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शिव मंदिर के सामने लावारिस मिला नवजात बच्चा
Updated Sun, 19 Aug 2018 01:32 AM IST
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ढेढुराई गांव के रामदत्त को पूजा करने जाते समय सुनाई दी बच्चे के रोने की आवाज
खैराबाद (सीतापुर)। जन्म देने वाली मां ने अपने नवजात बच्चे को ढेढुराई गांव में शिव मंदिर के सामने मवेशियों के बाड़े में लावारिस छोड़ दिया। शिव मंदिर में भोर पहर पूजा करने जा रहे गांव के रामदत्त ने बच्चे की रोने की आवाज सुनी तो कौतुहल वश बाड़े के अंदर पहुंचा। अंदर तख्त पर एक नवजात पड़ा रो रहा था।
यह देख रामदत्त ने इधर-उधर आवाज लगाई पर कोई नजर नहीं आया। इस पर रामदत्त नवजात बच्चे को उठाकर घर ले आया और पुलिस को सूचित किया। बच्चा दो या तीन दिन का बताया जा रहा है। रामदत्त की पत्नी मालती ने बच्चे का पालन-पोषण करने की इच्छा जताई। पुलिस ने नवजात को मालती के सुपुर्द कर दिया है।
थानाक्षेत्र के ढेढुराई गांव में रहने वाले रामदत्त शनिवार की सुबह करीब 5:30 बजे प्राचीन शिव मंदिर में पूजा करने जा रहा था। शिव मंदिर के सामने रामदत्त ने एक झोपड़ीनुमा जानवरों का बाड़ा बना रखा है। इसमें वह अपने जानवर बांधता है। बाड़े के अंदर एक लकड़ी का तख्त भी पड़ा है।
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रामदत्त जब बाड़े के करीब से निकल रहा था तो उन्हें किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। इतनी सुबह बच्चे के रोने की आवाज सुनकर वह ठिठक गया। बाड़े के अंदर पहुंचकर देखा तो तख्त पर कपड़े में लिपटा एक नवजात रो रहा था।
कुछ देर तक रामदत्त ने आसपास पुकार लगाई। जब कोई नहीं आया तो वह बच्चे को अपने घर ले आए। सूचना पर पुलिस भी गांव पहुंच गई। रामदत्त की पत्नी मालती ने बच्चे को अपनाने की बात कही। एसएसआई अशोक कुमार सिंह ने बताया कि नवजात बच्चा मालती के सुपुर्द कर दिया गया है।
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खैराबाद (सीतापुर)। जन्म देने वाली मां ने अपने नवजात बच्चे को ढेढुराई गांव में शिव मंदिर के सामने मवेशियों के बाड़े में लावारिस छोड़ दिया। शिव मंदिर में भोर पहर पूजा करने जा रहे गांव के रामदत्त ने बच्चे की रोने की आवाज सुनी तो कौतुहल वश बाड़े के अंदर पहुंचा। अंदर तख्त पर एक नवजात पड़ा रो रहा था।
यह देख रामदत्त ने इधर-उधर आवाज लगाई पर कोई नजर नहीं आया। इस पर रामदत्त नवजात बच्चे को उठाकर घर ले आया और पुलिस को सूचित किया। बच्चा दो या तीन दिन का बताया जा रहा है। रामदत्त की पत्नी मालती ने बच्चे का पालन-पोषण करने की इच्छा जताई। पुलिस ने नवजात को मालती के सुपुर्द कर दिया है।
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थानाक्षेत्र के ढेढुराई गांव में रहने वाले रामदत्त शनिवार की सुबह करीब 5:30 बजे प्राचीन शिव मंदिर में पूजा करने जा रहा था। शिव मंदिर के सामने रामदत्त ने एक झोपड़ीनुमा जानवरों का बाड़ा बना रखा है। इसमें वह अपने जानवर बांधता है। बाड़े के अंदर एक लकड़ी का तख्त भी पड़ा है।
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रामदत्त जब बाड़े के करीब से निकल रहा था तो उन्हें किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। इतनी सुबह बच्चे के रोने की आवाज सुनकर वह ठिठक गया। बाड़े के अंदर पहुंचकर देखा तो तख्त पर कपड़े में लिपटा एक नवजात रो रहा था।
कुछ देर तक रामदत्त ने आसपास पुकार लगाई। जब कोई नहीं आया तो वह बच्चे को अपने घर ले आए। सूचना पर पुलिस भी गांव पहुंच गई। रामदत्त की पत्नी मालती ने बच्चे को अपनाने की बात कही। एसएसआई अशोक कुमार सिंह ने बताया कि नवजात बच्चा मालती के सुपुर्द कर दिया गया है।