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कोरम के अभाव में औंधे मुंह गिरा अविश्वास, जितेंद्र की कुर्सी बरकरार
Updated Wed, 30 May 2018 11:31 PM IST
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लंबी उठापटक के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव खारिज
सीतापुर। जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ पेश किया गया अविश्वास प्रस्ताव लंबी उठापटक और सियासी ड्रामे के बाद बुधवार को औंधे मुंह गिर गया। प्रस्ताव के परीक्षण में विपक्ष अपेक्षित संख्या बल नहीं जुटा सका जिसके बाद हाईकोर्ट से नामित न्यायाधिकारी हितेंद्र हरी ने प्रक्रिया खारिज कर दी।
कार्रवाई की रिपोर्ट न्यायाधिकारी द्वारा हाईकोर्ट को सौंपी जाएगी। उधर, अविश्वास प्रस्ताव धड़ाम होने से जिला पंचायत अध्यक्ष जितेंद्र यादव का कुर्सी पर कब्जा बरकरार रहने पर उनके समर्थक झूम उठे। सीतापुर में जितेंद्र यादव जिला पंचायत अध्यक्ष हैं।
भाजपा नेता शिव कुमार गुप्ता की अगुवाई में डीडीसी सीमा गुप्ता ने पिछले दिनों डीएम शीतल वर्मा को हलफनामा देकर 48 सदस्यों के समर्थन का दावा करते हुए अविश्वास लाने की इजाजत मांगी थी। डीएम ने जांच के बाद अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 2 मई की तारीख निर्धारित की थी।
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प्रक्रिया सुबह 11 बजे से शुरू होनी थी लेकिन नामित लघु वाद न्यायाधीश सुबह 11:30 बजे तक भी नही पहुंचीं। हालांकि लघु वाद न्यायाधीश की जगह अपर जिला जज विश्वनाथ करीब 11:32 पर जिला पंचायत पहुंचे। इस पर प्रस्ताव लाने वाले खेमे द्वारा देरी का हवाला देते हुए आपत्ति दर्ज कराई गई जिस पर अपर जिला जज ने प्रक्रिया के लिए 16 मई की अगली तारीख निर्धारित कर दी।
दूसरी तारीख पर भी नामित न्यायाधिकारी नहीं पहुंचे जिसके बाद कयास लगाए जाने लगे कि अपेक्षित सदस्य संख्या न जुटा पाने के कारण इस कुल जोर आजमाइश के अगुवा शिव कुमार गुप्ता अंदरखाने इस जुगत में लगे हैं कि यह बैठक फिलहाल टलती रहे।
इसी बीच ऊहापोह में फंसे जिला पंचायत अध्यक्ष जितेंद्र यादव ने आखिरकार उच्च न्यायालय का रुख किया जहां पूरे मामले की सुनवाई के बाद जिले के न्याय विभाग से इतर सीधे एक न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति कर उच्च न्यायालय लखनऊ की डिवीजन बेंच ने नई व्यवस्था दे दी।
इसके लिए अपर सत्र न्यायाधीश व बतौर ओएसडी उच्च न्यायालय में ही तैनात हितेंद्र हरी को नियुक्त कर 30 मई को बैठक कराने और कार्यवाही से 31 मई को न्यायालय को अवगत कराने के आदेश दिए गए। बुधवार को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के बीच जिला पंचायत दफ्तर के बाहर सुबह 11 बजे से गहमा-गहमी नजर आने लगी।
डीडीसी मेंबर भी पहुंचने लगे। लेकिन दोपहर 12:25 बजे तक प्रस्ताव लाने वाला खेमा सदस्यों की अपेक्षित संख्या नहीं जुटा सका। न्यायाधिकारी ने संख्या बल जानने के लिए मतदान कराया जिसमें कुल 79 मेंबरों में से अविश्वास के पक्ष में महज 25 सदस्यों ने मत दिए। लिहाजा, संख्या बल के अभाव को देखते हुए न्यायाधिकारी ने अविश्वास प्रक्रिया खारिज कर दी।
न्यायाधिकारी हितेंद्र हरी ने बताया कि कार्रवाई की रिपोर्ट गुरुवार को हाईकोर्ट को सौंपेंगे। अविश्वास प्रस्ताव पास नहीं होने से शिव कुमार गुप्ता का खेमा मायूस नजर आया जबकि अध्यक्ष जितेंद्र यादव का खेमा झूम उठा।
अध्यक्ष जितेंद्र यादव के बाहर निकलते ही समर्थकों ने उन्हें कंधे पर उठा लिया और जमकर नारेबाजी की। इस मौके पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष महेंद्र वर्मा, पूर्व विधायक रामपाल यादव, सपा जिलाध्यक्ष छत्रपाल यादव व पूर्व जिलाध्यक्ष सपा शमीम कौसर सिद्दीकी आदि मौजूद रहे।
