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कारागार राज्यमंत्री ने जेल का किया औचक निरीक्षण
Updated Tue, 22 Aug 2017 11:32 PM IST
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तौल कर देखीं बंदियों को दी जाने वाली रोटियां
सीतापुर। कारागार राज्यमंत्री जय कुमार सिंह जैकी ने मंगलवार को जिला कारागार का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने बैरक देखीं।
जेल की सुविधाओं पर नजर डाली और कैदियों से भी बातचीत की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जेल कर्मियों से बात की। करीब एक घंटे के निरीक्षण के बाद कारागार राज्यमंत्री वापस चले गए।
कारागार राज्यमंत्री जय कुमार सिंह जैकी ने मंगलवार की सुबह 11 बजे जिला जेल पर छापा मारा। कारागार राज्यमंत्री सीधे बंदियों की बैरक पहुंचे और बंदियों से दवा और भोजन के बारे में जाना।
इसी दौरान राज्यमंत्री भंडारा पहुंचे। यहां पर भोजन की गुणवत्ता देखी। उन्होंने बंदियों की रोटी का वजन तौलकर देखा। जेल परिसर के अस्पताल पहुंचकर वहां मौजूद बंदियों से इलाज के बारे में जाना।
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राज्यमंत्री ने जेल के अभिलेखों का भी निरीक्षण किया। इसके बाद राज्यमंत्री जेल के कर्मियों से मुखातिब हुए। इस दौरान हेड बार्डर ज्ञान बहादुर सिंह ने बताया कि उनके सेवानिवृत्त को महज डेढ़ वर्ष ही बचे हैं।
ऐसे में प्रावधान है कि गृह जनपद के निकट की जेल में तैनाती दी जाए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। ज्ञान बहादुर ने गृह जनपद के निकट जेल में स्थानांतरण की इच्छा जताई। जिस पर राज्यमंत्री ने आश्वासन दिया। जेल में बने सरकारी आवास की बदहाली का भी मुद्दा उठा। करीब एक घंटे के निरीक्षण के बाद कारागार राज्यमंत्री वापस चले गए।
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सीतापुर। कारागार राज्यमंत्री जय कुमार सिंह जैकी ने मंगलवार को जिला कारागार का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने बैरक देखीं।
जेल की सुविधाओं पर नजर डाली और कैदियों से भी बातचीत की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जेल कर्मियों से बात की। करीब एक घंटे के निरीक्षण के बाद कारागार राज्यमंत्री वापस चले गए।
कारागार राज्यमंत्री जय कुमार सिंह जैकी ने मंगलवार की सुबह 11 बजे जिला जेल पर छापा मारा। कारागार राज्यमंत्री सीधे बंदियों की बैरक पहुंचे और बंदियों से दवा और भोजन के बारे में जाना।
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इसी दौरान राज्यमंत्री भंडारा पहुंचे। यहां पर भोजन की गुणवत्ता देखी। उन्होंने बंदियों की रोटी का वजन तौलकर देखा। जेल परिसर के अस्पताल पहुंचकर वहां मौजूद बंदियों से इलाज के बारे में जाना।
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राज्यमंत्री ने जेल के अभिलेखों का भी निरीक्षण किया। इसके बाद राज्यमंत्री जेल के कर्मियों से मुखातिब हुए। इस दौरान हेड बार्डर ज्ञान बहादुर सिंह ने बताया कि उनके सेवानिवृत्त को महज डेढ़ वर्ष ही बचे हैं।
ऐसे में प्रावधान है कि गृह जनपद के निकट की जेल में तैनाती दी जाए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। ज्ञान बहादुर ने गृह जनपद के निकट जेल में स्थानांतरण की इच्छा जताई। जिस पर राज्यमंत्री ने आश्वासन दिया। जेल में बने सरकारी आवास की बदहाली का भी मुद्दा उठा। करीब एक घंटे के निरीक्षण के बाद कारागार राज्यमंत्री वापस चले गए।