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पानी घटा, लेकिन बाढ़ के हालात जस के तस
Updated Sun, 19 Aug 2018 01:48 AM IST
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रेउसा के भदम्मर पुरवा में दो घर कटे, कोनी गांव में घाघरा की कटान जारी
सीतापुर। जिले के गांजरी इलाके में घाघरा व शारदा नदियों का जलस्तर घटा है, लेकिन बाढ़ के हालात जस के तस बने हुए हैं। रेउसा के भदम्मर पुरवा में दो घर कटकर नदी में बह गए हैं। कोनी गांव में घाघरा नदी जबरदस्त कटान कर रही है। आबादी से लेकर खेतों तक कटान जारी है। हालांकि अभी तक बाढ़ का पानी हटा नहीं है।
जिले के तंबौर से लेकर रेउसा इलाके तक शारदा व घाघरा नदियां कहर बरपा रही हैं। करीब 109 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। शुक्रवार की रात से दोनों नदियों के जलस्तर में मामूली गिरावट आई है। लेकिन पानी इतना कम नहीं हुआ है, कि बाढ़ सिमट जाए। तंबौर इलाके में हालात जस के तस ही बने रहे।
करीब 50 गांव व प्रमुख संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी के चपेट में ही रहे। इतना जरूर हुआ है, कि मार्ग से पानी इतना कम हुआ है, कि लोगों का आवागमन हो सके। हालांकि क्षेत्र के लोग भयभीत हैं, उन्हें संदेह है कि नदी का जलस्तर अगर एकाएक बढ़ा तो स्थिति फिर विकराल हो सकती है।
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यही वजह है कि अभी मुसीबत को टलना नहीं माना जा रहा है। जहां तंबौर क्षेत्र का ऐसा हाल है, वहीं रेउसा इलाके में बाढ़ का कहर थमा नहीं है। पानी मामूली रूप से कम हुआ है, लेकिन इलाके भर में बाढ़ का पानी हिलोरे मार रहा है। भदम्मर पुरवा गांव में मेराज व इस्लाम के घर कटकर नदी में बह गए हैं। जबकि कोनी गांव में दहशत बरकरार है।
यहां पर नदी तेजी से कटान कर रही है। गांव के बाशिंदे पक्के मकानों को तोड़ रहे हैं और झोपड़ियों को उठाकर नाव पर ढो रहे हैं। कोनी गांव में पलायन बड़ी तेजी से जारी है। यहां के बाशिंदों को बसाने के लिए अभी कहीं भी स्थान चिन्हित नहीं किया गया है।
यही वजह है कि कोनी से पलायन करने के बाद पीड़ित आशियाने भर की जमीन तलाशते फिर रहे हैं। जहां इस इलाके में हायतौबा मची है, वहीं शनिवार को शारदा व घाघरा बैराजों से करीब 2,63,654 क्यूसके पानी छोड़ा गया है। इससे हालात और बिगड़ने की संभावना जताई जा रही है।
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सीतापुर। जिले के गांजरी इलाके में घाघरा व शारदा नदियों का जलस्तर घटा है, लेकिन बाढ़ के हालात जस के तस बने हुए हैं। रेउसा के भदम्मर पुरवा में दो घर कटकर नदी में बह गए हैं। कोनी गांव में घाघरा नदी जबरदस्त कटान कर रही है। आबादी से लेकर खेतों तक कटान जारी है। हालांकि अभी तक बाढ़ का पानी हटा नहीं है।
जिले के तंबौर से लेकर रेउसा इलाके तक शारदा व घाघरा नदियां कहर बरपा रही हैं। करीब 109 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। शुक्रवार की रात से दोनों नदियों के जलस्तर में मामूली गिरावट आई है। लेकिन पानी इतना कम नहीं हुआ है, कि बाढ़ सिमट जाए। तंबौर इलाके में हालात जस के तस ही बने रहे।
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करीब 50 गांव व प्रमुख संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी के चपेट में ही रहे। इतना जरूर हुआ है, कि मार्ग से पानी इतना कम हुआ है, कि लोगों का आवागमन हो सके। हालांकि क्षेत्र के लोग भयभीत हैं, उन्हें संदेह है कि नदी का जलस्तर अगर एकाएक बढ़ा तो स्थिति फिर विकराल हो सकती है।
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यही वजह है कि अभी मुसीबत को टलना नहीं माना जा रहा है। जहां तंबौर क्षेत्र का ऐसा हाल है, वहीं रेउसा इलाके में बाढ़ का कहर थमा नहीं है। पानी मामूली रूप से कम हुआ है, लेकिन इलाके भर में बाढ़ का पानी हिलोरे मार रहा है। भदम्मर पुरवा गांव में मेराज व इस्लाम के घर कटकर नदी में बह गए हैं। जबकि कोनी गांव में दहशत बरकरार है।
यहां पर नदी तेजी से कटान कर रही है। गांव के बाशिंदे पक्के मकानों को तोड़ रहे हैं और झोपड़ियों को उठाकर नाव पर ढो रहे हैं। कोनी गांव में पलायन बड़ी तेजी से जारी है। यहां के बाशिंदों को बसाने के लिए अभी कहीं भी स्थान चिन्हित नहीं किया गया है।
यही वजह है कि कोनी से पलायन करने के बाद पीड़ित आशियाने भर की जमीन तलाशते फिर रहे हैं। जहां इस इलाके में हायतौबा मची है, वहीं शनिवार को शारदा व घाघरा बैराजों से करीब 2,63,654 क्यूसके पानी छोड़ा गया है। इससे हालात और बिगड़ने की संभावना जताई जा रही है।