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गणेश-लक्ष्मी से सुख-समृद्धि व वैभव की कामना
Sitapur
Updated Wed, 14 Nov 2012 12:00 PM IST
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सीतापुर। लोगों ने विधि-विधान के साथ मंगलवार शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी-गणेश की पूजा की गई। दिनभर की दौड़भाग व चहल-पहल के बाद शाम को पूजन और फिर आतिशबाजी का दौर शुरू हुआ। सबसे ज्यादा बेसब्री बच्चाें में देखने को मिली, जो किसी तरह पूजा समाप्त होते ही पटाखाें की धूम धड़ाके के लिए बेचैन रहे। रंग-बिरंगी झालराें से सजकर जगमगाते घर, दीपोत्सव पर्व की खुशियां हर किसी के चेहरे पर झलक रही थी। पूरा जिला रोशनी व आतिशबाजी से जगमगा गया। लोगों ने एक-दूसरे को दीप पर्व की बधाई दी।
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या की घोर अंधेरी रात दीपों की रोशनी से जगमग हो गई। मुहूर्त के हिसाब से लोगों ने अपने घरों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और कार्यालयों में भगवान गणेश व मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की। पूजन के बाद लोगों ने ईश्वर से मंगल कामना की। इसके बाद मां लक्ष्मी से भंडार अन्न व धन से भरने की प्रार्थना की। शहर में दीपावली की रौनक छा गई। बंगाली परिवारों ने अपने घरों में देवी महाकाली की भव्य पूजा-अर्चना की। बाबा गोपालदास घाट पर स्थित मां काली के मंदिर में इस मौके पर विशेष पूजा-अर्चना की गई। मां काली का पारंपरिक ढंग से गहनों को वस्त्रों से पूर्ण शृंगार कराकर उन्हें अस्त्र-शस्त्र धारण कराए गए। इस विशेष पूजा-अर्चना में श्रद्धालुओं ने गुड़हल के फूल और बेलपत्र से मां काली को प्रसन्न किया। पूजन के बाद बच्चाें ने जमकर आतिशबाजी छुड़ाई। अनार, महताब, चरखी, बिन्नी, बंबू और फुलझड़ी की रोशनी से आसमान जगमग हो गया।
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कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या की घोर अंधेरी रात दीपों की रोशनी से जगमग हो गई। मुहूर्त के हिसाब से लोगों ने अपने घरों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और कार्यालयों में भगवान गणेश व मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की। पूजन के बाद लोगों ने ईश्वर से मंगल कामना की। इसके बाद मां लक्ष्मी से भंडार अन्न व धन से भरने की प्रार्थना की। शहर में दीपावली की रौनक छा गई। बंगाली परिवारों ने अपने घरों में देवी महाकाली की भव्य पूजा-अर्चना की। बाबा गोपालदास घाट पर स्थित मां काली के मंदिर में इस मौके पर विशेष पूजा-अर्चना की गई। मां काली का पारंपरिक ढंग से गहनों को वस्त्रों से पूर्ण शृंगार कराकर उन्हें अस्त्र-शस्त्र धारण कराए गए। इस विशेष पूजा-अर्चना में श्रद्धालुओं ने गुड़हल के फूल और बेलपत्र से मां काली को प्रसन्न किया। पूजन के बाद बच्चाें ने जमकर आतिशबाजी छुड़ाई। अनार, महताब, चरखी, बिन्नी, बंबू और फुलझड़ी की रोशनी से आसमान जगमग हो गया।
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