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बच्चों का शैक्षिक मूल्यांकन बनेगा विद्यालय की पहचान
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प्रत्येक परिषदीय विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता की पहचान अब उसकी ग्रेडिंग से ही होगी। यह ग्रेडिंग नौनिहालों के अर्जित ज्ञान के आधार पर दी जाएगी।
इससे एक तो नौनिहालों के शैक्षिक स्तर का पता चलेगा, वहीं शिक्षकों ने बच्चों को पढ़ाने पर कितना परिश्रम किया है, इसकी भी हकीकत सामने आ जाएगी। इसके लिए बच्चों की एक परीक्षा कराई जाएगी।
इस परीक्षा में स्कूल के शिक्षकों की कोई भूमिका नहीं होगी। प्रश्नपत्र सीधे शासन से उपलब्ध कराए जाएंगे। इसको लेकर जल्द ही परीक्षा की तिथि घोषित की जाएगी।
ग्रेडिंग तय होने के बाद बीएसए उस विद्यालय पर विशेष फोकस करके उच्चस्तरीय श्रेणी में लाने का प्रयास करेंगे। परिषदीय विद्यालय की पहचान उसके नाम से है।
यहां पढ़ने वाले बच्चे गुरुजी से कितना सीखते हैं, इसको जानने का कोई तरीका नहीं है। इससे शिक्षक व नौनिहाल के शैक्षिक स्तर का पता नहीं चल पाता है। इन सब समस्याओं को देखते हुए शासन ने ग्रेडिंग फॉर्मूला लागू कर दिया है।
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इसके तहत प्रत्येक विद्यालय को एक ग्रेड दिया जाएगा। यह ग्रेड स्कूल में पढ़ने वाले नौनिहालों के शैक्षिक स्तर को परखने के बाद मिलेगा। इसके लिए एक परीक्षा कराई जाएगी। यह परीक्षा केवल एक दिन की होगी।
इसमें नौनिहाल अपने ज्ञान का प्रदर्शन करेंगे। फिर इन उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन होगा। इस मूल्यांकन के बाद स्कूल की ग्रेडिंग की जाएगी।
इससे एक तो नौनिहाल के ज्ञान का पता चलेगा, वहीं गुरुजी ने बच्चों को पढ़ाने में कितनी मेहनत की है, इसका भी आसानी से पता चल सकेगा। इसको लेकर जल्द ही परीक्षा होगी। उसके बाद ही ग्रेडिंग लागू होगी।
जिला समन्वयक प्रशिक्षण सत्येंद्र मिश्रा ने बताया कि इस परीक्षा में केवल बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। नौनिहाल हां व नहीं में इनका उत्तर देंगे। कक्षा एक व दो में 30 प्रश्न होंगे जिनके लिए 50 मिनट का समय दिया गया है।
इसी प्रकार कक्षा तीन में 40, 4 व 5 में 40 प्रश्न होंगे। इनका समय 90 मिनट होगा। कक्षा 6, 7 व 8 में 50 प्रश्न होंगे जिनके लिए 120 मिनट का समय दिया गया है।
बीएसए अजय कुमार ने बताया कि हर विद्यालय की ग्रेडिंग की जाएगी। इससे विद्यालय की गुणवत्ता का आकलन हो सकेगा। इसको लेकर तैयारियां चल रही हैं। इससे विद्यालय की कमियां सामने आएंगी जिनको दूर किया जा सकेगा।
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इससे एक तो नौनिहालों के शैक्षिक स्तर का पता चलेगा, वहीं शिक्षकों ने बच्चों को पढ़ाने पर कितना परिश्रम किया है, इसकी भी हकीकत सामने आ जाएगी। इसके लिए बच्चों की एक परीक्षा कराई जाएगी।
इस परीक्षा में स्कूल के शिक्षकों की कोई भूमिका नहीं होगी। प्रश्नपत्र सीधे शासन से उपलब्ध कराए जाएंगे। इसको लेकर जल्द ही परीक्षा की तिथि घोषित की जाएगी।
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ग्रेडिंग तय होने के बाद बीएसए उस विद्यालय पर विशेष फोकस करके उच्चस्तरीय श्रेणी में लाने का प्रयास करेंगे। परिषदीय विद्यालय की पहचान उसके नाम से है।
यहां पढ़ने वाले बच्चे गुरुजी से कितना सीखते हैं, इसको जानने का कोई तरीका नहीं है। इससे शिक्षक व नौनिहाल के शैक्षिक स्तर का पता नहीं चल पाता है। इन सब समस्याओं को देखते हुए शासन ने ग्रेडिंग फॉर्मूला लागू कर दिया है।
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इसके तहत प्रत्येक विद्यालय को एक ग्रेड दिया जाएगा। यह ग्रेड स्कूल में पढ़ने वाले नौनिहालों के शैक्षिक स्तर को परखने के बाद मिलेगा। इसके लिए एक परीक्षा कराई जाएगी। यह परीक्षा केवल एक दिन की होगी।
इसमें नौनिहाल अपने ज्ञान का प्रदर्शन करेंगे। फिर इन उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन होगा। इस मूल्यांकन के बाद स्कूल की ग्रेडिंग की जाएगी।
इससे एक तो नौनिहाल के ज्ञान का पता चलेगा, वहीं गुरुजी ने बच्चों को पढ़ाने में कितनी मेहनत की है, इसका भी आसानी से पता चल सकेगा। इसको लेकर जल्द ही परीक्षा होगी। उसके बाद ही ग्रेडिंग लागू होगी।
जिला समन्वयक प्रशिक्षण सत्येंद्र मिश्रा ने बताया कि इस परीक्षा में केवल बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। नौनिहाल हां व नहीं में इनका उत्तर देंगे। कक्षा एक व दो में 30 प्रश्न होंगे जिनके लिए 50 मिनट का समय दिया गया है।
इसी प्रकार कक्षा तीन में 40, 4 व 5 में 40 प्रश्न होंगे। इनका समय 90 मिनट होगा। कक्षा 6, 7 व 8 में 50 प्रश्न होंगे जिनके लिए 120 मिनट का समय दिया गया है।
बीएसए अजय कुमार ने बताया कि हर विद्यालय की ग्रेडिंग की जाएगी। इससे विद्यालय की गुणवत्ता का आकलन हो सकेगा। इसको लेकर तैयारियां चल रही हैं। इससे विद्यालय की कमियां सामने आएंगी जिनको दूर किया जा सकेगा।