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होटल में काम करते दो बच्चे पकड़े
Sitapur
Updated Fri, 10 Jan 2014 05:45 AM IST
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सीतापुर। बाल श्रम की शिकायत मिलने पर बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट ने श्रम विभाग के अधिकारियों के साथ एक कारखाने व दो होटलों पर छापा मारा। इस दौरान कारखाने में बिजली न होने से कोई बाल मजदूर नहीं मिला। हालांकि दो होेटलों से एक-एक बाल मजदूर पकड़े गए हैं। इन बच्चों को बाल सुधार गृह में भेजा गया है। वहीं एक होटल में न्यूनतम मजदूरी न मिलने का भी मामला संज्ञान में आया है।
जिलाधिकारी पंकज कुमार के निर्देश पर सिटी मजिस्ट्रेट सर्वेश कुमार दीक्षित ने श्रम प्रवर्तन निरीक्षक केके सिंह, आनंद कुमार के साथ सबसे पहले बड़ागांव मार्ग पर ‘ओम साईं दोना’ फैक्ट्री पर छापा मारा। यहां बाल मजदूरी कराए जाने की शिकायत मिली थी। हालांकि छापे के दौरान बिजली न होने से काम बंद था। इसके चलते कोई भी बाल मजदूर नहीं मिला। इसके बाद टीम ने हरदोई चुंगी के निकट स्थित महेश स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट में छापा मारा। यहां से टीम ने बाल मजदूरी कर रहे एक नेपाली बालक को पकड़ा। वह पिछले कई दिनों से यहां काम कर रहा था।
इसके बाद टीम ने शहर के आंख अस्पताल मार्ग पर स्थित कपूर कैफे में छापा मारा। टीम को सोंसरी निवासी एक बाल मजदूर काम करता मिला। सदस्यों ने यहां काम कर रहे 10 लोगों से मेहनताना पूछा तो पता चला कि छह मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी दो सौ रुपये से भी कम मिल रहे हैं। छापे के बाद टीम ने दोनों बाल श्रमिकों को बाल सुधार गृह में भेज दिया है। श्रम प्रवर्तन निरीक्षक केके सिंह ने बताया कि बच्चों का डॉक्टरी परीक्षण कराकर बाल मजदूरी करा रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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जिलाधिकारी पंकज कुमार के निर्देश पर सिटी मजिस्ट्रेट सर्वेश कुमार दीक्षित ने श्रम प्रवर्तन निरीक्षक केके सिंह, आनंद कुमार के साथ सबसे पहले बड़ागांव मार्ग पर ‘ओम साईं दोना’ फैक्ट्री पर छापा मारा। यहां बाल मजदूरी कराए जाने की शिकायत मिली थी। हालांकि छापे के दौरान बिजली न होने से काम बंद था। इसके चलते कोई भी बाल मजदूर नहीं मिला। इसके बाद टीम ने हरदोई चुंगी के निकट स्थित महेश स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट में छापा मारा। यहां से टीम ने बाल मजदूरी कर रहे एक नेपाली बालक को पकड़ा। वह पिछले कई दिनों से यहां काम कर रहा था।
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इसके बाद टीम ने शहर के आंख अस्पताल मार्ग पर स्थित कपूर कैफे में छापा मारा। टीम को सोंसरी निवासी एक बाल मजदूर काम करता मिला। सदस्यों ने यहां काम कर रहे 10 लोगों से मेहनताना पूछा तो पता चला कि छह मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी दो सौ रुपये से भी कम मिल रहे हैं। छापे के बाद टीम ने दोनों बाल श्रमिकों को बाल सुधार गृह में भेज दिया है। श्रम प्रवर्तन निरीक्षक केके सिंह ने बताया कि बच्चों का डॉक्टरी परीक्षण कराकर बाल मजदूरी करा रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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