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पचीसा नहीं जा सकी स्वास्थ्य टीम
Updated Wed, 12 Jul 2017 11:30 PM IST
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टापू पर बीमार बच्चों को नहीं मिल सका इलाज
स्टीमर न दिए जाने से पचीसा नहीं जा सकी स्वास्थ्य विभाग की टीम
मदद के सरकारी दावे हो रहे फेल
संक्रामक रोग फैलने से कई बच्चे हैं बीमार
अमर उजाला ब्यूरो
रेउसा (सीतापुर)। घाघरा की लहरें इस कदर उफान मार रही हैं, कि सरकारी सिस्टम बेबस नजर आ रहा है। प्रशासन मदद के दावे तो जरूर कर रहा है, लेकिन उसका सारा सिस्टम शुरुआती दौर में ही फेल नजर आ रहा है। हालत यह है कि न तो अधिकारी बाढ़ पीड़ित गांव पहुंच पा रहे हैं और न ही सरकारी कर्मचारी। बुधवार को ऐसा ही हाल स्वास्थ्य विभाग की टीम का रहा। जो निकली तो पचीसा टापू पर जाने के लिए थी, लेकिन साधन न मिल पाने से स्वास्थ्य टीम टापू पर नहीं पहुंच पाई। दरअसल, कटान व जलभराव के कारण टापू पर संक्रामक रोग फैल रहा है। इस टापू पर 300 के करीब परिवार हैं। जिसमें 800 के आसपास बच्चे हैं। इन दिनों टापू पर रहने वाले बच्चे बीमार हैं। इन बच्चों को इलाज के लिए रेउसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाना पड़ेगा, लेकिन लहरों की आगे ग्रामीण बेबस हैं। ग्रामीणों को मदद की उम्मीद थी, तो सरकारी सिस्टम से, लेकिन वह भी फेल हो रहा है। बुधवार को डॉ. अरशद बेग के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम पचीसा टापू के लिए रवाना हुई। टीम अपने साधन से घाघरा के किनारे तक तो पहुंच गई, लेकिन टापू पर ले जाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं हो सकी। करीब दो घंटे तक चिकित्सकों की टीम इस इंतजार में बैठी रही, कि शायद प्रशासन की तरफ से कोई स्टीमर उपलब्ध हो जाए, जिससे वे पचीसा टापू पर पहुंचकर बीमार लोगों की जांच व इलाज कर सके। दो घंटे तक जब नदी पार करने का साधन नहीं मिला, तो चिकित्सकों की टीम वापस चली आई। डॉ. अरशद बेग कहते हैं, कि नाव चलाने वालों ने लहरों के बीच नाव ले जाने से साफ इन्कार कर दिया। अगर स्टीमर उपलब्ध हो जाता, तो स्वास्थ्य टीम जरूर पचीसा टापू पर जाती। मंगलवार को एसडीएम पचीसा टापू जाने के लिए निकले थे, लेकिन वे बुधवार तक टापू पर नहीं पहुंच सके। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम घाघरा पुल तक पहुंची, लेकिन वह भी टापू पर नहीं जा सकी। इससे साफ कि जब सरकारी सिस्टम उस टापू पर नहीं पहुंच पा रहा है, तब टापू पर बसे लोग कै से नदी पार करते होंगे।
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स्टीमर न दिए जाने से पचीसा नहीं जा सकी स्वास्थ्य विभाग की टीम
मदद के सरकारी दावे हो रहे फेल
संक्रामक रोग फैलने से कई बच्चे हैं बीमार
अमर उजाला ब्यूरो
रेउसा (सीतापुर)। घाघरा की लहरें इस कदर उफान मार रही हैं, कि सरकारी सिस्टम बेबस नजर आ रहा है। प्रशासन मदद के दावे तो जरूर कर रहा है, लेकिन उसका सारा सिस्टम शुरुआती दौर में ही फेल नजर आ रहा है। हालत यह है कि न तो अधिकारी बाढ़ पीड़ित गांव पहुंच पा रहे हैं और न ही सरकारी कर्मचारी। बुधवार को ऐसा ही हाल स्वास्थ्य विभाग की टीम का रहा। जो निकली तो पचीसा टापू पर जाने के लिए थी, लेकिन साधन न मिल पाने से स्वास्थ्य टीम टापू पर नहीं पहुंच पाई। दरअसल, कटान व जलभराव के कारण टापू पर संक्रामक रोग फैल रहा है। इस टापू पर 300 के करीब परिवार हैं। जिसमें 800 के आसपास बच्चे हैं। इन दिनों टापू पर रहने वाले बच्चे बीमार हैं। इन बच्चों को इलाज के लिए रेउसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाना पड़ेगा, लेकिन लहरों की आगे ग्रामीण बेबस हैं। ग्रामीणों को मदद की उम्मीद थी, तो सरकारी सिस्टम से, लेकिन वह भी फेल हो रहा है। बुधवार को डॉ. अरशद बेग के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम पचीसा टापू के लिए रवाना हुई। टीम अपने साधन से घाघरा के किनारे तक तो पहुंच गई, लेकिन टापू पर ले जाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं हो सकी। करीब दो घंटे तक चिकित्सकों की टीम इस इंतजार में बैठी रही, कि शायद प्रशासन की तरफ से कोई स्टीमर उपलब्ध हो जाए, जिससे वे पचीसा टापू पर पहुंचकर बीमार लोगों की जांच व इलाज कर सके। दो घंटे तक जब नदी पार करने का साधन नहीं मिला, तो चिकित्सकों की टीम वापस चली आई। डॉ. अरशद बेग कहते हैं, कि नाव चलाने वालों ने लहरों के बीच नाव ले जाने से साफ इन्कार कर दिया। अगर स्टीमर उपलब्ध हो जाता, तो स्वास्थ्य टीम जरूर पचीसा टापू पर जाती। मंगलवार को एसडीएम पचीसा टापू जाने के लिए निकले थे, लेकिन वे बुधवार तक टापू पर नहीं पहुंच सके। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम घाघरा पुल तक पहुंची, लेकिन वह भी टापू पर नहीं जा सकी। इससे साफ कि जब सरकारी सिस्टम उस टापू पर नहीं पहुंच पा रहा है, तब टापू पर बसे लोग कै से नदी पार करते होंगे।