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भुगतान न मिलने से हड़ताल पर गए वाहन स्वामी
Updated Sun, 17 Dec 2017 10:45 PM IST
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भुगतान न मिलने से हड़ताल पर गए वाहन स्वामी
सीतापुर। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत प्रत्येक सीएचसी पर अटैच वाहन स्वामी पांच महीने से वाहन भत्ता न मिलने के कारण हड़ताल पर चले गए। इसके लिए विभाग वाहन स्वामियों को ही दोषी ठहरा रहा है जबकि वाहन स्वामी स्वास्थ्य विभाग पर शोषण करने का आरोप लगा रहे हैं।
मालूम हो कि जिले के ग्रामीण क्षेत्र में प्रत्येक विकासखंड पर एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बना हुआ है। इस प्रकार 19 सीएचसी पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 38 वाहन लगाए गए हैं। यानि एक सीएचसी पर दो वाहन अटैच हैं। इन वाहनों के जरिए सीएचसी से स्वास्थ्य टीमें क्षेत्र भ्रमण पर जाती है। टीकाकरण, पल्स पोलियो सहित तमाम योजनाओं के क्रियान्वयन करने में डॉक्टर इन वाहनों का सहारा लेते हैं।
वाहन स्वामियों का कहना है इस साल जून तक का पेमेंट हुआ था। जुलाई से अब तक एक भी पैसा नहीं मिला है। इस वजह से वाहन चलाना मुश्किल हो रहा है। इसको लेकर सीएमओ से भी शिकायत की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अंतत: वाहन स्वामियों ने हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के चलते ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं के बाधित होने की आशंका पैदा हो गई है। योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी असर पड़ सकता है।
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38 वाहन सीएचसी पर लगे हुए हैं। जुलाई माह से पेमेंट नहीं हुआ है। इससे वाहन चलाना मुश्किल हो गया है। मजबूरन हड़ताल शुरू कर दी गई है। सीएचसी अधीक्षक सत्यापित करके बिल नहीं भेज रहे हैं जबकि टेंडर प्रक्रिया में प्रत्येक माह के 25 दिन का भुगतान करने का हवाला था। अधीक्षक इससे कम दिन ही सत्यापित करने की बात कहते हैं। इससे घाटा हो रहा है। यह शर्तों का उल्लघंन भी है। सीएमओ से शिकायत की तो उन्होंने अधीक्षकों पर पूरा मामला डाल दिया। -सौरभ मेहरोत्रा, वाहन कान्ट्रेक्टर
सीएचसी अधीक्षक ही इनका बिल सत्यापित करके हमे देगे तभी इनका भुगतान किया जाएगा। टेंडर प्रक्रिया में शर्ते थी 25 दिन का भुगतान होगा। लेकिन अगर इससे कम दिन वाहन चलता है तो उस दिन का भत्ता काट दिया जाएगा। लेकिन यह लोग जबरदस्ती दबाव डाल रहे है। वह पूरा भुगतान कराना चाहते है। इसी वजह से देर हो रही है। इनके हड़ताल पर जाने से किराए से दूसरे वाहनों से काम कराया जाएगा। -डॉ. वीके सिंह, सीएमओ
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सीतापुर। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत प्रत्येक सीएचसी पर अटैच वाहन स्वामी पांच महीने से वाहन भत्ता न मिलने के कारण हड़ताल पर चले गए। इसके लिए विभाग वाहन स्वामियों को ही दोषी ठहरा रहा है जबकि वाहन स्वामी स्वास्थ्य विभाग पर शोषण करने का आरोप लगा रहे हैं।
मालूम हो कि जिले के ग्रामीण क्षेत्र में प्रत्येक विकासखंड पर एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बना हुआ है। इस प्रकार 19 सीएचसी पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 38 वाहन लगाए गए हैं। यानि एक सीएचसी पर दो वाहन अटैच हैं। इन वाहनों के जरिए सीएचसी से स्वास्थ्य टीमें क्षेत्र भ्रमण पर जाती है। टीकाकरण, पल्स पोलियो सहित तमाम योजनाओं के क्रियान्वयन करने में डॉक्टर इन वाहनों का सहारा लेते हैं।
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वाहन स्वामियों का कहना है इस साल जून तक का पेमेंट हुआ था। जुलाई से अब तक एक भी पैसा नहीं मिला है। इस वजह से वाहन चलाना मुश्किल हो रहा है। इसको लेकर सीएमओ से भी शिकायत की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अंतत: वाहन स्वामियों ने हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के चलते ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं के बाधित होने की आशंका पैदा हो गई है। योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी असर पड़ सकता है।
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38 वाहन सीएचसी पर लगे हुए हैं। जुलाई माह से पेमेंट नहीं हुआ है। इससे वाहन चलाना मुश्किल हो गया है। मजबूरन हड़ताल शुरू कर दी गई है। सीएचसी अधीक्षक सत्यापित करके बिल नहीं भेज रहे हैं जबकि टेंडर प्रक्रिया में प्रत्येक माह के 25 दिन का भुगतान करने का हवाला था। अधीक्षक इससे कम दिन ही सत्यापित करने की बात कहते हैं। इससे घाटा हो रहा है। यह शर्तों का उल्लघंन भी है। सीएमओ से शिकायत की तो उन्होंने अधीक्षकों पर पूरा मामला डाल दिया। -सौरभ मेहरोत्रा, वाहन कान्ट्रेक्टर
सीएचसी अधीक्षक ही इनका बिल सत्यापित करके हमे देगे तभी इनका भुगतान किया जाएगा। टेंडर प्रक्रिया में शर्ते थी 25 दिन का भुगतान होगा। लेकिन अगर इससे कम दिन वाहन चलता है तो उस दिन का भत्ता काट दिया जाएगा। लेकिन यह लोग जबरदस्ती दबाव डाल रहे है। वह पूरा भुगतान कराना चाहते है। इसी वजह से देर हो रही है। इनके हड़ताल पर जाने से किराए से दूसरे वाहनों से काम कराया जाएगा। -डॉ. वीके सिंह, सीएमओ