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तंबौर के नौ गांव बाढ़ की चपेट में, रेउसा में तीन घर कटकर बहे
Updated Sat, 18 Aug 2018 12:32 AM IST
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नदियों का रौद्र रूप देख दहशत में लोग
रेउसा/ तंबौर (सीतापुर)। जिले के गांजरी इलाके में बाढ़ का कहर बढ़ता ही जा रहा है। तंबौर क्षेत्र में नौ गांव और बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। जबकि रेउसा क्षेत्र में हालात जस के तस बने हुए हैं। यहां पर कोनी गांव में घाघरा तेजी से कटान कर रही है। तीन घर कटकर नदी में बह गए हैं। इससे परिवार बेघर हो रहे हैं। नदियों का रौद्र रूप देख लोग दहशत में हैं।
तंबौर इलाके में ड्योढ़ेडीह, भनवापुर व काजी बेहड़ गांव गुरुवार रात शारदा नदी की बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। जबकि तंबौर कस्बा पहले से ही बाढ़ का दंश झेल रहा है। लगातार बढ़ते पानी से कस्बे के बाशिंदे चिंतित हैं। इस क्षेत्र के अधिकांश गांवों के संपर्क मार्ग बाढ़ की चपेट में हैं। जिससे तटीय क्षेत्र के बाशिंदों का आवागमन प्रभावित हो रहा है।
नदी का रौद्र रूप देखकर तंबौर इलाके में हड़कंप की स्थिति है। जहां तंबौर इलाके में बाढ़ से लोगों में दहशत है, वहीं रेउसा में घाघरा कहर बरपा रही है। रेउसा के कोनी व नगीना पुरवा के निकट नदी कटान कर रही है। गुरुवार रात कोनी के रामानंद, पैकरमा और सुशील के घर कटकर नदी में बह गए। रामानंद व पैकरमा के घर पक्के थे, जबकि सुशील की झोपड़ी थी।
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गनीमत यह रही, कि इन घरों में रहने वाले परिवार नदी का रुख भांपकर पहले ही घरों को खाली कर चुके थे। जिससे उन परिवारों का जान बच गई। घर नदी में समाने के बाद तीनों परिवार कोनी गांव से पलायन कर गए। उधर नगीनापुरवा के निकट नदी खेतिहर जमीन काट रही है। खेत, खलिहान, मैदान, आबादी, रास्ते जलमग्न नजर आ रहे हैं।
हर तरफ पानी ही पानी भरा हुआ है। तंबौर व रेउसा इलाके में करीब 30 हजार बीघा खेती जलमग्न है। किसानों की फसलें तबाह हो रही हैं। जहां आम जनमानस परेशान हैं, वहीं पालतू पशुओं को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिनके आगे चारे की संकट आ गया है।
कुल मिलाकर तंबौर से रेउसा तक पूरे इलाके में 109 गांव बाढ़ की चपेट में है। जहां पर इस क्षेत्र का यह हाल है, वहीं बैराजों से भी राहत भरी खबर नहीं मिल रही है। गुरुवार को शारदा व घाघरा बैराजों से करीब 2,66,532 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे एक-दो दिनों में हालात सुधरने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
16 गांवों के प्रमुख मार्ग पानी में डूबे
तंबौर। क्षेत्र में बाढ़ का जबरदस्त रूप देखने को मिल रहा है। खासकर तंबौर-रजनापुर मार्ग पर करीब एक किलोमीटर दूरी तक शारदा नदी का करीब ढाई से तीन फीट तक पानी बह रहा है, वह पानी भी पूरे वेग से बह रहा है। सड़क के आसपास भट्ठे खुदे हुए हैं।
इससे खतरा इस कदर बढ़ा हुआ है कि अगर वह सड़क के तीन फीट पानी के बहाव में आकर बह गया। तो सड़क पार होते ही वह करीब 15 से 20 फीट गहरे पानी में पहुंच जाएगा। इससे लोगों की जान पर संकट बन आया है।
रजनापुर मार्ग पर बाढ़ का पानी बहने से क्षेत्र के पूरन सरांय, छतांगुर, रजनापुर, मुरब्बा, सुजावलपुर, बोधवा, बड़रिया, बरछता, रमुआपुर, रोहिला, शिवपुर, कतरा, रायपुर समेत करीब 16 गांवों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। इस क्षेत्र के बाशिंदों की प्रमुख बाजार कस्बा तंबौर ही है।
इस वजह से करीब 16 गांवों बाशिंदों को घरेलू जरूरत के सामान की खरीददारी करने के लिए जान जोखिम में डालकर तंबौर कस्बा आना पड़ रहा है। क्षेत्र के बाशिंदों का कहना है कि अगर इस मार्ग पर सुरक्षा के जरूरी इंतजाम न किए गए, तो लोगों की जान भी जा सकती है।
