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पांच मरीज होने पर लगेगा एंटी रैबीज
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इमलिया सुल्तानपुर (सीतापुर)। सीएचसी एलिया में सुविधाएं कम, असुविधाएं अधिक हावी हैं। इसकी हकीकत शनिवार को देखने को मिली। कई मरीज एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए इंतजार ही करते रहे। एक साथ पांच मरीज न आने पर वह वापस लौट गए। अस्पताल परिसर में गंदगी दिखाई पड़ी। इस गंदगी के बीच लोग इलाज करवाने को मजबूर रहे।
सीएचसी एलिया की ओपीडी में रोजाना 150-200 मरीज आते हैं। लेकिन यहां पर सबसे अधिक दिक्कत गर्भवती को होती है। महिला चिकित्सक न होने से उनको इलाज मिलना मुश्किल होता है। पुरुष चिकित्सक ही उनका इलाज करते हैं। अमर उजाला टीम ने शनिवार को अस्पताल की रियलटी देखी तो दोपहर में एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने आए रामौतार निवासी निजामपुर को यह कहकर बैठाया गया था कि जब पांच मरीज हो जाएंगे, तभी इंजेक्शन लगा पाना संभव है। ऐसे में पांच मरीज नहीं आए तो रामौतार अपने घर को वापस चले गए।
दोपहर बीत जाने के बाद सीएचसी पर सन्नाटा पसरा दिखाई दिया। कई कक्ष आरबीएसके, डाटा इंट्री रूम, एचईओ कक्ष आदि में ताला लटक रहा था। डॉ. सुमित शुक्ला ओपीडी में मरीजों को देख रहे थे। सीएचसी पर किन स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन किया जा रहा है इसकी जानकारी के जिम्मेदार एचईओ विजय सिंह का कमरे में ताला लगा मिला।
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एक्स-रे टेक्नीशियन की तैनाती है। लेकिन एक्स-रे मशीन व अल्ट्रासाउंड मशीन न होने से मरीजों को बाहर से जांच करवानी पड़ रही है। अस्पताल परिसर में गंदगी नजर आई। प्रसव कक्ष की ओर वाले शौचालय में गंदगी थी। जबकि सीएचसी में दो सफाई कर्मी तैनात है। लेकिन उनका अटैचमेंट जिले पर कोविड सेंटर पर बना हुआ है।
प्रसव के बाद लाभार्थी के कागज जमा करने आई निर्मला देवी को डाटा इंट्री कक्ष में भी ताला लटकता मिला। बसेती से कोविड वैक्सीन लगवाने आए आबिद खां को सिर्फ एक पैरासिटामाल की टेबलेट दी गई। जबकि चार टेबलेट देने का निर्देश है। जिस पर फार्मासिस्ट धीरेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि पैरासिटामाल की कमी है।
महिला चिकित्सक की मांग की गई है। एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड मशीन के लिए उच्चाधिकारियों से बात की गई है। मरीजों को हर संभव सुविधा मिले। इसका ध्यान रखा जा रहा है। परिसर में गंदगी को साफ करवाया जा रहा है।
डॉ. मनीष गुप्ता, सीएचसी अधीक्षक एलिया
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सीएचसी एलिया की ओपीडी में रोजाना 150-200 मरीज आते हैं। लेकिन यहां पर सबसे अधिक दिक्कत गर्भवती को होती है। महिला चिकित्सक न होने से उनको इलाज मिलना मुश्किल होता है। पुरुष चिकित्सक ही उनका इलाज करते हैं। अमर उजाला टीम ने शनिवार को अस्पताल की रियलटी देखी तो दोपहर में एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने आए रामौतार निवासी निजामपुर को यह कहकर बैठाया गया था कि जब पांच मरीज हो जाएंगे, तभी इंजेक्शन लगा पाना संभव है। ऐसे में पांच मरीज नहीं आए तो रामौतार अपने घर को वापस चले गए।
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दोपहर बीत जाने के बाद सीएचसी पर सन्नाटा पसरा दिखाई दिया। कई कक्ष आरबीएसके, डाटा इंट्री रूम, एचईओ कक्ष आदि में ताला लटक रहा था। डॉ. सुमित शुक्ला ओपीडी में मरीजों को देख रहे थे। सीएचसी पर किन स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन किया जा रहा है इसकी जानकारी के जिम्मेदार एचईओ विजय सिंह का कमरे में ताला लगा मिला।
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एक्स-रे टेक्नीशियन की तैनाती है। लेकिन एक्स-रे मशीन व अल्ट्रासाउंड मशीन न होने से मरीजों को बाहर से जांच करवानी पड़ रही है। अस्पताल परिसर में गंदगी नजर आई। प्रसव कक्ष की ओर वाले शौचालय में गंदगी थी। जबकि सीएचसी में दो सफाई कर्मी तैनात है। लेकिन उनका अटैचमेंट जिले पर कोविड सेंटर पर बना हुआ है।
प्रसव के बाद लाभार्थी के कागज जमा करने आई निर्मला देवी को डाटा इंट्री कक्ष में भी ताला लटकता मिला। बसेती से कोविड वैक्सीन लगवाने आए आबिद खां को सिर्फ एक पैरासिटामाल की टेबलेट दी गई। जबकि चार टेबलेट देने का निर्देश है। जिस पर फार्मासिस्ट धीरेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि पैरासिटामाल की कमी है।
महिला चिकित्सक की मांग की गई है। एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड मशीन के लिए उच्चाधिकारियों से बात की गई है। मरीजों को हर संभव सुविधा मिले। इसका ध्यान रखा जा रहा है। परिसर में गंदगी को साफ करवाया जा रहा है।
डॉ. मनीष गुप्ता, सीएचसी अधीक्षक एलिया