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एमडीएम के हर माह भरे जाएंगे दस नमूने
Updated Mon, 28 Aug 2017 12:04 AM IST
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हर माह लिए जाएंगे एमडीएम के दस नमूने
सीतापुर। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम अब हर माह परिषदीय विद्यालयों में चल रही मिड डे मील योजना की गुणवत्ता को परखेगी। यह टीम हर माह भोजन के दस नमूने लेगी।
इन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। इस बाबत बीएसए ने अभिहित अधिकारी को पत्र लिखा है। इसमें हर माह भोजन के दस नमूने लेने को कहा गया गया।
बीएसए अजय कुमार ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना के तहत बच्चों को पका पकाया भोजन दिया जाता है।
भोजन बनवाने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान व शिक्षकों की होती है। अक्सर शिकायतें मिला करती है कि बच्चों को दिया जाने वाला भोजन गुणवत्ता विहीन है।
भोजन में मानक नहीं पूरे किए जा रहे हैं। हाल ही में शाहजहांपुर में दूषित भोजन खाने से कई बच्चे बीमार हो गए थे। इस पर शासन ने भोजन की गुणवत्ता परखने का निर्देश दिया है। इसे लेकर बीएसए ने अभिहित अधिकारी को पत्र लिखा है।
इसमें कहा गया है कि बच्चों को हर हाल में स्वच्छ व पौष्टिक भोजन मिले, इसके लिए बराबर प्रयास किए जा रहे है। अब इस भोजन की गुणवत्ता परखी जाए।
उन्होंने खाद्य सुरक्षाधिकारियों से कहा है कि वह प्रत्येक माह इस योजना के कम से कम दस नमूने संग्रहित करें। इनकी प्रयोगशाला से जांच कराकर भोजन को परखा जाए। इस पर विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
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सीतापुर। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम अब हर माह परिषदीय विद्यालयों में चल रही मिड डे मील योजना की गुणवत्ता को परखेगी। यह टीम हर माह भोजन के दस नमूने लेगी।
इन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। इस बाबत बीएसए ने अभिहित अधिकारी को पत्र लिखा है। इसमें हर माह भोजन के दस नमूने लेने को कहा गया गया।
बीएसए अजय कुमार ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना के तहत बच्चों को पका पकाया भोजन दिया जाता है।
भोजन बनवाने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान व शिक्षकों की होती है। अक्सर शिकायतें मिला करती है कि बच्चों को दिया जाने वाला भोजन गुणवत्ता विहीन है।
भोजन में मानक नहीं पूरे किए जा रहे हैं। हाल ही में शाहजहांपुर में दूषित भोजन खाने से कई बच्चे बीमार हो गए थे। इस पर शासन ने भोजन की गुणवत्ता परखने का निर्देश दिया है। इसे लेकर बीएसए ने अभिहित अधिकारी को पत्र लिखा है।
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इसमें कहा गया है कि बच्चों को हर हाल में स्वच्छ व पौष्टिक भोजन मिले, इसके लिए बराबर प्रयास किए जा रहे है। अब इस भोजन की गुणवत्ता परखी जाए।
उन्होंने खाद्य सुरक्षाधिकारियों से कहा है कि वह प्रत्येक माह इस योजना के कम से कम दस नमूने संग्रहित करें। इनकी प्रयोगशाला से जांच कराकर भोजन को परखा जाए। इस पर विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
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