{"_id":"5ce4449abdec22072f0a0556","slug":"155846369415-sitapur-news29","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंतजार में बैठे रहे मरीज, नहीं हुए अल्ट्रासाउंड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंतजार में बैठे रहे मरीज, नहीं हुए अल्ट्रासाउंड
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मनमानी के चलते कुछ देर में ही निकल गए डॉक्टर
सीतापुर। जिला अस्पताल की अल्ट्रासाउंड सुविधा बेपटरी हो गई है। मंगलवार को सुबह मरीजों की लंबी-लंबी लाइनें लग गई। डॉक्टर साहब आए, कुछ देर रुके, उसके बाद मरीजों पर झल्लाते हुए निकले गए। बाहर बैठे मरीज साहब का इंतजार कर रहे थे। कोई सांस की बीमारी से परेशान था तो किसी के पेट में दर्द हो रही है। जब राहत नहीं मिली तो मरीजों ने हंगामा काटा।
अल्ट्रासाउंड कराने की मांग की। फिर भी चिकित्सक साहब नहीं आए। आखिर में सभी मरीज बिना जांच कराए ही लौट गए। मरीजों का कहना है कि यह हालात अक्सर बने रहते हैं। कुछ मरीजों ने तो मजबूरी में बाहर से जांच करवाई। जिला अस्पताल में भर्ती मरीज व ओपीडी में आने वाले गंभीर मरीजों को चिकित्सकों ने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी।
सोमवार को मरीज आए उनको मंगलवार को जांच के लिए सुबह आठ बजे बुलाया गया। इससे तमाम मरीज सुबह अपने टाइम से पहुंच गए। अल्ट्रासाउंड कक्ष का ताला खुला लेकिन चिकित्सक न होने से मरीज डॉक्टर साहब के आने का इंतजार करते रहे। जब 11 बजा तो डॉक्टर साहब आए इससे मरीज केा जल्द जांच होने की उम्मीद जगी।
विज्ञापन
तब तक 45 मरीजों को टोकन दिए जा चुके थे। लेकिन डॉक्टर साहब कुछ देर रुके वह बिना कुछ बताए ही निकले गए। इससे मरीज में आक्रोश बढ़ता जा रहा था। इनका गुस्सा लाजिमी था। क्योंकि कोई मरीज दर्द से कराह रहा था तो किसी की सास फूल रही थी। लेकिन इसका असर डॉक्टर साहब पर नहीं पड़ा। इससे परेशान मरीज कमरे में जाते फिर जानकारी करते वापस आ जाते।
आखिर में मरीजों ने कक्ष के अंदर हो हंगामा काटा। अपनी बीमारी का हवाला देते हुए जांच कराने की मांग की। फिर भी चिकित्सक नहीं आए। दो बजे तक इक्का दुक्का ही अल्ट्रासाउंड हुए। सभी मरीज डॉक्टर की मनमानी के चलते वापस चले गए। मरीजों का कहना है यह हालात रोजाना के बने हुए है।
सुबह से हूं बैठा
यहां पर न तो नंबर लगता है न ही सही जांच होती है। बिना नंबर वाले मरीज जांच कराकर चले जाते है। गरीब यहां पर भटकते रहते हैं। श्वांस का मरीज हूं, आठ बजे से बैठा हूं। अभी तक डॉक्टर नहीं आए है। डेढ़ बज गया है।
-गोपाल सिंह तोमर
जाना पड़ा वापस
पेट में दिक्कत थी। डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। सोमवार को आए तो मंगलवार को बुलाया गया। सुबह आठ बजे से अपनी बारी का इंतजार कर रहा हूं। डॉक्टर न होने की वजह से आज वापस जाना पड़ रहा है।
-रामशंकर
कम नहीं है मुसीबत
जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराना किसी मुसीबत से कम नहीं है। यहां के चिकित्सक और स्टाफ अक्सर मनमानी करते है। अगर रुपये दे दो तो तुरंत अल्ट्रासाउंड हो जाता है। वरना लाइन में लगे रहो, कोई पूछने वाला नहीं है।
-गोमती
करनी पड़ रही मशक्कत
जिला अस्पताल में सुविधाएं मिलना बहुत मुश्किल हो रहा है। डॉक्टर अल्ट्रासाउंड तो लिख देते है लेकिन इसको जांच कराने में कड़ी मशक्कत होती है। मंगलवार को जब नंबर के बाद भी जांच नहीं हुई तो मजबूरी में बाहर जाना पड़ा।
-लल्लीश्री
वर्जन
दिखवाया जाएगा
जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को सभी सुविधाएं दी जा रही हैं। अगर अल्ट्रासाउंड कराने मेें दिक्कत आ रही है तो इसे दिखवाया जाएगा।
-डॉ. अनिल अग्रवाल, सीएमएस
विज्ञापन
सीतापुर। जिला अस्पताल की अल्ट्रासाउंड सुविधा बेपटरी हो गई है। मंगलवार को सुबह मरीजों की लंबी-लंबी लाइनें लग गई। डॉक्टर साहब आए, कुछ देर रुके, उसके बाद मरीजों पर झल्लाते हुए निकले गए। बाहर बैठे मरीज साहब का इंतजार कर रहे थे। कोई सांस की बीमारी से परेशान था तो किसी के पेट में दर्द हो रही है। जब राहत नहीं मिली तो मरीजों ने हंगामा काटा।
अल्ट्रासाउंड कराने की मांग की। फिर भी चिकित्सक साहब नहीं आए। आखिर में सभी मरीज बिना जांच कराए ही लौट गए। मरीजों का कहना है कि यह हालात अक्सर बने रहते हैं। कुछ मरीजों ने तो मजबूरी में बाहर से जांच करवाई। जिला अस्पताल में भर्ती मरीज व ओपीडी में आने वाले गंभीर मरीजों को चिकित्सकों ने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी।
विज्ञापन
सोमवार को मरीज आए उनको मंगलवार को जांच के लिए सुबह आठ बजे बुलाया गया। इससे तमाम मरीज सुबह अपने टाइम से पहुंच गए। अल्ट्रासाउंड कक्ष का ताला खुला लेकिन चिकित्सक न होने से मरीज डॉक्टर साहब के आने का इंतजार करते रहे। जब 11 बजा तो डॉक्टर साहब आए इससे मरीज केा जल्द जांच होने की उम्मीद जगी।
विज्ञापन
तब तक 45 मरीजों को टोकन दिए जा चुके थे। लेकिन डॉक्टर साहब कुछ देर रुके वह बिना कुछ बताए ही निकले गए। इससे मरीज में आक्रोश बढ़ता जा रहा था। इनका गुस्सा लाजिमी था। क्योंकि कोई मरीज दर्द से कराह रहा था तो किसी की सास फूल रही थी। लेकिन इसका असर डॉक्टर साहब पर नहीं पड़ा। इससे परेशान मरीज कमरे में जाते फिर जानकारी करते वापस आ जाते।
आखिर में मरीजों ने कक्ष के अंदर हो हंगामा काटा। अपनी बीमारी का हवाला देते हुए जांच कराने की मांग की। फिर भी चिकित्सक नहीं आए। दो बजे तक इक्का दुक्का ही अल्ट्रासाउंड हुए। सभी मरीज डॉक्टर की मनमानी के चलते वापस चले गए। मरीजों का कहना है यह हालात रोजाना के बने हुए है।
सुबह से हूं बैठा
यहां पर न तो नंबर लगता है न ही सही जांच होती है। बिना नंबर वाले मरीज जांच कराकर चले जाते है। गरीब यहां पर भटकते रहते हैं। श्वांस का मरीज हूं, आठ बजे से बैठा हूं। अभी तक डॉक्टर नहीं आए है। डेढ़ बज गया है।
-गोपाल सिंह तोमर
जाना पड़ा वापस
पेट में दिक्कत थी। डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। सोमवार को आए तो मंगलवार को बुलाया गया। सुबह आठ बजे से अपनी बारी का इंतजार कर रहा हूं। डॉक्टर न होने की वजह से आज वापस जाना पड़ रहा है।
-रामशंकर
कम नहीं है मुसीबत
जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराना किसी मुसीबत से कम नहीं है। यहां के चिकित्सक और स्टाफ अक्सर मनमानी करते है। अगर रुपये दे दो तो तुरंत अल्ट्रासाउंड हो जाता है। वरना लाइन में लगे रहो, कोई पूछने वाला नहीं है।
-गोमती
करनी पड़ रही मशक्कत
जिला अस्पताल में सुविधाएं मिलना बहुत मुश्किल हो रहा है। डॉक्टर अल्ट्रासाउंड तो लिख देते है लेकिन इसको जांच कराने में कड़ी मशक्कत होती है। मंगलवार को जब नंबर के बाद भी जांच नहीं हुई तो मजबूरी में बाहर जाना पड़ा।
-लल्लीश्री
वर्जन
दिखवाया जाएगा
जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को सभी सुविधाएं दी जा रही हैं। अगर अल्ट्रासाउंड कराने मेें दिक्कत आ रही है तो इसे दिखवाया जाएगा।
-डॉ. अनिल अग्रवाल, सीएमएस