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शारदा उफनाई और घाघरा कर रही कटान
Updated Wed, 29 Aug 2018 12:17 AM IST
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गांजरी इलाके में तबाही मचाए हैं नदियां, रेउसा के कोनी गांव में घाघरा में बहे पांच घर
तंबौर/ रेउसा (सीतापुर)। जिले के गांजरी इलाके से होकर गुजरने वाली शारदा व घाघरा नदी इन दिनों गांजरी इलाके में तबाही मचाए हुए हैं। शारदा एक बार फिर से उफना चली है। इससे करीब 30 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। जबकि रजनापुर मार्ग समेत कई संपर्क मार्ग बाढ़ की जद में हैं।
उधर रेउसा इलाके में घाघरा नदी का कहर बरपा रहा है। नदी का पानी कम जरूर हुआ है, लेकिन तटीय इलाके में तेजी से कटान कर रहा है। कोनी गांव में सोमवार की रात पांच घर कटकर बह गए। ये सभी घर मिट्टी की दीवार व छप्पर के थे। जबकि तीन घर कटान के मुहाने पर खड़े हुए हैं।
उधर मंगलवार को शारदा व घाघरा बैराजों से पौने तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी और तबाही ला सकता है। बता दें कि शारदा नदी रतौली गांव को तो पहले से ही अपने चपेट में लिए हुए है। सोमवार की रात एक बार फिर से नदी उफना चली है। इससे नदी के पानी ने आबादी का रुख कर लिया है।
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रातोंरात नदी ने तंबौर इलाके के बसंतापुर, मोगलापुर, छतांगुर, चंदीभानपुर,बसंतापुर आदि करीब 30 गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है। तंबौर से रजनापुर ताने वाला मार्ग एक बार फिर से बाढ़ की चपेट में आ गया है। इससे रजनापुर क्षेत्र में रहने वाले बाशिंदों का आवागमन प्रभावित हो रहा है।
क्षेत्र के अधिकांश संपर्क मार्ग बाढ़ की चपेट में हैं। नदी का बढ़ता जलस्तर देख तंबौर क्षेत्र के बाशिंदों में हड़कंप मचा हुआ है। लोगों का कहना है कि अगर नदी का पानी इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो बाढ़ की स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
इधर रेउसा इलाके में घाघरा का पानी कम जरूर है। लेकिन वह तटीय इलाके में जबरदस्त कटान कर रहा है। खासकर कोनी गांव में नदी ने तबाही मचा रखी है। सोमवार की रात कोनी गांव के रामबिलास, बेचूलाल, संजय, प्यारे, मेवालाल के घर कटकर नदी की धार में समा गए।
हालांकि नदी के रुख को देखते हुए इन घरों में रहने वाले परिवारों ने घरों को पहले ही खाली कर दिया था। अब इस गांव में महज लालजी, जागेस्वर व राम प्रताप के घर ही बचे हैं। दहशत इस कदर है, कि इन परिवारों ने भी अपने घरों को खाली कर दिया है। गृहस्वामियों का कहना है कि किसी भी वक्त नदी गांव में बचे इन तीन घरों को भी निगल सकती है।
जहां नदियों की तबाही की तस्वीर इतनी भयावह है, वहीं आने वाले दिनों में भी राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। मंगलवार को शारदा व घाघरा बैराजों से 2,74,899 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। माना जा रहा है, कि इतनी मात्रा में छोड़ा गया पानी नदी के जलस्तर में तेजी से इजाफा करेगा। इससे बाढ़ के हालात अभी और बिगड़ेंगे।
18 गांवों का यातायात प्रभावित
तंबौर। इलाके करीब 18 गांव ऐसे हैं, जिनका कस्बा आने का प्रमुख मार्ग रजनापुर मार्ग ही है। इन दिनों यह मार्ग बाढ़ के पानी की चपेट में आ गया है। इससे चटेला, बरेला, सुजावलपुर, रोहिया, शिवपुर, माखू बेहड़, कतरा, रमुआपुर, बरछता आदि करीब 18 गांवों का आवागमन प्रभावित हो रहा है।
जानलेवा है रजनापुर मार्ग पर पानी आना
रजनापुर मार्ग का बाढ़ की चपेट में आना क्षेत्र के बाशिंदों के लिए जानलेवा साबित होता है। वजह यह है कि सड़क के दोनों तरफ ईंट-भट्ठे वालों ने काफी गहराई तक खुदाई करके मिट्टी निकाल ली है। ऐसे में जब यह मार्ग बाढ़ के पानी की चपेट में आता है, तब इस पर गुजरने वाले अगर जरा सी भी भटक गए या फिर बाढ़ के पानी की धार तेज हुई तो राहगीर की मौत निश्चित है।
क्योंकि सड़क से हटते ही वह दसियों फीट गहराई में पहुंच जाएगा। हाल ही में 19 अगस्त को इसी तरह की घटना सामने आई थी। जब तंबौर थाना क्षेत्र के ग्राम कटरा रायपुर निवासी हरीश कुमार का पुत्र बृजेश कुमार (16) व मनीराम का पुत्र महेश कुमार (15) घर से तंबौर कस्बा बाजार के लिये निकले थे। ये दोनों किशोर बाढ़ के पानी में सड़क से भटक गए और डूबने से दोनों की मौत हो गई थी।
