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पीटीसी में 1600 रिक्रूट एक साथ कर सकेंगे ट्रेनिंग
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पीटीसी में ट्रेनिंग करते जवान (फाइल फोटो)।
- फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। प्रदेश के चुनिंदा पुलिस ट्रेनिंग सेंटरों में शुमार सीतापुर पीटीसी की क्षमता अब दोगुनी होगी। अब तक यहां महज 800 रिक्रूट ही एक साथ ट्रेनिंग कर सकते थे। इसकी क्षमता बढ़ाई जाएगी। अब 16 सौ जवान प्रशिक्षण ले सकेंगे। इससे यहां पर आवास, स्कूल, बैरक, हॉस्टल, भोजनालय, शौचालय, क्लास रूम बनेंगे। प्रशिक्षण के लिए लैब, कंप्यूटर कक्ष आदि का निर्माण होगा। अस्पताल व स्वीमिंग पूल भी बनाया जाएगा।
इस पर करीब ढाई अरब रुपये खर्च होंगे। साल 2017 में नई भर्ती के रिक्रूटों की ट्रेनिंग के समय काफी संख्या में जवानों को यूपी से बाहर भेजा गया था। इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंभीरता से लिया और पुलिस के ट्रेनिंग सेंटरों की क्षमता दोगुनी करने का निर्णय लिया। जिससे रिक्रूटों को ट्रेनिंग के लिए बाहर न भेजना पड़े। अक्टूबर 2019 में बैठक में निर्णय लिया गया कि ट्रेनिंग सेंटरों को दोगुनी क्षमता वाला बनाया जाएगा।
ट्रेनिंग सेंटरों की क्षमता बढ़ाने के लिए निर्माण कार्य की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी को दी गई। सीतापुर पुलिस ट्रेनिंग सेंटर के अफसरों व स्थानीय पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने इस पर मंत्रणा की। ट्रेनिंग सेंटर को बेहतर और बड़ी क्षमता वाला बनाने के लिए प्रस्ताव बनाया गया। पीटीसी को दोगुनी क्षमता का बनाने के लिए यहां आवास, स्कूल, बैरक, हॉस्टल, भोजनालय, शौचालय, क्लास रूम, लैब, कम्प्यूटर कक्ष आदि का भी निर्माण कराया जाना है।
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पीटीसी की बाउंड्रीवाल, हॉस्पिटल व स्वीमिंग पूल का नया निर्माण कराया जाएगा। पीटीसी की क्षमता दोगुनी करने के लिए करीब दो अरब 40 करोड़ की धनराशि खर्च करने का प्रस्ताव तैयार हुआ है। यह प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद शीघ्र ही काम शुरू हो जाएगा।
रोजगार के भी बढ़ेंगे अवसर
सीतापुर जिला संभवत: प्रदेश का एकमात्र जिला है, जहां दो पुलिस ट्रेनिंग सेंटर एटीसी व एपीटीसी (आर्म पुलिस ट्रेनिंग सेंटर) हैं। इसके अलावा तीन पीएसी वाहिनीयां, पुलिस मोटर ट्रेनिंग सेंटर जैसे पुलिस के प्रमुख केंद्र हैं। यहीं पर प्रदेश का एकमात्र पुलिस आयुध भंडार भी है। ऐसे में पीटीसी की क्षमता दोगुनी होने से यहां रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
1977 में बनी थी पीटीसी
सीतापुर स्थित पुलिस ट्रेनिंग सेंटर की शुरुआत 1969 में हुई थी। तब इसे रिक्रूट ट्रेनिंग स्कूल यानी आरटीएस के नाम से जाना जाता था। साल 1977 को इसका नाम पुलिस ट्रेनिंग सेंटर हुआ। इसके बाद से सीतापुर पीटीसी के रूप में जवानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
ट्रेनरों की संख्या में होगा इजाफा
पीटीसी की क्षमता दोगुनी करने के लिए स्टाफ भी बढ़ाया जाएगा। डिप्टी एसपी अवधेश पांडेय ने बताया कि उच्चाधिकारियों के स्टाफ में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी, लेकिन ट्रेनरों की संख्या में भी बढ़ाई जाएगी। उनका कहना है कि अब तक ट्रेनर उपनिरीक्षक आठ थे। अब 14 उपनिरीक्षक तैनात किए जाएंगे। इसी तरह हेड कांस्टेबल आईटीआई 25 से बढ़कर 40, हेड कांस्टेबल पीटीआई 13 से बढ़ा कर 20 किए जाएंगे। हेड कांस्टेबिल एपी की संख्या छह से बढ़ाकर 12 की जाएगी। तीन चालक भी बढ़ाए जाएंगे।
प्रदेशभर में हैं 11 पुलिस ट्रेनिंग सेंटर
