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घाघरा में समाए चार मकान, सात गांव पानी से घिरे
Updated Thu, 26 Jul 2018 12:01 AM IST
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सीतापुर। रेउसा क्षेत्र में घाघरा नदी ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। हालात यह हैं कि जहां कई स्थानों पर नदी का पानी किनारों से बाहर निकलकर बहने लगा है, वहीं तेजी से कटान भी हो रही है। मंगलवार की रात कोनी गांव में चार घर कटकर नदी में समा गए। वहीं, सात गांव पानी से घिर गए हैं। इन गांवों के संपर्क मार्ग भी बाढ़ के पानी की चपेट में आ गए हैं। क्षेत्र के बाशिंदों का कहना है कि जिस तरह से घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, उससे तटीय क्षेत्र की आबादी बहुत जल्द ही बाढ़ की चपेट में आ जाएगी।
उधर, आगे भी राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। बैराजों से पौने दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जो जल्द ही सीतापुर जिले में प्रवेश कर जाएगा। नदी का विकराल रूप देखकर तटीय क्षेत्र के लोगों में हड़कंप मचा है।
इन दिनों घाघरा नदी रेउसा क्षेत्र के कोनी गांव में कहर बरपा रही है। मंगलवार की रात कोनी गांव के पेशकार पुत्र बच्चू व छैलू के पक्के मकान कटकर घाघरा नदी में समा गए। इसी तरह गांव के पेशकार पुत्र भगौती व हरद्वारी लाल के कच्चे मकान भी कटकर नदी में बह गए हैं। गनीमत यह रही कि नदी का कटान देखकर मंगलवार की सुबह ही लोगों ने घरों को खाली कर दिया था, जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया।
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इसी तरह से नदी ने क्षेत्र के रामानंद, बेचेलाल, पैकरमा, जगतपाल, हेतराम, वेदराम, मनोहर, गया प्रसाद आदि किसानों की 50 बीघा से अधिक खेतों को कटान करके निगल लिया है। नदी पूरी तरह से उफान पर है। नदी का पानी अब किनारों के बाहर बहने लगा है। करीब 1000 बीघा फसलें बाढ़ की चपेट में आ गई हैं। बाढ़ का पानी तेजी से आबादी की तरफ बढ़ रहा है।
क्षेत्र के ग्राम फौजदार पुरवा, गार्गी पुरवा, कोनी, पासिन पुरवा, लोध पुरवा, मरेली आदि के संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी की चपेट में आ गए हैँ। संपर्क मार्गों पर बाढ़ का पानी तेजी से बह रहा है। क्षेत्र के बाशिंदों का कहना है कि जिस रफ्तार से नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, उससे देर रात तक कई गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे। तटीय इलाके के बाशिंदों ने नदी का रौद्र रूप देखकर सुरक्षित ठिकानों की तलाश शुरू कर दी है।
अधिकांश परिवार चहलारी मार्ग का रुख कर रहे हैं। ग्रामीणों का संदेह बेवजह नहीं है। जहां नदी इस तरह से उफान मार रही है। वहीं बुधवार को घाघरा व शारदा बैराजों से 175434 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिसकी वजह से नदी के जल स्तर में और इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है।
पचीसा से ग्रामीणों ने शुरू किया पलायन
