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बारिश से मेंथा फसल के किसानों की बढ़ीं मुसीबतें
Updated Tue, 11 Jul 2017 10:31 PM IST
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बारिश ने बढ़ाई मेंथा फसल के किसानों की मुसीबतें
महमूदाबाद(सीतापुर)। पिछले सात दिन से हो रही रिमझिम बरसात से नकदी फसल मेंथा उगाने वाले किसान फसल की कटाई व पेराई नहीं कर पाने से जहां काफी हलकान हैं, वहीं बरसात से गन्ना, धान, ज्वार आदि की खेती करने वाले किसान राहत महसूस कर रहे हैं। मालूम हो कि सात दिन हो रही बरसात ने जनमानस को जहां भीषण गर्मी व उमस से भारी राहत दी। वहीं नकदी मेंथा फसल उगाने वाले किसानों के सामने गंभीर संकट उत्पन्न कर दिया। मेंथा किसान रमेश वर्मा ने बताया कि मेंथा की खेती के दो तरीके किसान अपनाते हैं। एक तो जनवरी-फरवरी में मेंथा की जड़ रोपित करते हैं दूसरे लोग मेंथा की पौध रोपित कर फसल लेते हैं। उन्होंने बताया कि करीब तीन माह में तैयार होने वाली इस फसल को किसान गेहूं काटकर मेंथा की रोपाई करते हैं जिसे धान लगाने के पूर्व काट लेते हैं। दिनेश वाजपेयी ने बताया कि मेंथा की फसल की कटाई खुली धूप के दौरान की जाती है क्योंकि बरसात होने से आयल कम निकलता है। उन्होंने बताया कि मेंथा आयल निकालने के लिए बड़ी मात्रा में आसवन करने वाली टंकी को गर्म को गर्म करने के लिए ईंधन की आवश्यकता होती है। बरसात में ईंधन भी भीग जाता है जिससे मेंथा की पेराई करने में भी भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। राजेश सिंह बताते हैं कि मेंथा के निचले खेतों में यदि पानी का ठहराव हो जाता है तो पूरी फसल नष्ट हो जाती है। हो रही बरसात का लाभ खरीफ की अन्य गन्ना, धान, ज्वार, मक्का आदि को मिल रहा है। ऐसे में किसान को बरसात ने गम व खुशी साथ-साथ दी है।
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महमूदाबाद(सीतापुर)। पिछले सात दिन से हो रही रिमझिम बरसात से नकदी फसल मेंथा उगाने वाले किसान फसल की कटाई व पेराई नहीं कर पाने से जहां काफी हलकान हैं, वहीं बरसात से गन्ना, धान, ज्वार आदि की खेती करने वाले किसान राहत महसूस कर रहे हैं। मालूम हो कि सात दिन हो रही बरसात ने जनमानस को जहां भीषण गर्मी व उमस से भारी राहत दी। वहीं नकदी मेंथा फसल उगाने वाले किसानों के सामने गंभीर संकट उत्पन्न कर दिया। मेंथा किसान रमेश वर्मा ने बताया कि मेंथा की खेती के दो तरीके किसान अपनाते हैं। एक तो जनवरी-फरवरी में मेंथा की जड़ रोपित करते हैं दूसरे लोग मेंथा की पौध रोपित कर फसल लेते हैं। उन्होंने बताया कि करीब तीन माह में तैयार होने वाली इस फसल को किसान गेहूं काटकर मेंथा की रोपाई करते हैं जिसे धान लगाने के पूर्व काट लेते हैं। दिनेश वाजपेयी ने बताया कि मेंथा की फसल की कटाई खुली धूप के दौरान की जाती है क्योंकि बरसात होने से आयल कम निकलता है। उन्होंने बताया कि मेंथा आयल निकालने के लिए बड़ी मात्रा में आसवन करने वाली टंकी को गर्म को गर्म करने के लिए ईंधन की आवश्यकता होती है। बरसात में ईंधन भी भीग जाता है जिससे मेंथा की पेराई करने में भी भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। राजेश सिंह बताते हैं कि मेंथा के निचले खेतों में यदि पानी का ठहराव हो जाता है तो पूरी फसल नष्ट हो जाती है। हो रही बरसात का लाभ खरीफ की अन्य गन्ना, धान, ज्वार, मक्का आदि को मिल रहा है। ऐसे में किसान को बरसात ने गम व खुशी साथ-साथ दी है।