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रेउसा/ तंबौर (सीतापुर)। जिले के गांजरी इलाके में बाढ़ का कहर बढ़ता ही जा रहा है। तंबौर क्षेत्र में नौ गांव और बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। जबकि रेउसा क्षेत्र में हालात जस के तस बने हुए हैं। यहां पर कोनी गांव में घाघरा तेजी से कटान कर रही है। तीन घर कटकर नदी में बह गए हैं। इससे परिवार बेघर हो रहे हैं। नदियों का रौद्र रूप देख लोग दहशत में हैं।
तंबौर इलाके में ड्योढ़ेडीह, भनवापुर व काजी बेहड़ गांव गुरुवार रात शारदा नदी की बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। जबकि तंबौर कस्बा पहले से ही बाढ़ का दंश झेल रहा है। लगातार बढ़ते पानी से कस्बे के बाशिंदे चिंतित हैं। इस क्षेत्र के अधिकांश गांवों के संपर्क मार्ग बाढ़ की चपेट में हैं। जिससे तटीय क्षेत्र के बाशिंदों का आवागमन प्रभावित हो रहा है।
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नदी का रौद्र रूप देखकर तंबौर इलाके में हड़कंप की स्थिति है। जहां तंबौर इलाके में बाढ़ से लोगों में दहशत है, वहीं रेउसा में घाघरा कहर बरपा रही है। रेउसा के कोनी व नगीना पुरवा के निकट नदी कटान कर रही है। गुरुवार रात कोनी के रामानंद, पैकरमा और सुशील के घर कटकर नदी में बह गए। रामानंद व पैकरमा के घर पक्के थे, जबकि सुशील की झोपड़ी थी।
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गनीमत यह रही, कि इन घरों में रहने वाले परिवार नदी का रुख भांपकर पहले ही घरों को खाली कर चुके थे। जिससे उन परिवारों का जान बच गई। घर नदी में समाने के बाद तीनों परिवार कोनी गांव से पलायन कर गए। उधर नगीनापुरवा के निकट नदी खेतिहर जमीन काट रही है। खेत, खलिहान, मैदान, आबादी, रास्ते जलमग्न नजर आ रहे हैं।
हर तरफ पानी ही पानी भरा हुआ है। तंबौर व रेउसा इलाके में करीब 30 हजार बीघा खेती जलमग्न है। किसानों की फसलें तबाह हो रही हैं। जहां आम जनमानस परेशान हैं, वहीं पालतू पशुओं को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिनके आगे चारे की संकट आ गया है।
कुल मिलाकर तंबौर से रेउसा तक पूरे इलाके में 109 गांव बाढ़ की चपेट में है। जहां पर इस क्षेत्र का यह हाल है, वहीं बैराजों से भी राहत भरी खबर नहीं मिल रही है। गुरुवार को शारदा व घाघरा बैराजों से करीब 2,66,532 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे एक-दो दिनों में हालात सुधरने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
16 गांवों के प्रमुख मार्ग पानी में डूबे
तंबौर। क्षेत्र में बाढ़ का जबरदस्त रूप देखने को मिल रहा है। खासकर तंबौर-रजनापुर मार्ग पर करीब एक किलोमीटर दूरी तक शारदा नदी का करीब ढाई से तीन फीट तक पानी बह रहा है, वह पानी भी पूरे वेग से बह रहा है। सड़क के आसपास भट्ठे खुदे हुए हैं।
इससे खतरा इस कदर बढ़ा हुआ है कि अगर वह सड़क के तीन फीट पानी के बहाव में आकर बह गया। तो सड़क पार होते ही वह करीब 15 से 20 फीट गहरे पानी में पहुंच जाएगा। इससे लोगों की जान पर संकट बन आया है।
रजनापुर मार्ग पर बाढ़ का पानी बहने से क्षेत्र के पूरन सरांय, छतांगुर, रजनापुर, मुरब्बा, सुजावलपुर, बोधवा, बड़रिया, बरछता, रमुआपुर, रोहिला, शिवपुर, कतरा, रायपुर समेत करीब 16 गांवों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। इस क्षेत्र के बाशिंदों की प्रमुख बाजार कस्बा तंबौर ही है।
इस वजह से करीब 16 गांवों बाशिंदों को घरेलू जरूरत के सामान की खरीददारी करने के लिए जान जोखिम में डालकर तंबौर कस्बा आना पड़ रहा है। क्षेत्र के बाशिंदों का कहना है कि अगर इस मार्ग पर सुरक्षा के जरूरी इंतजाम न किए गए, तो लोगों की जान भी जा सकती है।