहा गया है। खाताधारक सियाराम, नरेंद्र कुमार, पंकज, मोहित, श्याम बिहारी, जदुराई, अर्चना देवी, मोहिनी, चंपा आदि ने बताया कि हम लोग हर दिन बैंक आते हैं। 15 दिनों से मैनेजर कैश न होने का रोना रोकर लौटा देते हैं।
मांग 50 करोड़ की, मिल रहे चार करोड़
नोटबंदी के बाद जिले में कैश की जबरदस्त किल्लत है। बैंकों में नई करेंसी की जबरदस्त मांग है, लेकिन आरबीआई से मांग के अनुरूप कैश नहीं आ रहा है। अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बुधवार को आरबीआई से नई करेंसी आई है, लेकिन वह करेंसी बेहद कम है। इलाहाबाद बैंक की मांग 50 करोड़ रुपयों की है, जबकि बुधवार को महज 4 करोड़ रुपये ही आरबीआई से सीतापुर के करेंसी चेस्ट में पहुंच सके हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि मांग के अनुरूप करेंसी मिल जाए, तो सिस्टम को पटरी पर आते देर नहीं लगेगी।