घाघरा नदी के टॉपू पर बसी आबादी में इन दिनों हड़कंप मचा है। पचीसा नाम के इस टॉपू पर मौजूद आबादी नदी का रौद्र रूप देखकर पलायन करने लगी है। बुधवार को पचीसा के पप्पू, गोकरन, सरोज, लाल बिहारी, हनुमान, जगतपाल, मोती लाल, मनेजर, हवलदार आदि करीब 50 परिवार नावों पर सवार होकर टॉपू से निकले। इस दौरान उनकी गृहस्थी का सामान भी नावों पर लोड था। किनारे लगने के बाद इन परिवारों में कई ने जंगल टपरी तो कई ने क्षेत्र की सड़क पर डेरा डाला है। जो परिवार बचे हैं, वे भी टॉपू से पलायन की तैयारी कर रहे हैं।
बांध की मरम्मत में तेजी
नदी को उफनाते देख प्रशासन चहलारी घाट के निकट मौजूद रामनगर बांध की मरम्मत में तेजी से जुट गया है। बता दें कि हाल ही में हुई बारिश की वजह से रामनगर बांध में जगहजगह गहरे गड्ढे हो गए थे, वहीं बड़ी दरारें पड़ गईं थी। जिसकी वजह से संदेह जताया जा रहा था कि अगर नदी अपने पूरे वेग से बहेगी, तब उसकी धार के आगे यह बांध तिनके की तरफ बह जाएगा। इन्हीं आशंकाओं को लेकर प्रशासन ने समय रहते मरम्मत का कार्य तेज कर दिया है। जेसीबी व ट्रैक्टर ट्रालियों की मदद से गड्ढों में पत्थर व मिट्टी भरने का काम जारी है। माना जा रहा है कि बाढ़ की नौबत आने से पहले ही बांध को पूरी तरह से दुरुस्त कर लिया जाएगा।
शरण भी देता है बांध
यहां बता दें कि जहां चहलारी मार्ग बाढ़ पीड़ितों को मदद देता है। वहीं रामनगर बांध भी काफी मददगार साबित होता है। हालत यह रहती है कि बाढ़ आने पर जिन परिवारों को बहराइच जिले में ठिकाना नसीब नहीं होता है। वे परिवार नदी की धारा पार करके सीतापुर जिले में मौजूद रामनगर बांध पर आ जाते हैं और इसी बांध पर आशियाना बनाकर तब तक रहते हैं, जब तक नदी का वेग शांत नहीं हो जाता है।
बाक्स
बैराजों से छोड़ा गया पानी
घाघरा 107287क्यूसेक
शारदा 68147 क्यूसेक
बनबसा 71962क्यूसेक
मौके पर भेजी गई टीम
नदी के जलस्तर में बढ़ोत्तरी हुई है। तटीय क्षेत्र के कई स्थानों पर पानी पहुंच गया है। प्रशासन की टीम मौके पर भेजी गई है। प्रशासन हर स्थिति से निपटने को तैयार है।
- शशिभूषण राय, एसडीएम
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उधर, आगे भी राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। बैराजों से पौने दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जो जल्द ही सीतापुर जिले में प्रवेश कर जाएगा। नदी का विकराल रूप देखकर तटीय क्षेत्र के लोगों में हड़कंप मचा है।
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इन दिनों घाघरा नदी रेउसा क्षेत्र के कोनी गांव में कहर बरपा रही है। मंगलवार की रात कोनी गांव के पेशकार पुत्र बच्चू व छैलू के पक्के मकान कटकर घाघरा नदी में समा गए। इसी तरह गांव के पेशकार पुत्र भगौती व हरद्वारी लाल के कच्चे मकान भी कटकर नदी में बह गए हैं। गनीमत यह रही कि नदी का कटान देखकर मंगलवार की सुबह ही लोगों ने घरों को खाली कर दिया था, जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया।
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इसी तरह से नदी ने क्षेत्र के रामानंद, बेचेलाल, पैकरमा, जगतपाल, हेतराम, वेदराम, मनोहर, गया प्रसाद आदि किसानों की 50 बीघा से अधिक खेतों को कटान करके निगल लिया है। नदी पूरी तरह से उफान पर है। नदी का पानी अब किनारों के बाहर बहने लगा है। करीब 1000 बीघा फसलें बाढ़ की चपेट में आ गई हैं। बाढ़ का पानी तेजी से आबादी की तरफ बढ़ रहा है।