इनसेट:
अपनी ही पार्टी की फजीहत कराने में माहिर हैं शिव कुमार
जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने में अहम किरदार अदा करने वाले शिव कुमार गुप्ता अपनी ही पार्टी की फजीहत कराने में माहिर हैं। इनकी छवि सत्ता में रहकर मलाई खाने की नीयत रखने वाले नेता के तौर पर जगजाहिर है।
दरअसल, बसपा शासन में नीले झंडे के नीचे रहने के दौरान शिव कुमार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे जिससे बसपा की खूब किरकिरी हुई। फिर निजाम बदला तो यह साइकिल पर सवार हो गए। सपा हाईकमान ने 2017 के विधानसभा चुनाव में शिव कुमार को सीतापुर की सेवता सीट से टिकट दिया लेकिन वह चुनाव हार गए।
जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भी सपा का टिकट पाने के बावजूद अपनी पत्नी को जीत नहीं दिला पाए। सपा सरकार में जिला पंचायत अध्यक्षी का चुनाव गंवाकर इन्होंने सपा की फजीहत कराई। अब भाजपा सरकार में पाला बदलकर सत्ता के साथ आए जिसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कराया लेकिन इस बार भी नाकाम रहे और भाजपा की फजीहत करा दी।
... बागी जितेंद्र के खेमे में लगे अखिलेश यादव जिंदाबाद के नारे
जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में तत्कालीन सपा सरकार ने शिव कुमार गुप्ता की पत्नी सीमा को पार्टी प्रत्याशी घोषित किया था जिसके बाद विधायक रामपाल यादव ने पार्टी से बगावत कर अपने बेटे जितेंद्र यादव को न सिर्फ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ाया बल्कि सपा उम्मीदवार को करारी शिकस्त देकर जीत दर्ज की थी।
वर्तमान में पूर्व विधायक रामपाल यादव बसपाई हो चुके हैं लेकिन बुधवार को अविश्वास प्रस्ताव गिरने पर जिला पंचायत के बाहर अध्यक्ष जितेंद्र के समर्थकों ने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव जिंदाबाद के नारे लगाए। वहीं, इस चुनाव में सपा और बसपा एकजुट होकर जितेंद्र के पक्ष में खड़ी नजर आई।
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सीतापुर। जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ पेश किया गया अविश्वास प्रस्ताव लंबी उठापटक और सियासी ड्रामे के बाद बुधवार को औंधे मुंह गिर गया। प्रस्ताव के परीक्षण में विपक्ष अपेक्षित संख्या बल नहीं जुटा सका जिसके बाद हाईकोर्ट से नामित न्यायाधिकारी हितेंद्र हरी ने प्रक्रिया खारिज कर दी।
कार्रवाई की रिपोर्ट न्यायाधिकारी द्वारा हाईकोर्ट को सौंपी जाएगी। उधर, अविश्वास प्रस्ताव धड़ाम होने से जिला पंचायत अध्यक्ष जितेंद्र यादव का कुर्सी पर कब्जा बरकरार रहने पर उनके समर्थक झूम उठे। सीतापुर में जितेंद्र यादव जिला पंचायत अध्यक्ष हैं।
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भाजपा नेता शिव कुमार गुप्ता की अगुवाई में डीडीसी सीमा गुप्ता ने पिछले दिनों डीएम शीतल वर्मा को हलफनामा देकर 48 सदस्यों के समर्थन का दावा करते हुए अविश्वास लाने की इजाजत मांगी थी। डीएम ने जांच के बाद अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 2 मई की तारीख निर्धारित की थी।
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प्रक्रिया सुबह 11 बजे से शुरू होनी थी लेकिन नामित लघु वाद न्यायाधीश सुबह 11:30 बजे तक भी नही पहुंचीं। हालांकि लघु वाद न्यायाधीश की जगह अपर जिला जज विश्वनाथ करीब 11:32 पर जिला पंचायत पहुंचे। इस पर प्रस्ताव लाने वाले खेमे द्वारा देरी का हवाला देते हुए आपत्ति दर्ज कराई गई जिस पर अपर जिला जज ने प्रक्रिया के लिए 16 मई की अगली तारीख निर्धारित कर दी।
दूसरी तारीख पर भी नामित न्यायाधिकारी नहीं पहुंचे जिसके बाद कयास लगाए जाने लगे कि अपेक्षित सदस्य संख्या न जुटा पाने के कारण इस कुल जोर आजमाइश के अगुवा शिव कुमार गुप्ता अंदरखाने इस जुगत में लगे हैं कि यह बैठक फिलहाल टलती रहे।
