{"_id":"56f030044f1c1be612f14d25","slug":"water-tank-made-two-years-ago-did-not-come","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो साल पहले बने टैंक से नहीं आया पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो साल पहले बने टैंक से नहीं आया पानी
ब्यूरो/ अमर उजाला, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 21 Mar 2016 11:01 PM IST
विज्ञापन
बढ़नी क्षेत्र के समग्र ग्राम लाला बढ़नी में हाथी का दांत बना पानी की टंकी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ग्रामीण स्तर पर स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने का दावा फेल होता नजर आ रहा है। इसकी बानगी है बढ़नी ब्लॉक के समग्र गांव लाला बढ़नी है। यहां दो साल पहले मिनी वाटर टैंक के निर्माण के बावजूद ग्रामीणों को पानी नहीं मिल पा रहा है।
जेई प्रभावित इस गांव में वित्तीय वर्ष 2013-14 में मिनी वाटर टैंक लगाने की योजना बनी थी। गांव के लोगों को मिनी वाटर टैंक के जरिए स्वच्छ पेयजल मिलने की उम्मीदें थी, मगर विभागीय उदासीनता के चलते यह उम्मीदें टूटती नजर आ रही हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक निर्माण कार्य अधूरा छोड़कर ठेकेदार फरार हो गया है। यहां बने मिनी वाटर टैंक में मोटर तक नहीं लगाया गया, जिससे ग्रामीणों को पानी नहीं मिल पा रहा है। लोहिया समग्र गांव होने के बावजूद अभी तक इस समस्या को विभाग नजर अंदाज किए हुए है।
विज्ञापन
गत वर्ष गांव का निरीक्षण करने आए जिलाधिकारी से ग्रामीणों ने इसकी शिकायत की तो उन्होंने जल्द ही समस्या का समाधान कराने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। एक वर्ष बीतने के बाद भी जिलाधिकारी के फरमान का कोई असर नहीं हुआ।
पिछले दिनों गांव में कमिश्नर के दौरे पर भी लोगों ने इस मामले को उठाया था, मगर सुनवाई नहीं हो सकी। ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि बबलू चौबे ने बताया कि कई बार संबंधित विभाग व उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना दी जा चुकी है, मगर समस्या का समाधान नहीं हो सका।
लाखों की लागत से बना यह मिनी वाटर टैंक ग्रामीणों के लिए छलावा साबित हो रहा है। इस संबंध में जल निगम के अधिशासी अभियंता पवन कुमार ने बताया कि इंसेफेलाइटिस प्रभावित गांवों में स्वच्छ पेयजल के लिए मिनी वाटर टैंक बनाए गए थे। यदि कहीं कमी है तो जांच कराकर ठेकेदार से कार्य पूरा कराया जाएगा। ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल की समस्या शीघ्र दूर कराई जाएगी।
विज्ञापन
जेई प्रभावित इस गांव में वित्तीय वर्ष 2013-14 में मिनी वाटर टैंक लगाने की योजना बनी थी। गांव के लोगों को मिनी वाटर टैंक के जरिए स्वच्छ पेयजल मिलने की उम्मीदें थी, मगर विभागीय उदासीनता के चलते यह उम्मीदें टूटती नजर आ रही हैं।
विज्ञापन
ग्रामीणों के मुताबिक निर्माण कार्य अधूरा छोड़कर ठेकेदार फरार हो गया है। यहां बने मिनी वाटर टैंक में मोटर तक नहीं लगाया गया, जिससे ग्रामीणों को पानी नहीं मिल पा रहा है। लोहिया समग्र गांव होने के बावजूद अभी तक इस समस्या को विभाग नजर अंदाज किए हुए है।
विज्ञापन
गत वर्ष गांव का निरीक्षण करने आए जिलाधिकारी से ग्रामीणों ने इसकी शिकायत की तो उन्होंने जल्द ही समस्या का समाधान कराने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। एक वर्ष बीतने के बाद भी जिलाधिकारी के फरमान का कोई असर नहीं हुआ।
पिछले दिनों गांव में कमिश्नर के दौरे पर भी लोगों ने इस मामले को उठाया था, मगर सुनवाई नहीं हो सकी। ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि बबलू चौबे ने बताया कि कई बार संबंधित विभाग व उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना दी जा चुकी है, मगर समस्या का समाधान नहीं हो सका।
लाखों की लागत से बना यह मिनी वाटर टैंक ग्रामीणों के लिए छलावा साबित हो रहा है। इस संबंध में जल निगम के अधिशासी अभियंता पवन कुमार ने बताया कि इंसेफेलाइटिस प्रभावित गांवों में स्वच्छ पेयजल के लिए मिनी वाटर टैंक बनाए गए थे। यदि कहीं कमी है तो जांच कराकर ठेकेदार से कार्य पूरा कराया जाएगा। ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल की समस्या शीघ्र दूर कराई जाएगी।