{"_id":"128-50561","slug":"Sitapur-50561-128","type":"story","status":"publish","title_hn":"खेल न खेल के मैदान, संसाधनों का भी टोटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खेल न खेल के मैदान, संसाधनों का भी टोटा
Sitapur
Updated Tue, 15 Jan 2013 05:30 AM IST
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सीतापुर। स्कूलों की पाठ्य सहगामी क्रियाओं में शामिल खेल अव स्कूलों से ही दूर होता जा रहा है। जिले के अधिसंख्य स्कूलों के पास न तो खेल के मैदान नहीं है और न ही गेम्स टीचर। जिन स्कूलों में ये दोनों सुविधाएं हैं, वहां पर खेल के संसाधन मयस्सर नहीं हैं। नतीजतन माध्यमिक स्कूलों में होने वाली खेल गतिविधियां तकरीबन ठप सी हो गईं हैं। कदाचित यही वजह है कि जिले क ई स्कूलों के मैदान अब रैली स्थल या साप्ताहिक बाजार स्थल के रूप में ही तब्दील हो गए हैं।
शहर के राजा रघुबर दयाल इंटर कालेज के मैदान पर कभी स्कूली छात्र न सिर्फ खेलों की बारीकियां सीखते थे, बल्कि अपने हुनर का प्रदर्शन भी करते हैं। इस ग्राउंड पर अंतर्जनपदीय टूर्नामेंटों के आयोजन भी होते थे पर अब नहीं होते। यह मैदान राजनीतिक दलों का अखाड़ा बन गया है। यहां आए दिन विभिन्न विभिन्न राजनीतिक दलों की रैलियां और जनसभाएं होती रहती हैं। मैदान पर नुमाइश तो लगती ही है। इसी मैदान पर सप्ताह में दो दिन लाई-चूरा की मंडियां लगती हैं। उजागर लाल इंटर कालेज सरायन नदी के किनारे बना है। इसका मैदान केवल बुजुर्गों ने ही देखा है। युवाओं को पता तक नहीं कि इस विद्यालय का कोई खेल मैदान भी था। इसकी जानकारी न होने की भी एक वजह है। कारण यह है कि इस विद्यालय का खेल मैदान पिछले हिस्से में है। तकरीबन हर वर्ष आने वाली बाढ़ विभीषिका में यह ग्राउंड इसकी चपेट में रहता है। ऐसे में इस खेल के मैदान का वजूद पूरी तरह से खत्म हो चुका है।
जिले में अधिसंख्य सरकारी और एडेड स्कूलों के खेल मैदानों की भी यही तस्वीर है। यहां के 70 में से सिर्फ 25 विद्यालयों के पास खेल अध्यापक हैं। शेष स्कूल गेम्स टीचर विहीन हैं। विद्यालयों में शासन से खेल शुल्क महज पैसों में निर्धारित होने से इन स्कूलों में खेल संसाधन तक मुहैया नहीं होते हैं। ऐसे में स्कूूूूलों में खेल गतिविधियां एकदम शून्य है। मौजूदा वक्त में माध्यमिक विभाग में खेल की औपचारिकताएं निभाई जा रही है। खेल के नाम पर जिले में सिर्फ एक जनपदीय क्रीड़ा रैली होती है। इसके अलावा माध्यमिक में खेल गतिविधियां संचालित नहीं हैं। माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डा. सुरेश तिवारी बताते हैं कि शासन से खेल शुल्क इतना कम निर्धारित है जिसमें खेल का सामान नहीं खरीदा जा सकता है। उनका कहना है कि खेल के नाम पर छात्रों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता है, इसलिए खेल गतिविधियां कम ही होती हैं।
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जिले में दो सरकारी स्टेडियम
सीतापुर। खेल को बढ़ावा देने के लिए जिले में दो सरकारी स्टेडियम हैं। एक स्टेडियम सीतापुर शहर में तो दूसरा महमूदाबाद तहसील में है। दोनों स्टेडियमों में क्रीड़ा विभाग न सिर्फ विभिन्न खेल गतिविधियों का संचालन करता है। जिला क्रीड़ाधिकारी की माने तो इन स्टेडियमों में इनडोर और आउटडोर खेलों के आयोजन तो होते हैं साथ ही वहां पर स्वीमिंग पूल का भी संचालन किया जाता है। ताकि लोग तैराकी करना सीख सकें। क्रिकेट के शौकीन खेल प्रेमियों के लिए क्रिकेट पिच भी बनवाई गई है।
‘माध्यमिक विद्यालयों में खेलकूद के मैदानों को दुरुस्त कराने के निर्देश दिये गये हैं। गेम शिक्षकों की भारी कमी है। इसके लिये शासन को पत्र लिखा जा चुका है।