उत्तर प्रदेश में पुलिस ट्रेनिंग के 11 सेंटर हैं। इनमें सीतापुर जिले में पीटीसी, एपीटीसी, मुरादाबाद में डॉ. भीमराव अंबेडकर एकेडमी, पुलिस ट्रेनिंग स्कूल व पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज के अलावा उन्नाव, गोरखपुर, मिर्जापुर, मेरठ, कालपी, जालौन में पुलिस ट्रेनिंग सेंटर हैं। इनमें मेरठ में विशेष तौर पर महिलाओं के लिए पुलिस ट्रेनिंग सेंटर है।
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इस पर करीब ढाई अरब रुपये खर्च होंगे। साल 2017 में नई भर्ती के रिक्रूटों की ट्रेनिंग के समय काफी संख्या में जवानों को यूपी से बाहर भेजा गया था। इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंभीरता से लिया और पुलिस के ट्रेनिंग सेंटरों की क्षमता दोगुनी करने का निर्णय लिया। जिससे रिक्रूटों को ट्रेनिंग के लिए बाहर न भेजना पड़े। अक्टूबर 2019 में बैठक में निर्णय लिया गया कि ट्रेनिंग सेंटरों को दोगुनी क्षमता वाला बनाया जाएगा।
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ट्रेनिंग सेंटरों की क्षमता बढ़ाने के लिए निर्माण कार्य की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी को दी गई। सीतापुर पुलिस ट्रेनिंग सेंटर के अफसरों व स्थानीय पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने इस पर मंत्रणा की। ट्रेनिंग सेंटर को बेहतर और बड़ी क्षमता वाला बनाने के लिए प्रस्ताव बनाया गया। पीटीसी को दोगुनी क्षमता का बनाने के लिए यहां आवास, स्कूल, बैरक, हॉस्टल, भोजनालय, शौचालय, क्लास रूम, लैब, कम्प्यूटर कक्ष आदि का भी निर्माण कराया जाना है।
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पीटीसी की बाउंड्रीवाल, हॉस्पिटल व स्वीमिंग पूल का नया निर्माण कराया जाएगा। पीटीसी की क्षमता दोगुनी करने के लिए करीब दो अरब 40 करोड़ की धनराशि खर्च करने का प्रस्ताव तैयार हुआ है। यह प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद शीघ्र ही काम शुरू हो जाएगा।
रोजगार के भी बढ़ेंगे अवसर
सीतापुर जिला संभवत: प्रदेश का एकमात्र जिला है, जहां दो पुलिस ट्रेनिंग सेंटर एटीसी व एपीटीसी (आर्म पुलिस ट्रेनिंग सेंटर) हैं। इसके अलावा तीन पीएसी वाहिनीयां, पुलिस मोटर ट्रेनिंग सेंटर जैसे पुलिस के प्रमुख केंद्र हैं। यहीं पर प्रदेश का एकमात्र पुलिस आयुध भंडार भी है। ऐसे में पीटीसी की क्षमता दोगुनी होने से यहां रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
1977 में बनी थी पीटीसी
सीतापुर स्थित पुलिस ट्रेनिंग सेंटर की शुरुआत 1969 में हुई थी। तब इसे रिक्रूट ट्रेनिंग स्कूल यानी आरटीएस के नाम से जाना जाता था। साल 1977 को इसका नाम पुलिस ट्रेनिंग सेंटर हुआ। इसके बाद से सीतापुर पीटीसी के रूप में जवानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
ट्रेनरों की संख्या में होगा इजाफा
पीटीसी की क्षमता दोगुनी करने के लिए स्टाफ भी बढ़ाया जाएगा। डिप्टी एसपी अवधेश पांडेय ने बताया कि उच्चाधिकारियों के स्टाफ में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी, लेकिन ट्रेनरों की संख्या में भी बढ़ाई जाएगी। उनका कहना है कि अब तक ट्रेनर उपनिरीक्षक आठ थे। अब 14 उपनिरीक्षक तैनात किए जाएंगे। इसी तरह हेड कांस्टेबल आईटीआई 25 से बढ़कर 40, हेड कांस्टेबल पीटीआई 13 से बढ़ा कर 20 किए जाएंगे। हेड कांस्टेबिल एपी की संख्या छह से बढ़ाकर 12 की जाएगी। तीन चालक भी बढ़ाए जाएंगे।
प्रदेशभर में हैं 11 पुलिस ट्रेनिंग सेंटर
उत्तर प्रदेश में पुलिस ट्रेनिंग के 11 सेंटर हैं। इनमें सीतापुर जिले में पीटीसी, एपीटीसी, मुरादाबाद में डॉ. भीमराव अंबेडकर एकेडमी, पुलिस ट्रेनिंग स्कूल व पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज के अलावा उन्नाव, गोरखपुर, मिर्जापुर, मेरठ, कालपी, जालौन में पुलिस ट्रेनिंग सेंटर हैं। इनमें मेरठ में विशेष तौर पर महिलाओं के लिए पुलिस ट्रेनिंग सेंटर है।