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शायरों ने कलाम के जरिए बांधीं समां
Updated Sun, 04 Nov 2018 11:33 PM IST
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खैराबाद (सीतापुर)। नगर के दरी मंडी चौराहे पर शनिवार की रात आल इंडिया मुशायरे में शायरों ने अपने कलाम पेेश किए। यह आयोजन मुशायरा कमेटी व नगर पालिका परिषद के पालिकाध्यक्ष हाजी मोहम्मद जलीस अंसारी ने किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत के पूर्व जिला अध्यक्ष महेंद्र सिंह व विशिष्ट अतिथि पूर्व मंत्री बुनियाद हुसैन अंसारी रहे।
मुशायरे में अना देहलवी ने कलाम प्रस्तुत करते हुए कहा, कौन मिटा सकता है तहजीबे गजल, जब तक जिंदा हैं गालिब के घराने वाले। मालेगांव से आए अल्ताफ जिया ने कहा, कैसी तरबियत से कागज पर गिरे हैं आंसू, एक भूल हुई तस्वीर भर आई है।
महाराष्ट्र के भुसावल गांव से तशरीफ लाए हामिद भुसावली ने कहा, जहां से दर्द में लज्जत नसीब होनी थी, सितम तो यह है कहानी वहां पर खत्म हुई। अनवर अमान अकबराबादी ने कहा, यह काम कितने सलीके से कर गया कोई, नजर के रास्ते से दिल में उतर गया कोई।
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हाशिम फिरोजाबादी ने फरमाया, ठहरे दरिया में तूफान उठाने आज आया हूं, सोए हुए शेरों को आज जगाने आया हूं। कानपुर से आए नदीम नैयर ने कहा, खतरा बैरजी दुश्मन से कुछ भी नहीं, खतरा तो है घर के चौकीदारों से।
कानपुर से आई शाइस्ता सना ने कहा, हमने देखा है एक रोटी के लिए मां-बाप का बंटवारा होते हुए। अंत में मुशायरे की सदारत करते हुए हाजी मोहम्मद शफीक अंसारी ने आभार जताया।
इस मौके पर पालिकाध्यक्ष हाजी मोहम्मद जलीस अंसारी, अरशद इकबाल, बब्बू चौधरी, साबित अली, अतीक अहमद अंसारी, आमिर अंसारी, जावेद मुस्तफा, अकील अहमद अंसारी आदि मौजूद रहे।
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मुशायरे में अना देहलवी ने कलाम प्रस्तुत करते हुए कहा, कौन मिटा सकता है तहजीबे गजल, जब तक जिंदा हैं गालिब के घराने वाले। मालेगांव से आए अल्ताफ जिया ने कहा, कैसी तरबियत से कागज पर गिरे हैं आंसू, एक भूल हुई तस्वीर भर आई है।
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महाराष्ट्र के भुसावल गांव से तशरीफ लाए हामिद भुसावली ने कहा, जहां से दर्द में लज्जत नसीब होनी थी, सितम तो यह है कहानी वहां पर खत्म हुई। अनवर अमान अकबराबादी ने कहा, यह काम कितने सलीके से कर गया कोई, नजर के रास्ते से दिल में उतर गया कोई।
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हाशिम फिरोजाबादी ने फरमाया, ठहरे दरिया में तूफान उठाने आज आया हूं, सोए हुए शेरों को आज जगाने आया हूं। कानपुर से आए नदीम नैयर ने कहा, खतरा बैरजी दुश्मन से कुछ भी नहीं, खतरा तो है घर के चौकीदारों से।
कानपुर से आई शाइस्ता सना ने कहा, हमने देखा है एक रोटी के लिए मां-बाप का बंटवारा होते हुए। अंत में मुशायरे की सदारत करते हुए हाजी मोहम्मद शफीक अंसारी ने आभार जताया।
इस मौके पर पालिकाध्यक्ष हाजी मोहम्मद जलीस अंसारी, अरशद इकबाल, बब्बू चौधरी, साबित अली, अतीक अहमद अंसारी, आमिर अंसारी, जावेद मुस्तफा, अकील अहमद अंसारी आदि मौजूद रहे।