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केसरिया दुर्ग को अपराजेय रखने वाले महारथी के चयन में हाईकमान का छूट रहा पसीना
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केसरिया दुर्ग को अपराजेय रखने की चुनौती
सीतापुर। भाजपा हाईकमान की कसौटी पर जिले के कई मौजूदा सांसद खरे नहीं उतर रहे हैं। लिहाजा, इतिहास दोहराने के लिए जिताऊ उम्मीदवारों की तलाशने पर मंथन किया जा रहा है।
मंथन में हर सीट पर जातीय समीकरणों और सियासी परिदृश्य से बेहतर सामंजस्य बनाने में सक्षम कुछ नाम तय किए गए हैं। जिले के चारों लोकसभा क्षेत्रों में केसरिया दुर्ग को अपराजेय रखने वाले महारथी का चयन अब इन धुरंधरों में से ही होना है।
उम्मीदवारों के ऐलान में देरी से तस्वीर साफ होने लगी है कि हाईकमान का फैसला बेहद चौंकाने वाला होगा। किसी का टिकट कटने और किसी की सीट में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। फिलहाल, सत्ता के महासंग्राम में मजबूती से टिककर फतह हासिल करने वाला महारथी तय करने में हाईकमान का पसीना छूट रहा है।
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जिले के दायरे में सीतापुर, मिश्रिख के अलावा धौरहरा तथा मोहनलालगंज संसदीय क्षेत्र शामिल हैं। 2014 में मोदी लहर पर सवार होकर इन चारों क्षेत्रों से भाजपा के उम्मीदवार संसद पहुंच गए थे। अब मिशन 2019 में सत्तारूढ़ भाजपा के सामने इतिहास दोहराने की चुनौती है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक वर्तमान सांसदों की जनता में छवि और उनकी चुनावी स्थिति जानने के लिए हाईकमान द्वारा अलग-अलग कई संस्थाओं से गोपनीय सर्वे कराए गए हैं। सर्वे रिपोर्ट ने हाईकमान के होश उड़ा दिए हैं।
दरअसल, मोहनलालगंज सांसद को छोड़कर हाईकमान की कसौटी पर कोई भी सांसद खरा नहीं उतरा है। मौजूदा हालातों में तीन सिटिंग सांसद चुनावी रणभूमि के विजयी योद्धा बनते नजर नहीं आ रहे हैं।
लिहाजा, हर संसदीय क्षेत्र के जातीय समीकरणों को आधार बनाते हुए हाईकमान ने कुछ नाम तय किए हैं। अंदरखाने से मिल रहे संकेतों के मुताबिक सीतापुर सीट पर बड़ा उलटफेर हो सकता है।
यहां एक ब्राह्मण, दो कुर्मी और एक पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखने वाले नेता के बीच मंथन चल रहा है। इसमें संगठन को वरीयता मिलने पर पिछड़ा वर्ग और जातीय समीकरणों के आधार पर कुर्मी बिरादरी में मजबूत पैठ रखने वाले दो नेताओं में टिकट की जंग जारी है।
इसमें एक कुर्मी नेता गैर भाजपाई बताया जा रहा है। जबकि पिछड़ा वर्ग से प्रदेश संगठन स्तर के नेता का नाम शुमार है। धौरहरा में तीन कुर्मी नेताओं में टिकट की टक्कर है।
मिश्रिख में कांग्रेस और गठबंधन का प्रत्याशी घोषित होने के बाद मौजूदा सांसद की चुनावी जमीन मजबूत जरूर हुई है। मगर एक पूर्व सांसद के साथ तीन दावेदारों में टिकट को लेकर कड़ा मुकाबला चल रहा है।
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सीतापुर। भाजपा हाईकमान की कसौटी पर जिले के कई मौजूदा सांसद खरे नहीं उतर रहे हैं। लिहाजा, इतिहास दोहराने के लिए जिताऊ उम्मीदवारों की तलाशने पर मंथन किया जा रहा है।
मंथन में हर सीट पर जातीय समीकरणों और सियासी परिदृश्य से बेहतर सामंजस्य बनाने में सक्षम कुछ नाम तय किए गए हैं। जिले के चारों लोकसभा क्षेत्रों में केसरिया दुर्ग को अपराजेय रखने वाले महारथी का चयन अब इन धुरंधरों में से ही होना है।
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उम्मीदवारों के ऐलान में देरी से तस्वीर साफ होने लगी है कि हाईकमान का फैसला बेहद चौंकाने वाला होगा। किसी का टिकट कटने और किसी की सीट में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। फिलहाल, सत्ता के महासंग्राम में मजबूती से टिककर फतह हासिल करने वाला महारथी तय करने में हाईकमान का पसीना छूट रहा है।
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जिले के दायरे में सीतापुर, मिश्रिख के अलावा धौरहरा तथा मोहनलालगंज संसदीय क्षेत्र शामिल हैं। 2014 में मोदी लहर पर सवार होकर इन चारों क्षेत्रों से भाजपा के उम्मीदवार संसद पहुंच गए थे। अब मिशन 2019 में सत्तारूढ़ भाजपा के सामने इतिहास दोहराने की चुनौती है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक वर्तमान सांसदों की जनता में छवि और उनकी चुनावी स्थिति जानने के लिए हाईकमान द्वारा अलग-अलग कई संस्थाओं से गोपनीय सर्वे कराए गए हैं। सर्वे रिपोर्ट ने हाईकमान के होश उड़ा दिए हैं।
दरअसल, मोहनलालगंज सांसद को छोड़कर हाईकमान की कसौटी पर कोई भी सांसद खरा नहीं उतरा है। मौजूदा हालातों में तीन सिटिंग सांसद चुनावी रणभूमि के विजयी योद्धा बनते नजर नहीं आ रहे हैं।
लिहाजा, हर संसदीय क्षेत्र के जातीय समीकरणों को आधार बनाते हुए हाईकमान ने कुछ नाम तय किए हैं। अंदरखाने से मिल रहे संकेतों के मुताबिक सीतापुर सीट पर बड़ा उलटफेर हो सकता है।
यहां एक ब्राह्मण, दो कुर्मी और एक पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखने वाले नेता के बीच मंथन चल रहा है। इसमें संगठन को वरीयता मिलने पर पिछड़ा वर्ग और जातीय समीकरणों के आधार पर कुर्मी बिरादरी में मजबूत पैठ रखने वाले दो नेताओं में टिकट की जंग जारी है।
इसमें एक कुर्मी नेता गैर भाजपाई बताया जा रहा है। जबकि पिछड़ा वर्ग से प्रदेश संगठन स्तर के नेता का नाम शुमार है। धौरहरा में तीन कुर्मी नेताओं में टिकट की टक्कर है।
मिश्रिख में कांग्रेस और गठबंधन का प्रत्याशी घोषित होने के बाद मौजूदा सांसद की चुनावी जमीन मजबूत जरूर हुई है। मगर एक पूर्व सांसद के साथ तीन दावेदारों में टिकट को लेकर कड़ा मुकाबला चल रहा है।