फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   Army

रूढ़ा गांव में सेना की चहलकदमी, जर्रे-जर्रे में हिलोरे मार रही देशभक्ति

Wed, 17 Mar 2021 11:28 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 17 Mar 2021 11:28 PM IST
विज्ञापन
Army
कमलापुर के रूढ़ा गांव में लगा सेना का टेंट। (संवाद) - फोटो : SITAPUR
कमलापुर (सीतापुर)। देश की खातिर अपने प्राण की आहुति देने वाले परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज पांडेय के गांव रुढ़ा में इन दिनों सेना के जवानों की चहलकदमी से लोगों में देश भक्ति का जज्बा हिलोरे मारने लगा है। कैप्टन की प्रतिमा के अनावरण से गांव के लोगों का सीना गर्व से चौड़ा हो रहा है। लोगों को अपने लाल की शहादत पर फक्र है। पूरा गांव खुशहाल है। सबकी जुबां पर कैप्टन मनोज पांडेय के ही बहादुरी के किस्से हैं।
विज्ञापन

19 मार्च को रूढ़ा गांव में परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज पांडेय की प्रतिमा का अनावरण होना है। इसके लिए थल सेनाध्यक्ष आ रहे हैं। इसी तैयारी को लेकर इंडियन आर्मी जुटी है। सेनाध्यक्ष के आगमन को लेकर गांव को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है। कुछ कार्य स्थानीय प्रशासन कर रहा है, जबकि कार्यक्रम आयोजन को लेकर की जा रही तैयारियों को सेना ने खुद बागडोर संभाल रखी है।
विज्ञापन

परमवीर चक्र जीतने के लिए सेना में गए थे कैप्टन मनोज पांडेय
कमलापुर इलाके के रूढ़ा की माटी में पले बढ़े कैप्टन मनोज पांडेय कारगिल युद्ध में दुश्मनों से लोहा होते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए थे। देश की आन-बान और शान पर जान कुर्बान करने वाले भारत मां के सपूत को मरणोपरांत सेना के सबसे बड़े सम्मान परमवीर चक्र से नवाजा गया था। जानकार बताते हैं कि भर्ती होने के समय उनसे पूछा गया था कि सेना में क्यों आना चाहते हो... उन्होंने जवाब दिया था कि वे परमवीर चक्र जीतना चाहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

वह सेना की गोरखा रेजीमेंट के हिस्सा बने। उनकी पहली तैनाती जम्मू कश्मीर में हुई थी। तैनाती के कुछ रोज बाद उन्हें सीमा पर आतंकी घुसपैठ रोकने लिए सीनियर अफसर के साथ सर्च ऑपरेशन में भेजा गया। घंटों की जंग में उन्होंने कई आतंकियों को मार गिराया। लेकिन इस जंग में एक सीनियर अधिकारी को उन्होंने अपनी आंखों के सामने शहीद होते देखा तो वे अंदर तक हिल गए। इसके कुछ ही दिनों बाद कैप्टन मनोज को सेंट्रल ग्लेशियर की 19 हजार 700 फिट ऊंची पहलवान चौकी पर तैनाती किया गया। साल 1999 में जब पाकिस्तान ने एक बार घुसपैठ की तो कैप्टन मनोज पांडेय को देश के लिए कुछ कर गुजरने का मौका मिला।
उन्हें खालूबार की पोस्ट को जीतने का मिशन दिया गया। खालूबार जाने के लिए उनके पास रात का वक्त था। वह रात में ही खालूबार की तरफ बढ़े। एक-एक कर उन्होंने पाकिस्तानी सेना के तीन बंकरों को नेस्तानाबूद कर दिया। उनका इरादा था पाक के एक ऐसे बंकर को खत्म करने का, जो बेहद खूंखार तरीके से गोलीबारी कर रहा था। वे पूरी तरह से घायल हो चुके थे, लेकिन फिर भी हाथ में हथगोले लेकर रेंगते हुए दुश्मन पर टूट पड़े।
उन्होंने आतंकियों का चौथा बंकर भी खत्म कर दिया था। दुश्मन सेना के कई जवानों को मौत के घाट उतार दिया। लेकिन ठीक इसी दौरान मशीन गन की कुछ गोलियां उनके सीने और सिर में आकर धंस गई। खून से लथपथ और घायल मनोज आखिरी सांस तक अपने साथियों को कवर देते रहे और आखिर में वीरगति को प्राप्त हुए। भारतीय सेना ने देश के इस वीर सपूत को परमवीर चक्र से सम्मानित किया।
गांव का हर व्यक्ति गौरवान्वित
परवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज पांडेय की वीरता और अदम्य साहस की बदौलत उनके गांव रूढ़ा का नाम इतिहास में दर्ज हो गया है। बड़े-बड़े अफसर और नेता गांव आ रहे हैं। अब तो गांव में थल सेना अध्यक्ष भी आ रहे हैं। जिनको कभी सोचा नहीं था, वह सब गांव की मिट्टी में जन्मे लाल को सलाम करने आ रहे हैं। गांव और क्षेत्र का हर व्यक्ति इस समय खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। मेरे बच्चे ने हमें हर जगह सम्मान दिलाया।
- कौशल किशोर पांडेय, कैप्टन मनोज पांडेय के चाचा
24 की उम्र में देश के लिए दिया बलिदान
ग्रामीण कृपा शंकर का कहना है कि सेनाध्यक्ष का आगमन सुनकर भावविभोर हूं। मेरे क्षेत्र के लाल की देन हैं कि गांव आकर सेना अध्यक्ष परमवीर चक्र विजेता मनोज पांडेय की जन्मस्थली पर बनी प्रतिमा का अनावरण करेंगे। राजधानी और जिले पर भी बने स्मारक देखकर गौरवशाली अनुभूति होती है। मनोज पांडेय की याद में उनके गोमती नगर लखनऊ स्थित चौराहे को कैप्टन मनोज पांडेय का नाम दिया गया।

उनकी विशाल प्रतिमा लगाई गई है। इस मूर्ति का अनावरण साल 2001 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने किया था। कैप्टन मनोज पांडेय से देश के लिए अपना सब कुछ बलिदान करने की प्रेरणा मिलती है। मात्र 24 साल की उम्र में देश के लिए अपनी जान लुटाने वाला यह जांबाज आज हर भारतीय के लिए एक मिसाल है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed