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खाली रेल भूमि में वर्कशॉप बनने से मिलेगा रोजगार
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खाली रेल भूमि में वर्कशॉप बनने से मिलेगा रोजगार
उसका बाजार(सिद्धार्थनगर)। जिले के उसका बाजार में रेलवे के पास उपलब्ध सौ एकड़ से अधिक भूमि पर वर्कशॉप स्थापित करने की मांग जोर पकड़ने लगा है। यहां रेल ट्रैक एवं स्टेशन समेत आवासीय परिसर से हटकर खाली पड़ी भूमि पर अतिक्रमण का भी खतरा बना रहता है। लोगों ने इस भूमि पर रेलवे वर्कशॉप स्थापित करने की मांग की है, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्राचीनतम कस्बों में शामिल उसका बाजार से पहले जलमार्ग से खाद्यान्न आदि का कोलकाता आदि स्थानों से व्यापार होता था। जब जलमार्ग से यातायात एवं व्यापार कम हुआ तो अंग्रेजी हुकूमत में वर्ष 1885 में इस कस्बे को रेल मार्ग से जोड़ दिया गया। बब गोरखपुर से उसका बाजार तक रेल लाइन बिछाई गई थी। इससे आगे नौगढ़, बढ़नी और गोंडा तक रेल लाइन नहीं थी। उसका बाजार से ही ट्रेन वापस हो जाती थी। यहां से ट्रेनों को वापस करने के लिए कई अतिरिक्त ट्रैक बनाए गए थे।
इन अतिरिक्त ट्रैकों को बनाने के लिए स्टेशन के आसपास सैकड़ों एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई थी। स्टेशन के दोनों तरफ स्थित भूमि वर्तमान में खाली एवं अप्रयुक्त है। करोंड़ों रुपये कीइस भूमि पर अतिक्रमण का खतरा भी रहता है। स्थानीय लोग इस भूमि पर तेल डिपो अथवा वर्कशॉप आदि का निर्माण कार्य कराने की मांग कर रहे हैं।
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समाजसेवी श्रीधर पांडेय ने कहा कि रेलवे द्वारा प्रोजेक्ट लगाए जाने से यहां के लोगों को पलायन के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। मनीष अग्रहरि ने कहा कि उसका बाजार कई गांवों और छोटे-छोटे कस्बों का केंद्र है, अगर यहां रेलवे व्यावसायिक केंद्र खोला जाए तो स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सकेगा। ग्राम प्रधान मनोज कुमार साहनी, युवा व्यापारी रिंकू अग्रहरि, सूरज मोदनवाल ने कहा कि उसका बाजार के ऐतिहासिक महत्व को बरकरार रखने के लिए यहां रेलवे को बुनियादी सुविधा बढ़ानी होगी, जो यहां के लोगों रोजगार उपलब्ध कराएगा। स्टेशन मास्टर उसका बाजार पीके सिंह ने बताया कि अभी तो इस तरह का कोई प्रोजेक्ट नहीं बना है। अगर स्थानीय लोग मांगपत्र देंगे तो उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा और वहां से ही यहां के खाली जमीन पर निर्माण संबंधी निर्णय होगा।
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उसका बाजार(सिद्धार्थनगर)। जिले के उसका बाजार में रेलवे के पास उपलब्ध सौ एकड़ से अधिक भूमि पर वर्कशॉप स्थापित करने की मांग जोर पकड़ने लगा है। यहां रेल ट्रैक एवं स्टेशन समेत आवासीय परिसर से हटकर खाली पड़ी भूमि पर अतिक्रमण का भी खतरा बना रहता है। लोगों ने इस भूमि पर रेलवे वर्कशॉप स्थापित करने की मांग की है, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्राचीनतम कस्बों में शामिल उसका बाजार से पहले जलमार्ग से खाद्यान्न आदि का कोलकाता आदि स्थानों से व्यापार होता था। जब जलमार्ग से यातायात एवं व्यापार कम हुआ तो अंग्रेजी हुकूमत में वर्ष 1885 में इस कस्बे को रेल मार्ग से जोड़ दिया गया। बब गोरखपुर से उसका बाजार तक रेल लाइन बिछाई गई थी। इससे आगे नौगढ़, बढ़नी और गोंडा तक रेल लाइन नहीं थी। उसका बाजार से ही ट्रेन वापस हो जाती थी। यहां से ट्रेनों को वापस करने के लिए कई अतिरिक्त ट्रैक बनाए गए थे।
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इन अतिरिक्त ट्रैकों को बनाने के लिए स्टेशन के आसपास सैकड़ों एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई थी। स्टेशन के दोनों तरफ स्थित भूमि वर्तमान में खाली एवं अप्रयुक्त है। करोंड़ों रुपये कीइस भूमि पर अतिक्रमण का खतरा भी रहता है। स्थानीय लोग इस भूमि पर तेल डिपो अथवा वर्कशॉप आदि का निर्माण कार्य कराने की मांग कर रहे हैं।
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समाजसेवी श्रीधर पांडेय ने कहा कि रेलवे द्वारा प्रोजेक्ट लगाए जाने से यहां के लोगों को पलायन के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। मनीष अग्रहरि ने कहा कि उसका बाजार कई गांवों और छोटे-छोटे कस्बों का केंद्र है, अगर यहां रेलवे व्यावसायिक केंद्र खोला जाए तो स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सकेगा। ग्राम प्रधान मनोज कुमार साहनी, युवा व्यापारी रिंकू अग्रहरि, सूरज मोदनवाल ने कहा कि उसका बाजार के ऐतिहासिक महत्व को बरकरार रखने के लिए यहां रेलवे को बुनियादी सुविधा बढ़ानी होगी, जो यहां के लोगों रोजगार उपलब्ध कराएगा। स्टेशन मास्टर उसका बाजार पीके सिंह ने बताया कि अभी तो इस तरह का कोई प्रोजेक्ट नहीं बना है। अगर स्थानीय लोग मांगपत्र देंगे तो उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा और वहां से ही यहां के खाली जमीन पर निर्माण संबंधी निर्णय होगा।