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रामलीला में श्रवण कुमार व राम केवट संवाद का मंचन
Updated Sun, 14 Oct 2018 11:17 PM IST
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पिसावां (सीतापुर)। बाबू सिंह इंटर कॉलेज के पास चल रही रामलीला के छठे दिन जय मड़ैया बाबा सेवा समिति के कलाकारों ने श्रवण कुमार व राम केवट संवाद का मंचन किया, जिसे देख दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए और पूरा पंडाल जय श्री राम के जयकारों से गूंज उठा।
मंचन में दिखाया गया कि राम, लक्ष्मण व सीता के वनवास चले जाने के बाद राजा दशरथ बेसुध होकर श्रवण के माता-पिता के श्राप को याद कर रहे हैं। दिखाया गया कि वे एक बार शिकार को वन में गए। राजा दशरथ के शब्दभेदी वाण से अपने माता-पिता के लिए पानी लेने गए श्रवण की मौत हो गई।
श्रवण की मौत के बाद जब दशरथ उनके अंधे माता-पिता को पानी पिलाने गए तो अपने पुत्र श्रवण के वियोग में रो-रोकर श्राप देते हैं कि जैसे हम अपने पुत्र के वियोग में प्राण त्याग रहे हैं, वैसे ही आपको भी पुत्र वियोग में प्राण त्यागना पड़ेगा।
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उधर, भगवान श्रीराम जंगल पहुंचते है। यहां पर श्रीराम गंगा पार करने के लिए केवट को बुलाते हैं, लेकिन केवट कहता है कि मै ंआपके प्रभाव को जानता हूं। मेरी नाव तो पत्थर से भी कोमल है। अगर यह नारी बन गई तो मेरे परिवार का पालन पोषण कैसे होगा। पहले आप मुझे अपने पैर धोने दें, तब मैं आपको नाव में बैठाऊंगा।
भगवान राम केवट को पैर धोने की अनुमति दे देते है। इसके बाद केवट राम को गंगा पार उतार देता है। माता सीता जब अंगूठी उतारकर केवट को उतराई देने लगती हैं तो केवट अंगूठी न लेकर कहता है कि मैनें आपको नदी के पार उतारा है। बदले में आप मुझे भवसागर पार करा देना। इस दौरान बड़ी संख्या में जुटे लोग मंचन को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए।
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मंचन में दिखाया गया कि राम, लक्ष्मण व सीता के वनवास चले जाने के बाद राजा दशरथ बेसुध होकर श्रवण के माता-पिता के श्राप को याद कर रहे हैं। दिखाया गया कि वे एक बार शिकार को वन में गए। राजा दशरथ के शब्दभेदी वाण से अपने माता-पिता के लिए पानी लेने गए श्रवण की मौत हो गई।
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श्रवण की मौत के बाद जब दशरथ उनके अंधे माता-पिता को पानी पिलाने गए तो अपने पुत्र श्रवण के वियोग में रो-रोकर श्राप देते हैं कि जैसे हम अपने पुत्र के वियोग में प्राण त्याग रहे हैं, वैसे ही आपको भी पुत्र वियोग में प्राण त्यागना पड़ेगा।
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उधर, भगवान श्रीराम जंगल पहुंचते है। यहां पर श्रीराम गंगा पार करने के लिए केवट को बुलाते हैं, लेकिन केवट कहता है कि मै ंआपके प्रभाव को जानता हूं। मेरी नाव तो पत्थर से भी कोमल है। अगर यह नारी बन गई तो मेरे परिवार का पालन पोषण कैसे होगा। पहले आप मुझे अपने पैर धोने दें, तब मैं आपको नाव में बैठाऊंगा।
भगवान राम केवट को पैर धोने की अनुमति दे देते है। इसके बाद केवट राम को गंगा पार उतार देता है। माता सीता जब अंगूठी उतारकर केवट को उतराई देने लगती हैं तो केवट अंगूठी न लेकर कहता है कि मैनें आपको नदी के पार उतारा है। बदले में आप मुझे भवसागर पार करा देना। इस दौरान बड़ी संख्या में जुटे लोग मंचन को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए।