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श्रमदान से ग्रामीण बना रहे रास्ता
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25 साल से समस्या की अनदेखी किए जाने से बारिनपुरवा के बाशिंदों ने खुद उठाया बीड़ा
रेउसा (सीतापुर)। पिछले 25 साल के दरम्यिान कई बार निजाम बदला। सिस्टम में भी तमाम बदलाव आए। मगर बारिनपुरवा के बाशिंदों की गांव के लिए रास्ता नहीं होने की प्रमुख समस्या जस की तस बनी रही। आवागमन की दुश्वारियों से जूझ रहे ग्रामीणों ने अब खुद रास्ता बनाने का बीड़ा उठाया है।
चंदा एकत्र कर श्रमदान से ग्रामीण रास्ता बनाने में जुट गए हैं। सड़क बनने से करीब 20 गांवों की 30 हजार आबादी का आवागमन सुलभ होगा। विकासखंड रेउसा क्षेत्र के बारिनपुरवा मजरा राजापुर कला तक आने-जाने का कोई रास्ता नहीं है। लिहाजा, गांव तक कोई चार पहिया वाहन पहुंचना किसी सपने सरीखा है।
बारिनपुरवा में रास्ता नहीं होने से सबसे बड़ी समस्या बाढ़ के दौरान होती है। बाढ़ आने पर गांव तक पहुंचने का एकमात्र साधन नाव ही होता है। इलाकाई नागरिकों के मुताबिक वर्ष 1992 में मारूबेहड़-चहलारी संपर्क मार्ग से बारिनपुरवा को जोड़ते हुए डामरीकृत सड़क निर्माण की मंजूरी हुई थी।
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मगर कार्यदायी संस्था की ओर से गांव के बाहर पुलिया तक ही सड़क बनाई गई। उसके आगे निर्माण कराया ही नहीं गया। यह पुलिया भी अर्धनिर्मित छोड़ दी गई। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और अफसरों से कई बार पुलिया का निर्माण पूरा कराते हुए गांव तक सड़क बनवाने की गुहार लगाई।
मगर ग्रामीणों की आवाज नक्कार खाने में तूती की मानिंद दबकर रह गई। धीरे-धीरे 25 साल गुजर गए। चुनाव के दौरान नेता सड़क बनवाने का वादा करते बाद में भूल जाते। सिस्टम की अनदेखी से आहत ग्रामीणों ने अपनी समस्या का निस्तारण खुद ही करने का फैसला किया।
ग्रामीण बलराम, ओमप्रकाश, बाबूराम, ओमकार, प्रकाश, मुबारक, रमेश, जलील, श्रीराम, हिरई, हरिश्चंद्र किशोर, राजू, अमीन, संदीप, इदरीश प्रमोद, खरगी, राजेश, मनोज, रफीक, शत्रोहन पैकरमा आदि ने आसपास गांवों में संपर्क कर चंदे के माध्यम से 40 हजार रुपये जमा किए। इसके बाद श्रमदान से रास्ता बनाने का काम शुरू किया।
ट्रैक्टर-ट्रॉली से मिट्टी ढुलाई कर पटान कराया जा रहा है। फिर ग्रामीण फावड़ों से मिट्टी बराबर करने के बाद उसे पीटकर ठोस बना रहे हैं। करीब एक हजार मीटर लंबा यह रास्ता बनने से लालपुर, लोधनपुरवा, भीखमपुरवा, रामीपुर, गोड़वा, धोबिन पुरवा, मातादीनपुरवा, हुसैनपुर खानी आदि करीब 20 गांवों की 30 हजार आबादी का आवागमन सुलभ हो जाएगा।
चुनाव बहिष्कार की ग्रामीणों ने दी चेतावनी
25 साल से बारिनपुरवा के लिए रास्ता नहीं होने की समस्या का निराकरण कराने के बजाय जनप्रतिनिधियों द्वारा अनदेखी करने के कारण ग्रामीण गुस्से में हैं। बारिनपुरवा के ग्रामीणों ने आने वाले लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने की चेतावनी शासन-प्रशासन को दी है।
बारिनपुरवा के करीब जहां पर रास्ता है, वहां जमीन काफी नीची होने से बाढ़ आने पर कटान का खतरा देखते हुए सड़क नहीं बनाई जा सकी है। पीडब्ल्यूडी के अफसरों से बात कर उस स्थान के करीब से होते हुए सड़क बनवाए जाने का प्रयास किया जा रहा है।