क्षेत्र के ग्राम फौजदार पुरवा, गार्गी पुरवा, कोनी, पासिन पुरवा, लोध पुरवा, मरेली आदि के संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी की चपेट में आ गए हैँ। संपर्क मार्गों पर बाढ़ का पानी तेजी से बह रहा है। क्षेत्र के बाशिंदों का कहना है कि जिस रफ्तार से नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, उससे देर रात तक कई गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे। तटीय इलाके के बाशिंदों ने नदी का रौद्र रूप देखकर सुरक्षित ठिकानों की तलाश शुरू कर दी है।
अधिकांश परिवार चहलारी मार्ग का रुख कर रहे हैं। ग्रामीणों का संदेह बेवजह नहीं है। जहां नदी इस तरह से उफान मार रही है। वहीं बुधवार को घाघरा व शारदा बैराजों से 175434 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिसकी वजह से नदी के जल स्तर में और इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है।
पचीसा से ग्रामीणों ने शुरू किया पलायन
घाघरा नदी के टॉपू पर बसी आबादी में इन दिनों हड़कंप मचा है। पचीसा नाम के इस टॉपू पर मौजूद आबादी नदी का रौद्र रूप देखकर पलायन करने लगी है। बुधवार को पचीसा के पप्पू, गोकरन, सरोज, लाल बिहारी, हनुमान, जगतपाल, मोती लाल, मनेजर, हवलदार आदि करीब 50 परिवार नावों पर सवार होकर टॉपू से निकले। इस दौरान उनकी गृहस्थी का सामान भी नावों पर लोड था। किनारे लगने के बाद इन परिवारों में कई ने जंगल टपरी तो कई ने क्षेत्र की सड़क पर डेरा डाला है। जो परिवार बचे हैं, वे भी टॉपू से पलायन की तैयारी कर रहे हैं।
बांध की मरम्मत में तेजी
नदी को उफनाते देख प्रशासन चहलारी घाट के निकट मौजूद रामनगर बांध की मरम्मत में तेजी से जुट गया है। बता दें कि हाल ही में हुई बारिश की वजह से रामनगर बांध में जगहजगह गहरे गड्ढे हो गए थे, वहीं बड़ी दरारें पड़ गईं थी। जिसकी वजह से संदेह जताया जा रहा था कि अगर नदी अपने पूरे वेग से बहेगी, तब उसकी धार के आगे यह बांध तिनके की तरफ बह जाएगा। इन्हीं आशंकाओं को लेकर प्रशासन ने समय रहते मरम्मत का कार्य तेज कर दिया है। जेसीबी व ट्रैक्टर ट्रालियों की मदद से गड्ढों में पत्थर व मिट्टी भरने का काम जारी है। माना जा रहा है कि बाढ़ की नौबत आने से पहले ही बांध को पूरी तरह से दुरुस्त कर लिया जाएगा।
शरण भी देता है बांध
यहां बता दें कि जहां चहलारी मार्ग बाढ़ पीड़ितों को मदद देता है। वहीं रामनगर बांध भी काफी मददगार साबित होता है। हालत यह रहती है कि बाढ़ आने पर जिन परिवारों को बहराइच जिले में ठिकाना नसीब नहीं होता है। वे परिवार नदी की धारा पार करके सीतापुर जिले में मौजूद रामनगर बांध पर आ जाते हैं और इसी बांध पर आशियाना बनाकर तब तक रहते हैं, जब तक नदी का वेग शांत नहीं हो जाता है।
बाक्स
बैराजों से छोड़ा गया पानी
घाघरा 107287क्यूसेक
शारदा 68147 क्यूसेक
बनबसा 71962क्यूसेक
मौके पर भेजी गई टीम
नदी के जलस्तर में बढ़ोत्तरी हुई है। तटीय क्षेत्र के कई स्थानों पर पानी पहुंच गया है। प्रशासन की टीम मौके पर भेजी गई है। प्रशासन हर स्थिति से निपटने को तैयार है।
- शशिभूषण राय, एसडीएम