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तंबौर/ रेउसा (सीतापुर)। जिले के गांजरी इलाके से होकर गुजरने वाली शारदा व घाघरा नदी इन दिनों गांजरी इलाके में तबाही मचाए हुए हैं। शारदा एक बार फिर से उफना चली है। इससे करीब 30 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। जबकि रजनापुर मार्ग समेत कई संपर्क मार्ग बाढ़ की जद में हैं।
उधर रेउसा इलाके में घाघरा नदी का कहर बरपा रहा है। नदी का पानी कम जरूर हुआ है, लेकिन तटीय इलाके में तेजी से कटान कर रहा है। कोनी गांव में सोमवार की रात पांच घर कटकर बह गए। ये सभी घर मिट्टी की दीवार व छप्पर के थे। जबकि तीन घर कटान के मुहाने पर खड़े हुए हैं।
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उधर मंगलवार को शारदा व घाघरा बैराजों से पौने तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी और तबाही ला सकता है। बता दें कि शारदा नदी रतौली गांव को तो पहले से ही अपने चपेट में लिए हुए है। सोमवार की रात एक बार फिर से नदी उफना चली है। इससे नदी के पानी ने आबादी का रुख कर लिया है।
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रातोंरात नदी ने तंबौर इलाके के बसंतापुर, मोगलापुर, छतांगुर, चंदीभानपुर,बसंतापुर आदि करीब 30 गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है। तंबौर से रजनापुर ताने वाला मार्ग एक बार फिर से बाढ़ की चपेट में आ गया है। इससे रजनापुर क्षेत्र में रहने वाले बाशिंदों का आवागमन प्रभावित हो रहा है।
क्षेत्र के अधिकांश संपर्क मार्ग बाढ़ की चपेट में हैं। नदी का बढ़ता जलस्तर देख तंबौर क्षेत्र के बाशिंदों में हड़कंप मचा हुआ है। लोगों का कहना है कि अगर नदी का पानी इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो बाढ़ की स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
इधर रेउसा इलाके में घाघरा का पानी कम जरूर है। लेकिन वह तटीय इलाके में जबरदस्त कटान कर रहा है। खासकर कोनी गांव में नदी ने तबाही मचा रखी है। सोमवार की रात कोनी गांव के रामबिलास, बेचूलाल, संजय, प्यारे, मेवालाल के घर कटकर नदी की धार में समा गए।
हालांकि नदी के रुख को देखते हुए इन घरों में रहने वाले परिवारों ने घरों को पहले ही खाली कर दिया था। अब इस गांव में महज लालजी, जागेस्वर व राम प्रताप के घर ही बचे हैं। दहशत इस कदर है, कि इन परिवारों ने भी अपने घरों को खाली कर दिया है। गृहस्वामियों का कहना है कि किसी भी वक्त नदी गांव में बचे इन तीन घरों को भी निगल सकती है।
जहां नदियों की तबाही की तस्वीर इतनी भयावह है, वहीं आने वाले दिनों में भी राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। मंगलवार को शारदा व घाघरा बैराजों से 2,74,899 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। माना जा रहा है, कि इतनी मात्रा में छोड़ा गया पानी नदी के जलस्तर में तेजी से इजाफा करेगा। इससे बाढ़ के हालात अभी और बिगड़ेंगे।
18 गांवों का यातायात प्रभावित
तंबौर। इलाके करीब 18 गांव ऐसे हैं, जिनका कस्बा आने का प्रमुख मार्ग रजनापुर मार्ग ही है। इन दिनों यह मार्ग बाढ़ के पानी की चपेट में आ गया है। इससे चटेला, बरेला, सुजावलपुर, रोहिया, शिवपुर, माखू बेहड़, कतरा, रमुआपुर, बरछता आदि करीब 18 गांवों का आवागमन प्रभावित हो रहा है।
जानलेवा है रजनापुर मार्ग पर पानी आना
रजनापुर मार्ग का बाढ़ की चपेट में आना क्षेत्र के बाशिंदों के लिए जानलेवा साबित होता है। वजह यह है कि सड़क के दोनों तरफ ईंट-भट्ठे वालों ने काफी गहराई तक खुदाई करके मिट्टी निकाल ली है। ऐसे में जब यह मार्ग बाढ़ के पानी की चपेट में आता है, तब इस पर गुजरने वाले अगर जरा सी भी भटक गए या फिर बाढ़ के पानी की धार तेज हुई तो राहगीर की मौत निश्चित है।
क्योंकि सड़क से हटते ही वह दसियों फीट गहराई में पहुंच जाएगा। हाल ही में 19 अगस्त को इसी तरह की घटना सामने आई थी। जब तंबौर थाना क्षेत्र के ग्राम कटरा रायपुर निवासी हरीश कुमार का पुत्र बृजेश कुमार (16) व मनीराम का पुत्र महेश कुमार (15) घर से तंबौर कस्बा बाजार के लिये निकले थे। ये दोनों किशोर बाढ़ के पानी में सड़क से भटक गए और डूबने से दोनों की मौत हो गई थी।