इसी बीच ऊहापोह में फंसे जिला पंचायत अध्यक्ष जितेंद्र यादव ने आखिरकार उच्च न्यायालय का रुख किया जहां पूरे मामले की सुनवाई के बाद जिले के न्याय विभाग से इतर सीधे एक न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति कर उच्च न्यायालय लखनऊ की डिवीजन बेंच ने नई व्यवस्था दे दी।
इसके लिए अपर सत्र न्यायाधीश व बतौर ओएसडी उच्च न्यायालय में ही तैनात हितेंद्र हरी को नियुक्त कर 30 मई को बैठक कराने और कार्यवाही से 31 मई को न्यायालय को अवगत कराने के आदेश दिए गए। बुधवार को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के बीच जिला पंचायत दफ्तर के बाहर सुबह 11 बजे से गहमा-गहमी नजर आने लगी।
डीडीसी मेंबर भी पहुंचने लगे। लेकिन दोपहर 12:25 बजे तक प्रस्ताव लाने वाला खेमा सदस्यों की अपेक्षित संख्या नहीं जुटा सका। न्यायाधिकारी ने संख्या बल जानने के लिए मतदान कराया जिसमें कुल 79 मेंबरों में से अविश्वास के पक्ष में महज 25 सदस्यों ने मत दिए। लिहाजा, संख्या बल के अभाव को देखते हुए न्यायाधिकारी ने अविश्वास प्रक्रिया खारिज कर दी।
न्यायाधिकारी हितेंद्र हरी ने बताया कि कार्रवाई की रिपोर्ट गुरुवार को हाईकोर्ट को सौंपेंगे। अविश्वास प्रस्ताव पास नहीं होने से शिव कुमार गुप्ता का खेमा मायूस नजर आया जबकि अध्यक्ष जितेंद्र यादव का खेमा झूम उठा।
अध्यक्ष जितेंद्र यादव के बाहर निकलते ही समर्थकों ने उन्हें कंधे पर उठा लिया और जमकर नारेबाजी की। इस मौके पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष महेंद्र वर्मा, पूर्व विधायक रामपाल यादव, सपा जिलाध्यक्ष छत्रपाल यादव व पूर्व जिलाध्यक्ष सपा शमीम कौसर सिद्दीकी आदि मौजूद रहे।
इनसेट:
अपनी ही पार्टी की फजीहत कराने में माहिर हैं शिव कुमार
जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने में अहम किरदार अदा करने वाले शिव कुमार गुप्ता अपनी ही पार्टी की फजीहत कराने में माहिर हैं। इनकी छवि सत्ता में रहकर मलाई खाने की नीयत रखने वाले नेता के तौर पर जगजाहिर है।
दरअसल, बसपा शासन में नीले झंडे के नीचे रहने के दौरान शिव कुमार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे जिससे बसपा की खूब किरकिरी हुई। फिर निजाम बदला तो यह साइकिल पर सवार हो गए। सपा हाईकमान ने 2017 के विधानसभा चुनाव में शिव कुमार को सीतापुर की सेवता सीट से टिकट दिया लेकिन वह चुनाव हार गए।
जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भी सपा का टिकट पाने के बावजूद अपनी पत्नी को जीत नहीं दिला पाए। सपा सरकार में जिला पंचायत अध्यक्षी का चुनाव गंवाकर इन्होंने सपा की फजीहत कराई। अब भाजपा सरकार में पाला बदलकर सत्ता के साथ आए जिसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कराया लेकिन इस बार भी नाकाम रहे और भाजपा की फजीहत करा दी।
... बागी जितेंद्र के खेमे में लगे अखिलेश यादव जिंदाबाद के नारे
जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में तत्कालीन सपा सरकार ने शिव कुमार गुप्ता की पत्नी सीमा को पार्टी प्रत्याशी घोषित किया था जिसके बाद विधायक रामपाल यादव ने पार्टी से बगावत कर अपने बेटे जितेंद्र यादव को न सिर्फ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ाया बल्कि सपा उम्मीदवार को करारी शिकस्त देकर जीत दर्ज की थी।
वर्तमान में पूर्व विधायक रामपाल यादव बसपाई हो चुके हैं लेकिन बुधवार को अविश्वास प्रस्ताव गिरने पर जिला पंचायत के बाहर अध्यक्ष जितेंद्र के समर्थकों ने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव जिंदाबाद के नारे लगाए। वहीं, इस चुनाव में सपा और बसपा एकजुट होकर जितेंद्र के पक्ष में खड़ी नजर आई।