डॉ. सच्चिदानंद यादव, डीआईओएस’
‘प्रत्येक विद्यालय में खेल का मैदान जरूरी है। पर दुर्भाग्य यह है कि जिले में अधिसंख्य स्कूलों के पास खेल के मैदान नहीं हैं। बगैर खेल मैदान के विद्यालयों को मान्यता नहीं देनी चाहिए। खेल के मैदान छात्रों के शारीरिक एवं मानसिक विकास में सहायक होते हैं।
नीरज मिश्र, जिला क्रीड़ाधिकारी’
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शहर के राजा रघुबर दयाल इंटर कालेज के मैदान पर कभी स्कूली छात्र न सिर्फ खेलों की बारीकियां सीखते थे, बल्कि अपने हुनर का प्रदर्शन भी करते हैं। इस ग्राउंड पर अंतर्जनपदीय टूर्नामेंटों के आयोजन भी होते थे पर अब नहीं होते। यह मैदान राजनीतिक दलों का अखाड़ा बन गया है। यहां आए दिन विभिन्न विभिन्न राजनीतिक दलों की रैलियां और जनसभाएं होती रहती हैं। मैदान पर नुमाइश तो लगती ही है। इसी मैदान पर सप्ताह में दो दिन लाई-चूरा की मंडियां लगती हैं। उजागर लाल इंटर कालेज सरायन नदी के किनारे बना है। इसका मैदान केवल बुजुर्गों ने ही देखा है। युवाओं को पता तक नहीं कि इस विद्यालय का कोई खेल मैदान भी था। इसकी जानकारी न होने की भी एक वजह है। कारण यह है कि इस विद्यालय का खेल मैदान पिछले हिस्से में है। तकरीबन हर वर्ष आने वाली बाढ़ विभीषिका में यह ग्राउंड इसकी चपेट में रहता है। ऐसे में इस खेल के मैदान का वजूद पूरी तरह से खत्म हो चुका है।
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जिले में अधिसंख्य सरकारी और एडेड स्कूलों के खेल मैदानों की भी यही तस्वीर है। यहां के 70 में से सिर्फ 25 विद्यालयों के पास खेल अध्यापक हैं। शेष स्कूल गेम्स टीचर विहीन हैं। विद्यालयों में शासन से खेल शुल्क महज पैसों में निर्धारित होने से इन स्कूलों में खेल संसाधन तक मुहैया नहीं होते हैं। ऐसे में स्कूूूूलों में खेल गतिविधियां एकदम शून्य है। मौजूदा वक्त में माध्यमिक विभाग में खेल की औपचारिकताएं निभाई जा रही है। खेल के नाम पर जिले में सिर्फ एक जनपदीय क्रीड़ा रैली होती है। इसके अलावा माध्यमिक में खेल गतिविधियां संचालित नहीं हैं। माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डा. सुरेश तिवारी बताते हैं कि शासन से खेल शुल्क इतना कम निर्धारित है जिसमें खेल का सामान नहीं खरीदा जा सकता है। उनका कहना है कि खेल के नाम पर छात्रों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता है, इसलिए खेल गतिविधियां कम ही होती हैं।
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जिले में दो सरकारी स्टेडियम
सीतापुर। खेल को बढ़ावा देने के लिए जिले में दो सरकारी स्टेडियम हैं। एक स्टेडियम सीतापुर शहर में तो दूसरा महमूदाबाद तहसील में है। दोनों स्टेडियमों में क्रीड़ा विभाग न सिर्फ विभिन्न खेल गतिविधियों का संचालन करता है। जिला क्रीड़ाधिकारी की माने तो इन स्टेडियमों में इनडोर और आउटडोर खेलों के आयोजन तो होते हैं साथ ही वहां पर स्वीमिंग पूल का भी संचालन किया जाता है। ताकि लोग तैराकी करना सीख सकें। क्रिकेट के शौकीन खेल प्रेमियों के लिए क्रिकेट पिच भी बनवाई गई है।
‘माध्यमिक विद्यालयों में खेलकूद के मैदानों को दुरुस्त कराने के निर्देश दिये गये हैं। गेम शिक्षकों की भारी कमी है। इसके लिये शासन को पत्र लिखा जा चुका है।
डॉ. सच्चिदानंद यादव, डीआईओएस’
‘प्रत्येक विद्यालय में खेल का मैदान जरूरी है। पर दुर्भाग्य यह है कि जिले में अधिसंख्य स्कूलों के पास खेल के मैदान नहीं हैं। बगैर खेल मैदान के विद्यालयों को मान्यता नहीं देनी चाहिए। खेल के मैदान छात्रों के शारीरिक एवं मानसिक विकास में सहायक होते हैं।
नीरज मिश्र, जिला क्रीड़ाधिकारी’