-ज्ञान तिवारी, विधायक सेवता
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रेउसा (सीतापुर)। पिछले 25 साल के दरम्यिान कई बार निजाम बदला। सिस्टम में भी तमाम बदलाव आए। मगर बारिनपुरवा के बाशिंदों की गांव के लिए रास्ता नहीं होने की प्रमुख समस्या जस की तस बनी रही। आवागमन की दुश्वारियों से जूझ रहे ग्रामीणों ने अब खुद रास्ता बनाने का बीड़ा उठाया है।
चंदा एकत्र कर श्रमदान से ग्रामीण रास्ता बनाने में जुट गए हैं। सड़क बनने से करीब 20 गांवों की 30 हजार आबादी का आवागमन सुलभ होगा। विकासखंड रेउसा क्षेत्र के बारिनपुरवा मजरा राजापुर कला तक आने-जाने का कोई रास्ता नहीं है। लिहाजा, गांव तक कोई चार पहिया वाहन पहुंचना किसी सपने सरीखा है।
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बारिनपुरवा में रास्ता नहीं होने से सबसे बड़ी समस्या बाढ़ के दौरान होती है। बाढ़ आने पर गांव तक पहुंचने का एकमात्र साधन नाव ही होता है। इलाकाई नागरिकों के मुताबिक वर्ष 1992 में मारूबेहड़-चहलारी संपर्क मार्ग से बारिनपुरवा को जोड़ते हुए डामरीकृत सड़क निर्माण की मंजूरी हुई थी।
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मगर कार्यदायी संस्था की ओर से गांव के बाहर पुलिया तक ही सड़क बनाई गई। उसके आगे निर्माण कराया ही नहीं गया। यह पुलिया भी अर्धनिर्मित छोड़ दी गई। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और अफसरों से कई बार पुलिया का निर्माण पूरा कराते हुए गांव तक सड़क बनवाने की गुहार लगाई।
मगर ग्रामीणों की आवाज नक्कार खाने में तूती की मानिंद दबकर रह गई। धीरे-धीरे 25 साल गुजर गए। चुनाव के दौरान नेता सड़क बनवाने का वादा करते बाद में भूल जाते। सिस्टम की अनदेखी से आहत ग्रामीणों ने अपनी समस्या का निस्तारण खुद ही करने का फैसला किया।
ग्रामीण बलराम, ओमप्रकाश, बाबूराम, ओमकार, प्रकाश, मुबारक, रमेश, जलील, श्रीराम, हिरई, हरिश्चंद्र किशोर, राजू, अमीन, संदीप, इदरीश प्रमोद, खरगी, राजेश, मनोज, रफीक, शत्रोहन पैकरमा आदि ने आसपास गांवों में संपर्क कर चंदे के माध्यम से 40 हजार रुपये जमा किए। इसके बाद श्रमदान से रास्ता बनाने का काम शुरू किया।
ट्रैक्टर-ट्रॉली से मिट्टी ढुलाई कर पटान कराया जा रहा है। फिर ग्रामीण फावड़ों से मिट्टी बराबर करने के बाद उसे पीटकर ठोस बना रहे हैं। करीब एक हजार मीटर लंबा यह रास्ता बनने से लालपुर, लोधनपुरवा, भीखमपुरवा, रामीपुर, गोड़वा, धोबिन पुरवा, मातादीनपुरवा, हुसैनपुर खानी आदि करीब 20 गांवों की 30 हजार आबादी का आवागमन सुलभ हो जाएगा।
चुनाव बहिष्कार की ग्रामीणों ने दी चेतावनी
25 साल से बारिनपुरवा के लिए रास्ता नहीं होने की समस्या का निराकरण कराने के बजाय जनप्रतिनिधियों द्वारा अनदेखी करने के कारण ग्रामीण गुस्से में हैं। बारिनपुरवा के ग्रामीणों ने आने वाले लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने की चेतावनी शासन-प्रशासन को दी है।
बारिनपुरवा के करीब जहां पर रास्ता है, वहां जमीन काफी नीची होने से बाढ़ आने पर कटान का खतरा देखते हुए सड़क नहीं बनाई जा सकी है। पीडब्ल्यूडी के अफसरों से बात कर उस स्थान के करीब से होते हुए सड़क बनवाए जाने का प्रयास किया जा रहा है।
-ज्ञान तिवारी, विधायक सेवता