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80 फीसदी बच्चों के पास नहीं आधार कार्ड
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 02 Jan 2017 11:11 PM IST
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केंद्र सरकार आधार कार्ड के जरिये शिक्षा की मॉनीटरिंग करानी चाहती है। लेकिन यह मॉनीटरिंग करना अभी दूर की कौड़ी है। कारण, अभी 80 फीसदी बच्चों के पास आधार कार्ड नहीं है। जिनके पास आधार कार्ड है, उन्हें बच्चों के अभिभावकों ने बनवाए है। विभाग की तरफ से इन कार्डों को बनवाने के लिए निर्देश तो कई बार आए लेकिन यह कवायद धरातल पर नहीं उतर सकी। किसी भी एजेंसी द्वारा बच्चों के आधार कार्ड नहीं बनवाए जा सकें।
सबसे खराब स्थिति परिषदीय विद्यालय के ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों की है। परिषदीय विद्यालयों में करीब छह लाख नौनिहाल पढ़ रहे है। इसमें करीब 20 फीसदी बच्चों के पास आधार कार्ड है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय देश भर के सरकारी स्कूलों में कितने छात्र पढ़ते हैं, उनका रिजल्ट कैसा है आदि को लेकर तत्पर है। देश भर के सभी सरकारी स्कूलों के बच्चों की निगरानी अब आधार कार्ड के जरिये होगी।
सरकार पांच से 18 आयु वर्ग तक के सभी छात्रों का आधार लिंक कर रीयल टाइम मॉनीटरिंग से पढ़ाई व ड्रॉप आउट आदि का रिव्यू करेगी। जिन बच्चों के पास आधार कार्ड नहीं है, उन्हें यूनीक नंबर दिया जाएगा। लेकिन आधार कार्ड व यूनीक नंबर को लेकर जिले में कोई कवायद नहीं चल रही है। ऐेसे में केंद्र सरकार की यह मंशा जिले में फलीभूत होती दिखाई नहीं पड़ रही है।
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वहीं, बेसिक विभाग इस योजना को लेकर कितना फिक्रमंद है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पटल कार्यालय में किस लिपिक के पास यह कार्य है, अभी तय नहीं है। शासन से जब भी इसे लेकर कोई पत्र आता है तो यह इधर-उधर भटकता रहता है। बीएसए राजेंद्र सिंह ने बताया कि अभी बच्चों के पास नाममात्र ही आधार कार्ड है। प्लानिंग की जा रही है। जल्द ही डीएम से इस मसले पर बात कर आधार कार्ड बनवाए जाएंगे।
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सबसे खराब स्थिति परिषदीय विद्यालय के ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों की है। परिषदीय विद्यालयों में करीब छह लाख नौनिहाल पढ़ रहे है। इसमें करीब 20 फीसदी बच्चों के पास आधार कार्ड है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय देश भर के सरकारी स्कूलों में कितने छात्र पढ़ते हैं, उनका रिजल्ट कैसा है आदि को लेकर तत्पर है। देश भर के सभी सरकारी स्कूलों के बच्चों की निगरानी अब आधार कार्ड के जरिये होगी।
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सरकार पांच से 18 आयु वर्ग तक के सभी छात्रों का आधार लिंक कर रीयल टाइम मॉनीटरिंग से पढ़ाई व ड्रॉप आउट आदि का रिव्यू करेगी। जिन बच्चों के पास आधार कार्ड नहीं है, उन्हें यूनीक नंबर दिया जाएगा। लेकिन आधार कार्ड व यूनीक नंबर को लेकर जिले में कोई कवायद नहीं चल रही है। ऐेसे में केंद्र सरकार की यह मंशा जिले में फलीभूत होती दिखाई नहीं पड़ रही है।
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वहीं, बेसिक विभाग इस योजना को लेकर कितना फिक्रमंद है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पटल कार्यालय में किस लिपिक के पास यह कार्य है, अभी तय नहीं है। शासन से जब भी इसे लेकर कोई पत्र आता है तो यह इधर-उधर भटकता रहता है। बीएसए राजेंद्र सिंह ने बताया कि अभी बच्चों के पास नाममात्र ही आधार कार्ड है। प्लानिंग की जा रही है। जल्द ही डीएम से इस मसले पर बात कर आधार कार्ड बनवाए जाएंगे।