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कोई पत्नी तो कोई चालक, रसोईए और माली को चुनाव लड़ाने की तैयारी में
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महिला, चालक, रसोइए व माली भी बनेंगे दावेदार
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव : सीट आरक्षित होने पर डमी उम्मीदवारों की लगी होड़
जनसंपर्क करने में जुटे संभावित प्रत्याशी
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद
सिद्धार्थनगर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण सूची जारी होते ही ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य के कई मजबूत दावेदार सीट सुरक्षित होने के कारण दौड़ से बाहर हो गए। ऐसे लोग अब पद और साख बचाने के लिए पत्नी, चालक, रसोइया, माली आदि मातहतों को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहे हैं।
डुमरियागंज तहसील क्षेत्र की एक ग्राम पंचायत के पूर्व में ग्राम प्रधान रह चुके एक बुजुर्ग एक बार फिर ग्राम प्रधानी हासिल करने के लिए बीते छह माह से क्षेत्र में जोर शोर से जनसंपर्क में जुटे थे। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि इस बार उनकी ग्राम सभा अनारक्षित रहेगी। बुधवार को जारी सूची में ग्राम पंचायत महिला के लिए सुरक्षित कर दी गई। बुजुर्ग अब अपनी पत्नी का नाम आगे कर जनसंपर्क करने में जुट गए हैं। इटवा तहसील क्षेत्र की एक ग्राम पंचायत के प्रधान पद पर एक जन नेता का दबदबा रहता है। इस बार यह सीट अनुसूचित वर्ग के लिए सुरक्षित हो गई। जन नेता समर्थक इस सीट को सामान्य कराने के लिए आपत्ति दाखिल करने की तैयारी में हैं। इसके साथ ही अनुसूचित वर्ग का एक वफादार व्यक्ति भी तलाशा जा रहा है जिसे जितवा कर ग्राम प्रधानी चलाई जा सके। ऐसे ही कई बड़े दावेदार सीट आरक्षित होने पर खानसामा, रसोइया, चालक, घरेलू सहायक, सहायिका को प्रत्याशी बना कर अपना वर्चस्व कायम रखने की जुगत में जुटे हैं। पंचायत चुनावों के जानकार बताते हैं कि काफी अर्से तक जनसेवा और नेतागीरी कर जनता में पैठ बना चुके कई लोग सीट आरक्षित होने के कारण लड़ाई से बाहर हुए हैं। ऐसे लोग अब डमी कंडीडेट को जितवा कर खुद ही ग्राम प्रधानी और क्षेत्र पंचायत सदस्य बनना चाहते हैं।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव : सीट आरक्षित होने पर डमी उम्मीदवारों की लगी होड़
जनसंपर्क करने में जुटे संभावित प्रत्याशी
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद
सिद्धार्थनगर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण सूची जारी होते ही ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य के कई मजबूत दावेदार सीट सुरक्षित होने के कारण दौड़ से बाहर हो गए। ऐसे लोग अब पद और साख बचाने के लिए पत्नी, चालक, रसोइया, माली आदि मातहतों को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहे हैं।
डुमरियागंज तहसील क्षेत्र की एक ग्राम पंचायत के पूर्व में ग्राम प्रधान रह चुके एक बुजुर्ग एक बार फिर ग्राम प्रधानी हासिल करने के लिए बीते छह माह से क्षेत्र में जोर शोर से जनसंपर्क में जुटे थे। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि इस बार उनकी ग्राम सभा अनारक्षित रहेगी। बुधवार को जारी सूची में ग्राम पंचायत महिला के लिए सुरक्षित कर दी गई। बुजुर्ग अब अपनी पत्नी का नाम आगे कर जनसंपर्क करने में जुट गए हैं। इटवा तहसील क्षेत्र की एक ग्राम पंचायत के प्रधान पद पर एक जन नेता का दबदबा रहता है। इस बार यह सीट अनुसूचित वर्ग के लिए सुरक्षित हो गई। जन नेता समर्थक इस सीट को सामान्य कराने के लिए आपत्ति दाखिल करने की तैयारी में हैं। इसके साथ ही अनुसूचित वर्ग का एक वफादार व्यक्ति भी तलाशा जा रहा है जिसे जितवा कर ग्राम प्रधानी चलाई जा सके। ऐसे ही कई बड़े दावेदार सीट आरक्षित होने पर खानसामा, रसोइया, चालक, घरेलू सहायक, सहायिका को प्रत्याशी बना कर अपना वर्चस्व कायम रखने की जुगत में जुटे हैं। पंचायत चुनावों के जानकार बताते हैं कि काफी अर्से तक जनसेवा और नेतागीरी कर जनता में पैठ बना चुके कई लोग सीट आरक्षित होने के कारण लड़ाई से बाहर हुए हैं। ऐसे लोग अब डमी कंडीडेट को जितवा कर खुद ही ग्राम प्रधानी और क्षेत्र पंचायत सदस्य बनना चाहते हैं।
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